भाषा नहीं, हिंदुत्व असली पहचान : गजवा-ए-हिंद की मंशा वालों को नितेश राणे की चेतावनी, कहा- 'ईंट का जवाब पत्थर से देंगे'
June 5, 2026
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होम भारत ओडिशा

भाषा नहीं, हिंदुत्व असली पहचान : गजवा-ए-हिंद की मंशा वालों को नितेश राणे की चेतावनी, कहा- ‘ईंट का जवाब पत्थर से देंगे’

भुवनेश्वर में ‘सुशासन संवाद’ में मंत्री नितेश राणे ने हिंदुत्व, मराठी अस्मिता, लव जिहाद और गजवा-ए-हिंद पर बेबाक राय रखी। पढ़ें पूरी रिपोर्ट...

Written byShivam DixitShivam Dixit
Jul 29, 2025, 01:02 am IST
in ओडिशा, महाराष्ट्र
सुशासन संवाद ओडिशा में मंत्री नितेश राणे ने हिंदुत्व और मराठी अस्मिता पर दिया बड़ा बयान

सुशासन संवाद ओडिशा में मंत्री नितेश राणे ने हिंदुत्व और मराठी अस्मिता पर दिया बड़ा बयान

ओडिशा/भुवनेश्वर । भारत के सुशासन मॉडल में तेजी से उभरते ओडिशा की नई भूमिका को लेकर ‘पाञ्चजन्य’ द्वारा आयोजित सुशासन संवाद : ‘ओडिशा की उड़ान’ का आयोजन आज (28 जुलाई, 2025) ताज विवांता, भुवनेश्वर में किया गया। कार्यक्रम के पांचवें सत्र “तेवर, तर्क और तरक्की” में पाञ्चजन्य की एसोसिएट एडिटर तृप्ति श्रीवास्तव ने महाराष्ट्र सरकार के कैबिनेट मंत्री (बंदरगाह विकास मंत्रालय) नितेश नारायण राणे से बातचीत की।

भाषा और पहचान पर सवाल

आप ओडिशा में हैं, तो आप मराठी में बात करेंगे या उड़िया में या फिर हिंदी में..?

नितेश राणे – सबसे पहले, मराठी होने से पहले मैं एक हिंदू हूं और इसलिए मेरे इस हिंदू राष्ट्र में मेरी पहचान ही हुई है। जहाँ भी जाऊँगा, वहाँ हिंदी में बात करने में मुझे कोई तकलीफ नहीं है।

मराठी अस्मिता या राजनीतिक अस्तित्व?

महाराष्ट्र में कुछ लोगों ने मराठी भाषा को मराठी अस्मिता का सवाल बना लिया है। आपके अनुसार यह अस्मिता का सवाल है या कुछ लोगों का राजनीतिक अस्तित्व का..?

नितेश राणे – महाराष्ट्र में आएंगे तो मराठी आनी चाहिए, इसमें कुछ गलत नहीं है। लेकिन उसके आड़ में यदि आप हिंदुओं को बांटने की कोशिश करेंगे या सिर्फ हिंदुओं को ही निशाना बनाएंगे, तो न हमारी महाराष्ट्र सरकार इसे सहन करेगी और न हम जैसे हिंदुत्वनिष्ठ। ईंट का जवाब पत्थर से देना हमें अच्छी तरह आता है।

हम यही कहना चाहते हैं कि यदि आपको मराठी की शक्ति दिखाने की हिम्मत है तो किसी मुस्लिम मोहल्ले में जाकर क्यों नहीं कहते कि वहां मराठी सीखनी चाहिए? क्यों नहीं कहते कि कल की अजान मराठी में होनी चाहिए? सारी मर्दानगी सिर्फ हिंदुओं पर दिखानी है और मुस्लिम मोहल्लों में जाकर बिल्ली की तरह घूमना है — तो यह चलेगा नहीं।

