गुरुकुल से आगे बढ़कर शास्त्र को समाज के केंद्र में लाया पतंजलि : स्वामी रामदेव
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गुरुकुल से आगे बढ़कर शास्त्र को समाज के केंद्र में लाया पतंजलि : स्वामी रामदेव

पतंजलि विश्वविद्यालय हरिद्वार में आयोजित तृतीय राष्ट्रीय स्वर्णशलाका प्रतियोगिता में 141 प्रतिभागियों व प्रतिष्ठित विद्वानों ने भाग लिया।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो
Jul 31, 2025, 05:52 pm IST
inउत्तराखंड

हरिद्वार । पतंजलि विश्वविद्यालय हरिद्वार में 31 जुलाई और एक अगस्त तक आयोजित तृतीय राष्ट्रीय स्वर्णशलाका प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ हुआ। दो दिवसीय इस शास्त्रार्थ प्रतियोगिता में देश के कोने-कोने से पधारे 141 प्रतिभागियों सहित प्रतिष्ठित संस्कृत विद्वानों एवं शास्त्रज्ञों ने भाग लिया। इस आयोजन में दिल्ली, हरियाणा, उत्तराखंड, असम, झारखंड, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक समेत अनेक राज्यों से संस्कृत साहित्य में निपुण विद्वानों एवं विद्यार्थियों ने अपनी विद्वता का परिचय दिया।

शास्त्रीय परंपरा को पुनर्जीवित करने का उद्देश्य

प्रतियोगिता का मुख्य उद्देश्य भारतीय शास्त्रीय परंपरा के गहन विमर्शों को पुनर्जीवित करना था। मंच पर प्रतिभागियों ने अष्टाध्यायी, श्रीमद्भगवद्गीता, नवोपनिषद, चाणक्यनीति, हठयोगप्रदीपिका, अष्टावक्रगीता, अष्टांगहृदयम्, बृहदारण्यक-छान्दोग्योपनिषद, योगदर्शन, ईश-केनोपनिषद जैसे महान शास्त्रों पर गहन वाक्यार्थ और शास्त्रार्थ प्रस्तुत किए।

स्वामी रामदेव का प्रेरणादायक संबोधन

पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति योगऋषि स्वामी रामदेव जी ने अपने प्रेरणास्पद उद्बोधन में कहा कि शास्त्र और सनातन परंपरा मनुष्य के नेतृत्व विकास और जीवन की दिशा निर्धारण में सहायक हैं। उन्होंने कहा कि शास्त्र स्मरण से सद्गुणों की प्राप्ति होती है और यह प्रतियोगिता आध्यात्मिक पुनर्चिंतन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

आचार्य बालकृष्ण का संदेश

पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति एवं आयुर्वेद शिरोमणि आचार्य बालकृष्ण ने प्रतियोगिता में उपस्थित सभी अतिथियों, वक्ताओं और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि शास्त्रश्रवण से पुण्य की प्राप्ति होती है और यह आत्मिक बल का संचार करता है। उन्होंने विद्यार्थियों से सनातन परंपरा के अनुकरण का आग्रह करते हुए इसे समाज की समृद्धि का पथ बताया।

आयोजन की विशेषता और विद्वानों की उपस्थिति

इस आयोजन ने यह सुस्पष्ट कर दिया कि पतंजलि विश्वविद्यालय न केवल वैदिक शिक्षा और शोध का केंद्र है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों का अग्रदूत भी है। इस प्रतियोगिता ने ज्ञान, संवाद और आध्यात्मिक चेतना की एक नई धारा प्रवाहित की। मंच पर उपस्थित प्रमुख शास्त्रज्ञों में प्रो. दिनेश चंद्र शास्त्री, आचार्य भवेंद्र, प्रो. ब्रजभूषण ओझा, प्रो. भोला झा, प्रो. मनोहर लाल आर्य, प्रो. विजयपाल प्रचेता, प्रो. बलवीर आचार्य, प्रो. मुरली कृष्णा, प्रो. शिवानी, प्रो. मधुकेश्वर भट्ट, डॉ. एनपी सिंह, डॉ. साध्वी देवप्रिया आदि शामिल रहे।

सहयोगी संस्थानों की भागीदारी

पतंजलि विश्वविद्यालय और इसके सहयोगी संस्थानों — पंतजलि रिसर्च फाउंडेशन, पतंजलि आयुर्वेद कॉलेज, आचार्यकुलम, पतंजलि योगपीठ (फेज-1 एवं फेज-2) से जुड़े अनेक विद्वान, अधिकारीगण, संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य और छात्र-छात्राएं इस कार्यक्रम में शामिल हुए।

समापन समारोह और पारितोषिक वितरण

कल इस प्रतियोगिता के समापन समारोह में शास्त्रार्थ में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित कर पारितोषिक प्रदान किए जाएंगे। यह सम्मान उनकी विद्वत्ता, शास्त्र-साधना एवं संवाद कौशल के लिए दिया जाएगा, जिससे वे अन्य विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा बन सकें।

Topics: पतंजलि विश्वविद्यालय हरिद्वारराष्ट्रीय स्वर्णशलाका प्रतियोगितासंस्कृत शास्त्रार्थ प्रतियोगितास्वामी रामदेव पतंजलिआचार्य बालकृष्ण भाषणवैदिक शिक्षा हरिद्वार
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