हाल ही में चीन की स्वामित्व वाली ई‑कॉमर्स कंपनी AliExpress ने हिंदू धर्म और लाखों भक्तों की आस्था का ऐसा अपमान किया कि पूरे भारत, खासकर ओडिशा में तीखी नाराजगी फैल गई। एक डोरमैट पर भगवान जगन्नाथ की तस्वीर छापी हुई मिली, जो पैरों पोंछने के लिए इस्तेमाल होती है। इसपर एक व्यक्ति को उस मैट पर पैर रखते हुए दिखाया गया था। इससे धार्मिक भावनाएँ गहराई से आहत हुईं।
यह घटना तब सामने आई जब सोशल मीडिया पर लोगों ने AliExpress पर एक डोरमैट देखा, जिस पर भगवान जगन्नाथ का चेहरा छपा हुआ था। इतना ही नहीं, उस उत्पाद के प्रचार में एक व्यक्ति को उस डोरमैट पर पैर रखते हुए भी दिखाया गया था। यह न केवल अनादरपूर्ण है, बल्कि हिंदू आस्था का सीधा अपमान माना जा रहा है। भगवान जगन्नाथ को हिंदू धर्म में बहुत पूजनीय देवता है, खासकर ओडिशा राज्य में। उन्हें ओडिया संस्कृति, आस्था और पहचान का प्रतीक भी माना जाता है। ऐसे में उनकी छवि को एक डोरमैट पर दिखाना, जिस पर लोग पैर रखते हैं, एक गंभीर अपमान है। इस डोरमैट का विवरण देते हुए AliExpress ने उसे “नमी सोखने वाला” और “फिसलन रोकने वाला” बताया था। लेकिन जिस तरह से उसमें भगवान की तस्वीर का उपयोग किया गया, उसने लोगों के गुस्से को और बढ़ा दिया। कई लोगों ने इसे एक जानबूझकर की गई धार्मिक असंवेदनशीलता करार दिया है।
सोशल मीडिया पर विरोध- इस घटना के सामने आते ही सोशल मीडिया पर जबरदस्त विरोध शुरू हो गया। लोग #BoycottAliExpress और #RespectJagannath जैसे हैशटैग के साथ अपना गुस्सा जाहिर कर रहे हैं। हजारों लोगों ने AliExpress से इस डोरमैट को तुरंत हटाने और सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की है। लोगों का कहना है कि भगवान जगन्नाथ सिर्फ एक धार्मिक प्रतीक नहीं हैं, बल्कि ओडिया संस्कृति और गौरव का आधार हैं। उनकी छवि के साथ इस तरह का व्यवहार करना, लाखों लोगों की भावनाओं को ठेस पहुँचाना है।
What is this, @AliExpress_EN ?
You are selling doormats featuring Lord Jagannath, a deeply revered deity worshipped by Hindus across the world.
Take it down immediately. This is a shameful act of disrespect by AliExpress. pic.twitter.com/AtAMV58uDl
— Anshul Saxena (@AskAnshul) July 29, 2025
मंदिर समिति की प्रतिक्रिया- संबद इंग्लिश की रिपोर्ट के अनुसार, श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंधन समिति के पूर्व सदस्य माधव पूजापांडा ने AliExpress की इस हरकत को “शर्मनाक” बताया। उन्होंने कहा कि यह हमारी आस्था और संस्कृति पर सीधा हमला है। उन्होंने मंदिर प्रशासन से आग्रह किया है कि वे इस मुद्दे को ओडिशा सरकार और भारत सरकार के सामने रखें ताकि इस तरह की अपमानजनक वस्तुओं की बिक्री पर तुरंत रोक लगाई जा सके।

















