देहरादून । धराली में खीरगंगा में आई उफान को लेकर सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार भी शुरू हो गया है। जहां कुछ मजहबी इस घटना को लेकर मखौल उड़ा रहे हैं, वहीं कुछ तथाकथित पर्यावरणविद दुष्प्रचार कर लिख रहे हैं कि हजारों पेड़ काट दिए गए, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है। कुछ लोग यहां जलविद्युत परियोजनाओं पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि इस क्षेत्र में कोई परियोजना नहीं चल रही।
धराली जल प्रलय को लेकर तथ्य
- गंगोत्री हाईवे पर उत्तरकाशी से लेकर गंगोत्री तक 100 किमी पर आल वेदर रोड का निर्माण शुरू नहीं हुआ था। सर्वोच्च न्यायालय से अनुमति मिलने के बावजूद केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से सड़क निर्माण को मंजूरी अब तक नहीं मिली है।
- वर्ष 2010 में यह क्षेत्र ईको सेंसिटिव जोन घोषित हुआ। लिहाजा यहां किसी भी जलविद्युत परियोजना का निर्माण नहीं हो रहा, न ही अन्य कोई बड़ी परियोजना।
- धराली में खीरगंगा में वर्षों से भारी बाढ़ आती रही है। फ्लड जोन पर कब्जा कर अनियोजित तरीके से होटल और घर बनाए गए, जिससे नदी प्रवाह का क्षेत्र संकरा हुआ।
- खीरगंगा श्रीकंठ पर्वत से निकलती है। भारी बारिश के कारण संभवतः ग्लेशियर टूटकर एक झील बनी हो, जिसका पानी टूटकर तीन इलाकों में आया। इनमें से दो जगह आबादी नहीं थी, लेकिन धराली का आबादी वाला इलाका इसकी चपेट में आ गया।
- भटवाड़ी से धराली तक 40 किमी के हिस्से में दो जगह भू-धंसाव से हाईवे बंद है। एक पुल के बह जाने से धराली तक वाहन से पहुंचना फिलहाल नामुमकिन है।
- लगातार बिगड़ते मौसम के कारण हेलीकॉप्टर सेवा भी बाधित हो रही है।
सीएम धामी का संदेश
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि यह वक्त नकारात्मक होने का या राजनीति करने का नहीं है। सभी को राज्य के हित में आपदा के दौरान सेवा कार्यों में हाथ बंटाना चाहिए।
आपत्तिजनक टिप्पणी पर रोष
वहीं, धराली बाढ़ पर मजहबियों द्वारा की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के खिलाफ हिंदू समर्थक संगठनों ने पुलिस प्रशासन में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। उत्तरकाशी के धराली में हुई प्राकृतिक त्रासदी पर हास्यपूर्ण टिप्पणी करने वालों के खिलाफ हिंदू सामाजिक और धार्मिक संगठनों ने अपना रोष व्यक्त किया।

बीजेपी का बयान
बीजेपी प्रवक्ता सुरेश जोशी ने कहा कि दिल्ली-एनसीआर में बैठकर नकारात्मक बयान देने वाले देवभूमि के हितैषी नहीं हो सकते।

















