गत 6 अगस्त को नागपुर के भगवान नगर में धर्म जागरण न्यास के नवनिर्मित कार्यालय का लोकार्पण राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने किया।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि दुनिया के लोग कहते हैं कि हम अलग हैं, इसलिए हमें एक होना होगा। हमारा धर्म हमें विविधता को स्वीकार करना सिखाता है। हिंदू धर्म हमें मानव धर्म का पालन करना सिखाता है। यद्यपि सभी के मार्ग अलग-अलग हैं, लेकिन गंतव्य एक ही है। इसलिए हमें दूसरों का मार्ग बदलने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
सनातन धर्म आत्मीयता और विविधता को पूर्ण रूप से स्वीकार करना सिखाता है। भारत में विविधता होते हुए भी अंततः सभी लोग एक ही हैं। सभी विविधताओं को स्वीकार करना, यही सच्चा धर्म है। धर्म का कार्य केवल ईश्वर के लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए भी है. –मोहनराव भागवत, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
आपका मार्ग कौन सा है, इस बात पर कोई विवाद नहीं होना चाहिए। धर्म जागरण होने पर ही धर्म का आचरण करने वाला समूह अस्तित्व में रहेगा। यह केवल धार्मिक ग्रंथों तक सीमित नहीं रहेगा। विश्व को दिशा दिखाए, ऐसा आदर्श स्थापित करना भारत की जिम्मेदारी है।
सरसंघचालक ने कहा कि सनातन धर्म आत्मीयता और विविधता को पूर्ण रूप से स्वीकार करना सिखाता है। भारत में विविधता होते हुए भी अंततः सभी लोग एक ही हैं।
सभी विविधताओं को स्वीकार करना, यही सच्चा धर्म है। धर्म का कार्य केवल ईश्वर के लिए नहीं, बल्कि समाज के लिए भी है। इसलिए यदि धर्म सही है, तो समाज में संतुलन और शांति संभव है।
















