अमेरिका में महिलाओं के लिए काम करने वाली संस्था कन्सर्न्ड वुमन फॉर अमेरिका (सीडब्ल्यूए) ने बहुत ही चौंकाने वाली रिपोर्ट प्रकाशित की है। यह रिपोर्ट उन आंकड़ों को दिखाती है जिन पर वोक जगत बात नहीं करना चाहता है और जो आंकड़े पूरी तरह से ही महिला विरोधी हैं। यह रिपोर्ट महिलाओं और लड़कियों के खेलों में पुरुष प्रतिभागिता की है।
इस संस्था ने पाया कि खुद को महिला कहने वाले पुरुषों ने संयुक्त राज्य अमेरिका में महिलाओं और लड़कियों से लगभग 1941 स्वर्ण पदक हड़प लिए हैं और जीतने वाली महिलाओं को दूसरे स्थान पर धकेल दिया। संस्था की सीईओ और अध्यक्ष पेनी नेन्स ने कहा कि “बहुत लंबे समय से, ट्रांसजेंडर पुरुषों ने महिला खेल श्रेणियों में महिलाओं और लड़कियों को विस्थापित, बाधित और चोट पहुंचाई है। हमारे शोध से इस मामले की चौंकाने वाली सच्चाई सामने आई है – 1,900 से ज़्यादा महिलाएं उन पुरुषों के बाद दूसरे स्थान पर आ गई हैं जो खुद को महिला होने का दावा करते हैं। यह बेहद अन्यायपूर्ण है। महिलाओं और लड़कियों को टाइटल IX के तहत जेंडर-संरक्षित एथलेटिक्स में भाग लेना चाहिए।“
संस्था ने कई प्रतिस्पर्धाओं के विषय में लिखा, जिनमें खुद को महिला मानने वाले पुरुषों ने महिलाओं को हराया है। इस संस्था ने 1980 के मध्य से महिलाओं के खेलकूद की प्रतिस्पर्धाओं में पैदायशी पुरुषों के हस्तक्षेप की घटनाओं को दर्ज किया है। इसके अनुसार:
• ट्रांसजेंडर पुरुष एथलीटों ने पेशेवर खेलों में महिलाओं से 493,173 डॉलर से ज़्यादा की पुरस्कार राशि चुराई है।
• सिर्फ़ कैलिफ़ोर्निया में ही, 521 से ज़्यादा महिलाओं और लड़कियों ने महिला वर्ग में पुरुषों से कम रजत पदक जीते हैं।
• ट्रांसजेंडर पुरुषों ने 10,067 से ज़्यादा महिला खेल स्पर्धाओं, शौकिया और पेशेवर में भाग लिया। हज़ारों महिलाओं और लड़कियों को अपनी ही टीमों, ट्रैक, मैदानों और लीडरबोर्ड पर विस्थापित और बाधित होना पड़ा है।
पेनी नेन्स ने कहा, “हम अमेरिकी ओलंपिक और पैरालंपिक समिति, एनसीएए और संयुक्त राज्य अमेरिका के सभी स्वतंत्र राष्ट्रीय शासी निकायों से आग्रह करते हैं कि वे महिलाओं के प्रति अहितकारी किसी भी भेदभावपूर्ण नीति को वापस लें। सीडब्ल्यूए इन शासी निकायों से यह भी आग्रह करता है कि वे इस अध्ययन में शामिल 1,941 महिलाओं और लड़कियों के खोए हुए स्वर्ण पदक वापस लौटाएं, नकद पुरस्कारों का पुनर्वितरण करें, और उन सभी के लिए लीडरबोर्ड सही करें जिन्होंने अपने असली खिताब और पुरस्कार जैविक पुरुषों के हाथों गंवा दिए हैं।”
ऐसा नहीं है कि यह रिपोर्ट पहली है। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र की Violence against women and girls, its causes and consequences रिपोर्ट में यह बताया गया था कि कैसे जैविक महिलाओं के साथ खेल-कूद में इसलिए हिंसा बढ़ रही है क्योंकि उनके खेल में जैविक पुरुष महिला बनकर आ गए हैं और उनके मेडल्स ही नहीं छीन रहे हैं, बल्कि महिलाओं के साथ शरीरिक हिंसा भी कर रहे हैं।
पिछले वर्ष अगस्त मे प्रकाशित इस रिपोर्ट में कहा गया था कि खेलकूद प्रतिस्पर्धाओं में लगभग 900 खिताब महिलाओं के हाथों से छीनकर महिला रूप में पुरुषों के पास चले गए हैं। इसमें महिलाओं और पुरुषों की शारीरिक बनावट में अंतर बताते हुए यह बताया गया था कि कैसे शक्तिशाली पुरुष महिलाओं पर हावी हो जाते हैं।
कई मामले सामने आए हैं, जो यह बताते हैं कि कैसे महिला होने का दावा करने वाले पुरुष महिलाओं के लिए और बच्चों के लिए खतरा बन जाते हैं। ट्रांस महिला अर्थात जैविक पुरुष खुद को महिला बताते हैं और महिलाओं के निजी स्पेस में प्रवेश करने के अधिकार की मांग कर रहे हैं, जबकि उन्होंने पुरुष जननांगों की सर्जरी नहीं कराई है। इस विषय को लेकर लगातार मुखर रहने वाली लेखिका जे के रोलिंग ने कहा कि ट्रांस वुमन जैसी कोई धारणा होती ही नहीं है। ट्रांस वुमन दरअसल आदमी ही हैं। आवाज उठाने पर जे के रोलिंग पर ऑनलाइन हमले होते रहते हैं। यह भी घटनाएं सामने आई थीं जब ट्रांस वुमन ने महिलाओं का बलात्कार किया।
क्या हैं ट्रांस वुमन?
यह प्रश्न बार-बार उठता है कि ट्रांस वुमन को पुरुष क्यों कहा जाता है? दरअसल ट्रांस वुमन का अर्थ उन पुरुषों से है जो खुद को महिला मानते हैं। उनकी सोच है कि वे गलत शरीर में पैदा हो गए हैं और खुद को इस शरीर का नहीं मानते हैं। वे या तो हार्मोनल थेरेपी या फिर सर्जरी द्वारा महिला बनते हैं। जहां ये लोग खुद को असली महिला मानते हैं तो वहीं इनका विरोध करने वाले इन्हें आदमी ही बताते हैं।

















