गत जून को पुणे में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने ‘दर्शन योगेश्वराचे-आयुर्वेद भास्कर दादा वैद्य खडीवाले’ पुस्तक का लोकार्पण किया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि विविधता से भरी इस दुनिया के मूल में एक ही सिद्धांत है। उसे पहचानकर व्यवहार करना ही अपनापन है। यही समाज की स्थायी भावना है।
अपनत्व के सूत्र में सबको बांधना ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्य है। यदि कोई व्यक्ति अपनेपन की ओर झुकता है, तो वह देवतुल्य हो जाता है। उन्होंने कहा कि आम व्यक्ति महापुरुषों के मार्ग पर चलने से हिचकिचाता है। हालांकि, वह उन लोगों को अपना मानता है, जो अपनेपन की राह पर चलते हैं।
इस अपनेपन से ही सबका जीवन उज्ज्वल हो, इसके लिए अपनी उपलब्धियों का व्यय कर स्वयं के जीवन को भी उज्ज्वल बनाने की प्रेरणा समाज को आगे ले जाती है। इसी से समाज में परिवर्तन होता है। सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी के कुलपति पद्मभूषण डॉ. एस. बी. मजूमदार ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ दादा खडीवाले की रग-रग में था।
वे कई सामाजिक परियोजनाओं में सहभागी थे। इसके पीछे संघ की प्रेरणा थी। वैद्य विनायक परशुराम खडीवाले ने कहा कि दादा ने आयुर्वेद के अलावा समाजसेवा, अनुसंधान, जनकल्याण ब्लड बैंक, जनकल्याण आई बैंक आदि कई संस्थाओं का निर्माण किया है। इस अवसर पर विविध संगठनों के अनेक वरिष्ठ कार्यकर्ता उपस्थित थे।
















