कट्टरपंथियों के इशारे पर अब शेख हसीना के घर पर गिरी गाज! 'गणभवन' बनेगा 'क्रांति भवन'
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कट्टरपंथियों के इशारे पर अब शेख हसीना के घर पर गिरी गाज! ‘गणभवन’ बनेगा ‘क्रांति भवन’

बांग्लादेश में कट्टरपंथ के उभार और हिन्दुओं पर अत्याचारों के अंतहीन सिलसिले से नई चुनौतियां उभरी हैं। कहना न होगा कि हसीना के पतन के बाद बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतें मजबूत हुई हैं। इसका प्रमाण आंकड़े दे रहे हैं

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Aug 5, 2025, 02:55 pm IST
in विश्व, विश्लेषण
गणभवन पर 'छात्रों' और उनकी आड़ में मजहबी उन्मादी तत्व चढ़ आए थे

गणभवन पर 'छात्रों' और उनकी आड़ में मजहबी उन्मादी तत्व चढ़ आए थे

गत वर्ष 5 अगस्त यानी ठीक एक साल पहले बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से जबरन त्यागपत्र लेने के बाद उनके शासन का पतन हुआ था। उस वक्त हुए ‘छात्र आंदोलन’ का ताप ऐसा बढ़ा कि छात्र और उनके साथ मजहबी उन्मादी तत्व हसीना के दुश्मन बन गए थे। ऐसे में हसीना ने त्यागपत्र देकर देश छोड़ दिया था। उसके बाद उनके तत्कालीन आधिकारिक आवास गणभवन पर ‘छात्रों’ और उनकी आड़ में मजहबी उन्मादी तत्व चढ़ आए थे और उसे तहस—नहस ही नहीं किया था, बल्कि लूट लिया था। अब यूनुस की अंतरिम सरकार ने उस गणभवन को संग्रहालय में बदलने का ऐलान किया है। इसका नाम भी अब गणभवन नहीं, क्रांति भवन होगा। कथित तौर पर ऐसा जमाते इस्लामी के उन मजहबी उन्मादियों और हसीना की धुर विरोधी पार्टी बीएनपी के दबाव में किया जा रहा है जो यूनुस सरकार को रिमोट कंट्रोल से चला रहे हैं।

एक साल पहले बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना से जबरन त्यागपत्र लेने के बाद उनके शासन का पतन हुआ था

इससे पूर्व यूनुस सरकार शेख हसीना और उनके कुछ निकटवर्ती नेताओं पर कथित बदले की भावना से मानवाधिकार उल्लंघनों और तानाशाही के गंभीर आरोप थोपे हैं और उन पर मुकदमा चलाया जा रहा है।

यह ‘गणभवन’ कभी कड़ी सुरक्षा वाला क्षेत्र था, जहां आम जनता की पहुंच नहीं थी। अब इसे जनता के लिए खोलकर यह संदेश देने की कोशिश की जा रही है कि ‘शेख हसीना की सत्ता अब इतिहास में दफनाई जा चुकी है’। निर्माणाधीन संग्रहालय के क्यूरेटर तंज़ीम वहाब का कहना है कि इस संग्रहालय में मारे गए प्रदर्शनकारियों की कलाकृतियां लगाई जाएंगी।

दरअसल शेख हसीना की सत्ता का पतन 1 जुलाई 2024 को ही शुरू हो गया था, जब विश्वविद्यालय के छात्रों ने सरकारी नौकरियों में कोटा व्यवस्था के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू किए थे। उस आंदोलन ने तेजी से रफ्तार पकड़ी और 5 अगस्त 2024 को प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री आवास को घेर लिया। शेख हसीना को हेलीकॉप्टर की मदद से आक्रोशित भीड़ से बचकर निकलना पड़ा था और उन्होंने भारत में शरण ली थी।

इसके बाद हसीना की 15 वर्षों की उस सत्ता को उखाड़ फेंका गया जिसके दौरान देश विकास की राह पकड़ रहा था और विश्व में एक छवि बनाने में लगा था। लेकिन उसके बाद से उस देश का ऐसा पतन देखने में आया है जहां अंतरिम सरकार नागरिकों की सुरक्षा नहीं कर पाई है और जिन्ना के उस देश की गोद में बैठने को उतावली हो चली है जिसने 1971 से पहले वहां दमन का भयानक मंजर दिखाया था।

लूटमार करते ‘छात्र’ (फाइल चित्र)

उसके बाद से शेख हसीना पर एक के बाद एक आरोप लगाए गए हैं, जिनमें विपक्षी नेताओं की गिरफ्तारी और कथित हत्याएं, अल्पसंख्यकों पर अत्याचार, राजनीतिक विरोधियों को गायब कर देने के आरोप शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई-अगस्त 2024 के बीच करीब 1,400 लोग मारे गए थे। इधर बांग्लादेश की अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने हसीना पर औपचारिक रूप से मुकदमा चलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उधर 77 वर्षीय हसीना ने ढाका में मानवता के विरुद्ध अपराधों के आरोपों पर चल रहे मुकदमे में शामिल होने के अदालती आदेशों को अनदेखा कर दिया है। उन्होंने इन आरोपों को झूठा बताकर इनसे इनकार किया है।

लेकिन बांग्लादेश में कट्टरपंथ के उभार और हिन्दुओं पर अत्याचारों के अंतहीन सिलसिले से नई चुनौतियां उभरी हैं। कहना न होगा कि हसीना के पतन के बाद बांग्लादेश में कट्टरपंथी ताकतें मजबूत हुई हैं। इसका प्रमाण आंकड़े दे रहे हैं। यूनुस के अब तक के करीब एक साल के शासन में मॉब लिंचिंग की घटनाओं में 12 गुना बढ़ोतरी हुई है। अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं पर सुनियोजित हमले हुए हैं, हिन्दू महिलाओं का जीना मुहाल बना दिया गया है, हिन्दुओं की संपत्ति लूटी गई है, राजनीतिक हिंसा और प्रतिशोध की घटनाएं बढ़ी हैं। हालांकि दिखावे के लिए यूनुस की अंतरिम सरकार ने सुधार आयोगों का गठन किया है, लेकिन अब तक लोकतंत्र के रास्ते पर लौटने के लिए चुनाव की कोई स्पष्ट रूपरेखा नहीं बनी है। वैसे सरकार ने वादा किया है कि 2026 की शुरुआत में चुनाव कराए जाएंगे।

शेख हसीना का पतन और उनके महल को संग्रहालय में बदलना बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में एक हैरान करने वाला मोड़ साबित हो सकता है। यूनुस की सरकार अगर इसी प्रकार कट्टरपंथी ताकतों के इशारे पर चलती रही तो वहां पाकिस्तान और चीन अपना शिकंजा कसते जाएंगे और लगभग 17 करोड़ की आबादी वाला वह इस्लामी देश अन्य इस्लामी देशों की तरह अराजकता की गर्त में तेजी से उतरता जाएगा।

Topics: कट्टरपंथहिन्दुओं पर अत्याचारganabhavanHinduBangladeshislamistबांग्लादेशSheikh HasinaStudents protestIndia
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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