वृंदावन में स्थित श्री बांके बिहारी मंदिर, देश के सबसे प्रसिद्ध और श्रद्धालु हिंदुओं के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है। यहां हर साल लाखों की संख्या में भक्त दर्शन करने आते हैं। इतने बड़े मंदिर का प्रबंधन और संचालन ठीक से हो, इसके लिए सुप्रीम कोर्ट और उत्तर प्रदेश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से बनाई गई समिति- हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने बांके बिहारी मंदिर के प्रबंधन के लिए एक अंतरिम (अस्थायी) समिति बनाने का सुझाव दिया था। इसका उद्देश्य यह है कि मंदिर की देखरेख, रोजमर्रा का संचालन और भक्तों को बेहतर सुविधाएं मिलती रहें, जब तक इलाहाबाद हाईकोर्ट इस मामले में अंतिम फैसला नहीं सुना देता।
यूपी सरकार की सहमति- उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के इस सुझाव पर सहमति जताई है। सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल केएम नटराज ने सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जयमाला बागची की बेंच के सामने कहा कि सरकार को अंतरिम समिति बनाए जाने पर कोई आपत्ति नहीं है। यानी सरकार इस बात के लिए तैयार है कि एक अस्थायी समिति बने जो मंदिर का प्रबंधन देखे।
सनातनी होना जरूरी- हालांकि, यूपी सरकार ने इस समिति को लेकर एक अहम शर्त रखी है। सरकार ने कहा है कि समिति का नेतृत्व (अध्यक्ष पद) सिर्फ उस व्यक्ति को सौंपा जाए, जो “सनातनी हिंदू” हो। यानी कोई ऐसा व्यक्ति जो हिंदू धर्म को मानता हो और उसकी आस्था सनातन धर्म में हो।सरकार का तर्क है कि यह मंदिर हिंदू आस्था का केंद्र है, इसलिए इसके प्रबंधन की ज़िम्मेदारी ऐसे व्यक्ति के हाथों में होनी चाहिए, जो खुद उस आस्था को मानता हो। इसका मतलब यह है कि अगर कोई व्यक्ति किसी अन्य धर्म या पंथ को मानने वाला है, तो उसे इस समिति का अध्यक्ष नहीं बनाया जाएगा। गौरतलब है कि बांके बिहारी मंदिर में कॉरिडोर और कुछ अन्य विकास कार्यों को लेकर पहले से ही एक मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रहा है। यूपी सरकार ने इस संबंध में एक अध्यादेश (अस्थायी कानून) भी लाया है, जिस पर हाईकोर्ट को फैसला देना है। जब तक हाईकोर्ट का फैसला नहीं आता, तब तक सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित की जाने वाली यह समिति मंदिर का संचालन देखेगी।
















