आयरलैंड में पिछले कुछ दिनों से भारतीयों पर हमले बढ़ते जा रहे हैं। वे अपनी घृणा का शिकार भारतीयों को बना रहे हैं। पिछले कई दिनों से मीडिया में भारतीयों पर हमले की खबरें सुर्खियां पा रही हैं। हाल ही में संतोष यादव पर हमला हुआ था और उन्होंने अपने साथ हुए हमले के विषय में linkedin पर पोस्ट किया था। उन्होंने लिखा था कि वे रात को खाना खाने के बाद अपने अपार्टमेंट के पास टहल रहे थे कि छ किशोरों के एक समूह ने उन पर पीछे से हमला कार दिया। उन्होंने उनका चश्मा छीन लिया, उसे तोड़ा और फिर उन्हें उनके सिर, चेहरे, गर्दन, छाती हाथ और पैर सब जगह मारा। वे उन्हें घायल छोड़कर चले गए।
गाल की हड्डी टूटी
फिर जब वे Blanchardstown अस्पताल पहुंचे तो मेडिकल टीम ने पुष्टि करते हुए कहा कि उनकी गाल की हड्डी टूट गई है और फिर उन्हें स्पेशलिस्ट केयर में भेज दिया गया। उन्होंने आगे लिखा कि यह कोई अकेली घटना नहीं है। डबलिन में भारतीय पुरुषों और अन्य अल्पसंख्यकों पर नस्लवादी हमले बढ़ रहे हैं—बसों में, आवासीय परिसरों में और सार्वजनिक सड़कों पर भी। फिर भी सरकार चुप है। इन अपराधियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। वे खुलेआम घूम रहे हैं और फिर से हमला करने के लिए दुस्साहस कर रहे हैं।
इस पोस्ट पर उन्हें कई लोगों ने समर्थन दिया और यह कहा कि सुरक्षा सभी का अधिकार है और सभी को सुरक्षित रहना चाहिए।
हिन्दुओं के खिलाफ ऑनलाइन घृणा बढ़ी
भारतीयों पर आयरलैंड पर हमले बढ़ रहे हैं। परंतु यदि देखा जाए तो हिंदुओं के प्रति ऑनलाइन घृणा बढ़ रही है। दुर्भाग्य से भारतीयों के प्रति जो अपराध किये जा रहे हैं, उन पर “कथित” कहकर पर्दा भी डालने का प्रयास किया जा रहा है। आयरलैंड में भारत के राजदूत अखिलेश मिश्रा ने भारतीयों पर हो रहे हमले को “कथित” कहने पर भी रोष व्यक्त करते हुए पोस्ट लिखा था कि “आखिर एक “कथित” हमले से इतनी भयानक चोट और खून कैसे बह सकता है? इसकी असंवेदनशीलता और अस्पष्टता देखकर स्तब्ध हूँ।“
https://Twitter.com/AkhileshIFS/status/1947289213445018007?
कुछ मीडिया आउटलेट्स अलग ही कहानी गढ़ रहे
स्तब्ध होना स्पष्ट भी होता है क्योंकि इन घटनाओं को दूसरा जामा पहनाने का भी प्रयास कुछ मीडिया पोर्टल्स द्वारा किया जाता है। अखिलेश मिश्रा ने यह पोस्ट 19 जुलाई को एक 40 वर्षीय भारतीय के साथ यह आरोप लगाते हुए हिंसा की गई थी कि उसने किसी बच्चे के साथ गलत हरकत की। जबकि ऐसा कुछ भी नहीं था। हमलावरों ने उसके कपड़े फाड़ दिए थे और उसका फोन और बैंक कार्ड लेकर चले गए थे और उसे मरने के लिए छोड़ दिया था। इस घटना के बाद एक और भारतीय जो कि पिछले तीन वर्षों से आयरलैंड में है, ने लिखा कि उन्हें यह विश्वास नहीं हो रहा है कि वे यह कह रहे हैं, परंतु आयरलैंड सुरक्षित नहीं है। वे अब वापस जाना चाहते हैं। उन्हें तीन साल पहले हमेशा लगता था कि यह एक बहुत शानदार देश है, परंतु यह जगह अब बर्बाद होने जा रही है।“
हिन्दू त्योहारों से दिक्कत
इस घटना को लेकर सोशल मीडिया में आयरलैंड के कई लोगों के भी पोस्ट हैं और जिनमें यही कहा जा रहा है कि भारतीय (हिंदुओं) के आने से वहाँ का कल्चर बदल रहा है और उन्हें हिन्दू पर्वों के सड़कों पर उल्लास से परेशानी है। उनका कहना है कि यह सब भारत में ही होना चाहिए। किसी ने लिखा कि क्या आयरलैंड के लोग भारत आकर सड़कों पर ऐसे शोभायात्रा निकाल सकते हैं?
भारतीयों और विशेषकर हिंदुओं के प्रति, उनके पर्वों के प्रति जो घृणा है, वह देखकर हर कोई स्तब्ध हो ही सकता है और हो भी जाता है। जो लोग यह कह रहे हैं कि क्या भारत में आकर वे (ईसाई) लोग ऐसी शोभायात्रा अपने पर्वों की निकाल सकते हैं, तो उन्हें क्रिसमस के दौरान भारत आना चाहिए। उन्हें देखना चाहिए कि भारत कितने उत्साह से क्रिसमस मनाता है। क्रिसमस का एक प्रकार से भारतीयकरण कर लिया गया है। कैसे बाजारों में रौनक रहती है और क्रिसमस ट्री भी बिकते हैं।
भारत की भूमि किसी से घृणा नहीं करती
यह भारत की भूमि है जो किसी भी धर्म से घृणा नहीं सिखाती है। पूरे विश्व में पारसी यदि अपने पर्व कहीं पूरी स्वतंत्रता से मना सकते हैं तो वह भूमि भारत ही है। भारत में मोहर्रम में ताजिये भी निकलते हैं। भारत भूमि प्रेम सिखाती है, एकात्मकता का संदेश देती है। भारत में हिन्दू पर्व जितने धूमधाम से मनाए जाते हैं, उतने ही अन्य पर्व भी। किसी भी पर्व में कोई अंतर नहीं रहता है। किसी से भी घृणा नहीं है। यही कारण है कि हिन्दू पहचान वाला भारत सभी का स्वागत करता है, सभी को गले लगाता है। पारसियों का भारत में उच्च पदों पर पहुंचना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।
यह दुर्भाग्य की बात है कि जिस भारत में इस प्रकार का संदेश पूरे विश्व को दिया जाता है, उसी भारत के नागरिक और विशेषकर हिन्दू विदेशों में नस्लवाद का शिकार होते हैं। उनके धार्मिक पर्वों का उपहास कुछ लोगों द्वारा उड़ाया जाता है और उनके वस्त्र, उनके धार्मिक प्रतीकों को निशाना बनाया जाता है।












