भारतीय सेना के जांबाज़ अधिकारियों और सैनिकों में स्पाइसजेट एयरलाइन के खिलाफ गुस्सा बढ़ता जा रहा है। यह गुस्सा अब सोशल मीडिया पर #BoycottSpiceJet अभियान के रूप में सामने आया है। इसकी अगुआई शौर्यचक्र से सम्मानित रिटायर्ड मेजर पवन कुमार कर रहे हैं, जिन्होंने अपने अनुभव साझा कर स्पाइसजेट कर्मचारियों के कथित गैर-व्यवसायिक और अपमानजनक व्यवहार का खुलासा किया है। यह मामला सैनिकों और आम लोगों के बीच गर्म चर्चा का विषय बन गया है।
मेजर पवन का अनुभव
मेजर पवन कुमार ने श्रीनगर से दिल्ली की स्पाइसजेट उड़ान SG-386 के दौरान हुए एक वाकये को साझा किया। उनके मुताबिक, बोर्डिंग गेट पर कर्मचारियों ने उनके साथ बदतमीजी की और उनकी स्थिति का मजाक उड़ाया। मेजर ने बताया कि कर्मचारियों ने उन्हें जानबूझकर परेशान किया, जिससे उनका अपमान हुआ। इस घटना ने उन्हें इतना आहत किया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर #BoycottSpiceJet कैंपेन शुरू किया। इस अभियान को सेना के दिग्गजों और कई नागरिकों ने भी समर्थन दिया है। मेजर ने अपने पोस्ट में कर्मचारियों को “काले सूट और सफेद शर्ट वाले गुंडे” तक कह डाला।
मेजर पवन ने आरोप लगाया कि उनका 12 किलो का केबिन बैगेज था, जिसके लिए एयरलाइंस ने उनसे अलग से 3000 रुपए चार्ज किए। जबकि, मैंने अपने लैपटॉप को अलग रखकर चेक इन करने के लिए कहा था। लेकिन बावजूद इसके स्टाने मेरी स्थिति का मजाक बनाते हुए बोर्डिंग गेट पर मुझसे बदतमीजी की। इसी के बाद सेना के मेजर ने सोशल मीडिया पर बायकॉट शुरू किया।
विवाद का दूसरा पहलू
लांकि, स्पाइसजेट ने इस मामले में अपनी सफाई दी है। एयरलाइन का कहना है कि लेफ्टिनेंट कर्नल सिंह, जिनका इस घटना से संबंध बताया जा रहा है, के पास 16 किलो के दो केबिन बैग थे, जो 7 किलो की अनुमति से ज्यादा थे।
स्पाइसजेट की ये पहली घटना नहीं है जब सेना के अधिकारियों के साथ इस प्रकार की बदतमीजी की गई हो। हाल ही में बीते 26 जुलाई को भी ऐसी ही वारदात हुई थी। उस दौरान लेफ्टिनेंट कर्नल रीतेश कुमार सिंह के साथ स्पाइसजेट के कर्मियों ने मारपीट की थी।

















