नेपाल की राजधानी काठमांडू के एक शांत से मोहल्ले में उस समय हलचल मच गई, जब नेपाल पुलिस की विशेष टीम ने भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर एक ऐसे व्यक्ति को दबोचा, जिसकी तलाश भारत के खुफिया और पुलिस विभाग को वर्षों से थी। यह व्यक्ति कोई और नहीं, बल्कि भारत का मोस्ट वांटेड अवैध हथियार सप्लायर शेख सलीम उर्फ ‘सलीम पिस्टल’ था, जिसके बारे में जांच एजेंसियों को न केवल पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई से गहरे रिश्तों के सबूत मिले, बल्कि यह भी पता चला कि उसका सीधा संबंध अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी से है।
नेपाल में चला गुप्त ऑपरेशन
भारतीय खुफिया एजेंसियों को सूचना मिली थी कि ‘सलीम पिस्टल’ नेपाल में फर्जी पहचान के साथ रह रहा है, कभी काठमांडू तो कभी बिरगंज के इलाकों में ठिकाना बदलता रहता है। यह भी सामने आया कि उसने नेपाल का फर्जी नागरिकता प्रमाण-पत्र और पासपोर्ट बनवा लिया है। दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ (स्पेशल सेल) ने इस सूचना को गंभीरता से लिया। उसके मोबाइल सिग्नल, इंटरनेट गतिविधियों और संदिग्ध बैंकिंग लेन-देन का विश्लेषण किया गया। इसके बाद दिल्ली पुलिस के विशेष प्रकोष्ठ और भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने नेपाल पुलिस के साथ एक 48 घंटे का गुप्त ऑपरेशन (संयुक्त अभियान) चलाया। जिसमें कि एक किराए के मकान में छिपे ‘सलीम’ को बिना किसी गोलीबारी के गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के समय उसके पास से एक सैटेलाइट फोन, दो विदेशी पिस्तौल और कुछ एनक्रिप्टेड दस्तावेज मिले, जो संभवतः हथियार सौदों और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क से जुड़े हुए मालूम होते हैं।
दिल्ली के जाफराबाद में पैदा हुआ
दिल्ली के जाफराबाद में जन्मे शेख सलीम ने आठवीं कक्षा के बाद पढ़ाई नहीं की। उसने ड्राइवर का काम शुरू किया, लेकिन जल्दी ही अपराध की दुनिया की तरफ खिंच गया। उसने कई वारदात की, जिसमें चोरी, डकैती करते-करते वह अंतरराष्ट्रीय हथियार सप्लायर बन गया। जांच एजेंसियों के अनुसार, 2014-15 के आसपास सलीम का नेटवर्क पाकिस्तान के हथियार माफिया से जुड़ गया था। कराची और सिंध प्रांत के अवैध हथियार कारखानों में बनी पिस्तौल, एके-47 और कार्बाइन को अफगानिस्तान और नेपाल के रास्ते भारत में भेजा जाने लगा।
आतंकी संगठनों को हथियारों की सप्लाई
इस काले काम में आईएसआई के कुछ अधिकारी शामिल थे, जिनका मकसद था भारतीय गैंगस्टरों और आतंकी संगठनों को हथियार उपलब्ध कराना। दाऊद इब्राहिम की डी-कंपनी का रोल इस नेटवर्क में लॉजिस्टिक और फंडिंग का था। कराची में बैठे उसके पुराने साथी हथियारों की शिपमेंट का इंतजाम करते और नेपाल जैसे रास्तों से भारत में सप्लाई करवाते। यह नेटवर्क इतना मजबूत था कि कई बार भारतीय एजेंसियां इसकी डिलीवरी चेन को ट्रैक नहीं कर पातीं। सलीम सिर्फ एक डीलर नहीं था, वह पाकिस्तान के हथियार माफिया और भारत के गैंगस्टरों के बीच एक पुल की तरह था।
गैंगस्टर ग्राहकों की लंबी सूची
सलीम पिस्टल के ग्राहक कोई साधारण अपराधी नहीं थे। पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फैले गैंग उसके हथियारों का इस्तेमाल कर रहे थे। सलीम पिस्टल ने भारत-नेपाल के बीच खुली सीमा का फायदा उठाया। नेपाल में रहकर वह आसानी से भारत के गैंगस्टरों से संपर्क बनाए रखता और हथियारों की खेप भेजता। ऐसे में सलीम पिस्टल की गिरफ्तारी भारत की एक बड़ी सफलता है, लेकिन यह भी एक चेतावनी है कि दक्षिण एशिया में हथियारों का अवैध कारोबार कितना गहरा और संगठित है।

















