हाइलाइट्स
-17 साल बाद मालेगांव बम धमाके का फैसला आया है
-साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित सहित सभी बरी
-बीजेपी हिंदू आतंकवाद के झूठ गढ़ने के लिए कांग्रेस पर आक्रमक
-कोर्ट ने कहा- आरोपियों के खिलाफ ठोस सबूत नहीं है
-29 सितंबर, 2008 को मुंबई से करीब 200 किलोमीटर दूर हुआ था मालेगांव विस्फोट
-मालेगांव कस्बे में एक मस्जिद के पास हुआ था विस्फोट
-कांग्रेस के पी चिदंबरम और सुशील कुमार शिंदे ने फैलाया था भगवा आतंकवाद का झूठ
नई दिल्ली। महाराष्ट्र के मालेगांव बम धमाके पर गुरुवार को एनआईए कोर्ट का फैसला आया है। कोर्ट ने बीजेपी की पूर्व सांसद साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर, लेफ्टिनेंट कर्नल पुरोहित, मेजर रमेश उपाध्याय (सेवानिवृत्त), अजय राहिरकर, सुधाकर द्विवेदी, सुधाकर चतुर्वेदी और समीर कुलकर्णी को बरी कर दिया। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP), कांग्रेस पर हमलावर हो गई है। बीजेपी ने कांग्रेस से भगवा आतंकवाद का झूठ गढ़ने के लिए माफी मांगने के लिए कहा है। बीजेपी का कहना है कि सनातन धर्म को बदनाम करने के लिए कांग्रेस ने हिंदू और भगवा आतंकवाद का झूठ फैलाया था।
‘सनातन धर्म को बदनाम करने की कांग्रेस की साजिश थी मालेगांव’
भारतीय जनता पार्टी के नेता कैलाश विजयवर्गीय ने भी इस फैसले के बाद कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने इस फैसले को कांग्रेस के गाल पर करारा तमाचा बताया है। उन्होंने न्यूज एजेंसी एएनआई से बातचीत करते हुए कहा कि मालेगांव में सनातन धर्म को बदनाम करने की साजिश थी। एक नये शब्द का सृजन हुआ था हिंदू आतंकवाद। हिंदू कभी आतंकवादी नहीं हो सकता।
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कांग्रेस और पी चिदंबरम ने फैलाया था हिंदू आतंकवाद का झूठ
उन्होंने कहा कि हिंदू सहिष्णु है। सारे विश्व के लोग जानते हैं कि जो देश संकट में है, हिंदुस्तान ने उसे पनाह दी है। हिंदू आतंकवाद का शब्द कांग्रेस और पी चिदंबरम ने सृजन किया था। आज पूरी कांग्रेस के गाल पर करारा तमाचा लगा है। न्यायपालिका ने जिस तरह से मालेगांव धमाके के निरपराध लोगों को बरी किया है, यह कांग्रेस के लिए शर्म से डूबने की बात है। उन लोगों को कितनी यातनाएं दी गई। इस निर्णय के बाद हम उन सभी कांग्रेस के नेताओं के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई करवाएंगे।
फैसला देते हुए क्या कहा NIA कोर्ट ने?
NIA अदालत ने कहा कि सिर्फ शक वास्तविक सबूत की जगह नहीं ले सकता। सबूत के अभाव में आरोपियों को संदेह का लाभ मिलना चाहिए। न्यायाधीश ने फैसला पढ़ते हुए कहा कि समग्र साक्ष्य अदालत में आरोपियों को दोषी ठहराने का विश्वास नहीं जगाते। दोषसिद्धि के लिए कोई विश्वसनीय और ठोस सबूत नहीं है। यह साबित नहीं हुआ है कि विस्फोट में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल प्रज्ञा ठाकुर के नाम पर पंजीकृत थी, जैसा कि अभियोजन पक्ष ने दावा किया था।
अदालत ने कहा, ‘अभियोजन पक्ष ने यह साबित कर दिया है कि विस्फोट हुआ था, लेकिन यह साबित नहीं कर सका कि विस्फोटक मोटरसाइकिल में लगाया गया था। किसी भी गवाह ने इसका समर्थन नहीं किया और इसलिए न तो बैठक और न ही रची गई साजिश साबित हो सकी।’

















