ब्रिटेन में इन दिनों मजहबी कट्टरता और सरकार के बीच संबंधों को लेकर चर्चाएं बहुत गरम हैं। कई मामले ऐसे आ रहे हैं, जिन्हें लेकर आम लोग प्रश्न कर रहे हैं कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? विपक्षी सांसद भी प्रश्न कर रहे हैं कि क्या यह सब केवल वोटबैंक के लिए हो रहा है? और क्या वोट बैंक के लिए मजहबी कट्टरता के सामने आत्मसमर्पण कर दिया जाएगा?
शरिया लॉ एडमिनिस्ट्रेटर का विवादित विज्ञापन
ऐसा ही एक मामला पिछले दिनों प्रकाश में आया, जब ब्रिटेन में डिपार्टमेंट फॉर वर्क एंड पेंशन्स में शरिया लॉ एडमिनिस्ट्रेटर की नौकरी का विज्ञापन था और उसमें प्रशासकीय भूमिका के लिए सालाना £23,500 का वेतन था। जैसे ही सरकारी वेबसाइट पर शरिया लॉ एडमिनिस्ट्रेटर की नौकरी का खुलासा हुआ, वैसे ही लोगों ने कीर स्टार्मर सरकार की आलोचना आरंभ कर दी।
विपक्ष और जनता का गुस्सा
इसे लेकर विपक्षी सांसदों का भी गुस्सा सरकार को झेलना पड़ा। डिडसबरी मस्जिद ने मेनचेस्टर इस्लामिक सेंटर नामक स्वतंत्र चैरिटी की ओर से सरकारी नौकरी के रूप में पोस्ट कर दिया था। मेनचेस्टर इस्लामिक सेंटर का कहना था कि ब्रिटेन में शरिया केंद्र कानूनी कोर्ट नहीं हैं, बल्कि वे सलाह देने वाली सेवाओं के रूप में काम कर रहे हैं, जो कि ब्रिटेन में पूरी तरह से वैध हैं।
ब्रिटेन में बढ़ता इस्लामीकरण
ब्रिटेन में बढ़ता इस्लामीकरण वहाँ के नागरिकों के लिए चिंता का विषय है और इसे लेकर लोग लगातार अपनी आवाजें उठा भी रहे हैं। यह भी पाठकों को याद ही होगा कि ब्रिटेन शरिया काउन्सिल्स की राजधानी बनता जा रहा है, जहां पर 85 शरिया अदालतें चल रही हैं और जो शादी और तलाक जैसे मामलों पर फैसले और सलाहें दे रही हैं, जो ब्रिटेन में कानूनी नहीं हैं।
सांसद रूपर्ट लो की कड़ी आपत्ति
सरकार की मजहबी नीतियों पर हमेशा प्रश्न करने वाले स्वतंत्र सांसद रूपर्ट लो ने सोशल मीडिया पर भी इसका विरोध किया था और प्रश्न किया था कि ऐसा कैसे सरकार द्वारा किया जा सकता है? और साथ ही उन्होनें वर्क एंड पेंशन सेक्रेटरी लिज़ केंडल को पत्र लिखा था कि “मैं यह पत्र इस बात पर अपनी गहरी चिंता और घृणा व्यक्त करने के लिए लिख रहा हूँ कि कार्य एवं पेंशन विभाग का ‘नौकरी ढूँढ़ें’ प्लेटफ़ॉर्म वर्तमान में ‘शरिया कानून प्रशासक’ के लिए विज्ञापन दे रहा है। और जिसकी आवश्यकताओं में शरिया कानून में डिग्री और मुस्लिम देशों की शरिया अदालतों में अनुभव शामिल है।“
उन्होनें पत्र में लिखा था कि ‘डीडब्ल्यूपी यूनाइटेड किंगडम में एक समानांतर कानूनी प्रणाली को बढ़ावा दे रहा है और उसे स्थापित करने में सहायता कर रहा है। ‘शरिया कानून को हमारे देश में एक मान्यता प्राप्त कानूनी ढाँचे के रूप में लागू करने का कोई स्थान नहीं है। यह ब्रिटिश कानून और हमारी जीवनशैली के साथ मूलतः असंगत है।’
सोशल मीडिया पर विरोध और बहस
सोशल मीडिया पर इसका विरोध हुआ और साथ ही एक्स पर sharia law ट्रेंड भी हुआ। लोगों ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ब्रिटेन पर इस्लामी कब्जा पूरा हो गया है क्योंकि अब सरकार की वेबसाइट पर ही शरिया लॉ एडमिनिस्ट्रेटर की नौकरी का विज्ञापन आ रहा है। सांसद जेम्स मैकमुरडोक ने एक्स पर लिखा कि यदि यूके मे शरिया कानून लागू नहीं है, तो उन्हें एडमिनिस्ट्रेटर की जरूरत क्यों है?
रिफॉर्म पार्टी के जिया यूसुफ ने भी एक्स पर लिखा कि यूके में केवल एक ही कानूनी व्यवस्था है और इसे बदलने का कोई भी प्रयास गैर-कानूनी होना चाहिए। ब्रिटिश सरकार करदाताओं से अपने स्वयं के विनाश के लिए धन मांग रहा है।
मीडिया और पत्रकारों की प्रतिक्रिया
जीबी न्यूज के पत्रकार एलेक्स आर्मस्ट्रॉंग ने प्रश्न किया कि मेनचेस्टर कम्यूनिटी सेंटर को एक शरिया लॉ एडमिनिस्ट्रेटर क्यों चाहिए? देश का कानून ब्रिटिश कानून है और केवल ब्रिटिश कोर्ट ही कानूनी संस्था है। शरिया कानून ब्रिटिश कानूनी व्यवस्था पर प्रहार है।
समर्थकों का पक्ष
लोगों ने कहा कि वे लोग शरिया मानने वाले नहीं बल्कि ब्रिटिश लोग हैं। मगर फिर भी कई मुस्लिमों ने इसका समर्थन करते हुए विरोध कर रहे लोगों को ग़लत ठहराया था। एक यूजर ने लिखा कि शरिया लॉ एडमिनिस्ट्रेटेर केवल एक एडमिन कर्मचारी होता है, जो मत आधारित सलाह देता है, और वह भी केवल तलाक या पारिवारिक विवादों में।
हटाया गया विवादास्पद विज्ञापन
परंतु ऐसे तर्क लोगों के गले इसलिए नहीं उतरे क्योंकि आखिर शरिया के आधार पर नौकरी का विज्ञापन सरकारी वेबसाइट पर कैसे आ सकता था? लोगों ने पूछा था कि क्या वे इसीलिए कर देते हैं।
सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चल रही इस आलोचना का परिणाम यह हुआ कि उस विज्ञापन को हटा दिया गया। रूपर्ट लो ने लिखा कि यह जानकर प्रसन्नता हुई कि यह खतरनाक शरिया लॉ विज्ञापन हटा दिया गया है। दबाव काम करता है।
विवाद के बाद भी चिंता बरकरार
हालांकि मेनचेस्टर इस्लामिक काउंसिल ने बार-बार इससे पहले यही कहा था कि इसका शरिया लॉ एडमिनिस्ट्रेटर ब्रिटेन के कानून के अंतर्गत काम करता है तथा कोई ‘समानांतर कानूनी प्रणाली’ संचालित नहीं करता है। डेली मेल के अनुसार उसने कहा था कि यह मुस्लिम समुदाय के सदस्यों को दो अलग-अलग सेवाएं प्रदान करता है – सिविल मध्यस्थता और अनेक धार्मिक मामलों पर धार्मिक मार्गदर्शन – जिनमें से कोई भी समानांतर कानूनी प्रणाली नहीं है।
हालांकि इस विज्ञापन के हटाए जाने के बाद भी लोगों का कहना है कि केवल विज्ञापन ही हटा है, नौकरी तो अभी भी बनी हुई है।

