मुझे लगता है यह हिंदुओं को बांटने की एक बड़ी साजिश है और इसका विरोध हम महाराष्ट्र सरकार के साथ-साथ हिंदू होने के नाते भी करते हैं।

ठाकरे परिवार और हिंदुत्व की राजनीति

ठाकरे परिवार की ओर इशारा करते हुए, आप कहेंगे कि जो दो भाई आज साथ खड़े हैं, उनके बड़े तो हिंदुत्व की बात करते थे, फिर हिंदी भाषा को लेकर यह चयनात्मक राजनीति क्यों? जिन मोहल्लों की आप बात कर रहे हैं, वहाँ वे क्यों नहीं जाते?

नितेश राणे – अगर आप हिंदू हृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे जी की बात कर रही हैं तो उनकी बात ही अलग है। ठाकरे ब्रांड हिंदुत्व और हिंदू त्योहारों के कारण ही बड़ा हुआ था। जब उन्होंने हिंदुत्व से दूरी बनाई, तभी सवाल उठने लगे। जिन दो भाइयों की आप बात कर रही हैं, कुछ ही महीने पहले महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव हुआ, एक को जनता ने केवल 20 विधायक दिए और दूसरे को शून्य। इससे साफ पता चलता है कि महाराष्ट्र की जनता के मन में क्या है।

और जिस तरह उन्होंने हिंदुत्व के खिलाफ राजनीति शुरू की है — चाहे महाकुंभ पर सवाल उठाना हो या उनके समर्थकों की विजय रैली में अल्लाह हू अकबर के नारे और पाकिस्तान का झंडा लहराना हो — यह सब हिंदुत्व के खिलाफ ही है।

इसलिए यह भाषा की राजनीति असल में हिंदुओं को बांटने की साजिश है। प्रधानमंत्री जी ने सही कहा था: “एक है तो सेफ है।” जितना हम हिंदू एकजुट रहेंगे, उतनी ही मजबूती से हम इस्लामी जिहादी आक्रमण का मुकाबला कर पाएंगे।

मराठी मानुष की राजनीति पर रुख

ठाकरे ब्रदर्स मराठी मानुष की आवाज उठाने की बात करते हैं। आप खुद महाराष्ट्र की राजनीति में हैं और बचपन से राजनीति देखी है। आपके पिताजी भी शिवसेना और फिर कांग्रेस में रहे। क्या वाकई मराठी मानुष की राजनीति पूरी तरह भाषा पर आधारित हो गई है?

नीतेश राणे – अगर वे (ठाकरे ब्रदर्स) मराठी मानुष की आवाज सुनते हैं, तो हमारा आवाज कहाँ से निकल रहा है? हमें भी मराठी मानुष ने ही वोट दिया है। उन्हीं के वोटों से मैं आमदार से विधायक और फिर मंत्री बना हूँ।

आज हमारी राज्य सरकार भारी बहुमत से सत्ता में है और यह हिंदुओं के मतदान की वजह से संभव हुआ है। मैं गर्व से कहता हूँ कि विधायक और मंत्री बनकर यहाँ बैठा हूँ, तो यह केवल महाराष्ट्र के हिंदुओं की बदौलत है। मैंने किसी और मोहल्ले में जाकर वोट नहीं माँगा।

हमारा विचार स्पष्ट है — और वह यह कि हिंदुत्व की एकता ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।

महाराष्ट्र में बाहर से आने वालों की सुरक्षा पर सवाल

आपका विचार स्पष्ट है, लेकिन आपकी पार्टी महाराष्ट्र में सत्ता में है। मुंबई महानगर है और यहां रोजगार की तलाश में बाहर से लोग हमेशा से आते रहे हैं। आज जो माहौल बनाया जा रहा है, क्या आपको लगता है कि आपकी पार्टी के रहते हुए लोगों को डरना चाहिए कि अगर मराठी नहीं आई तो बाहर निकाल दिए जाएंगे? या यूपी और बिहार वालों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार होगा? क्या वे सुरक्षित रहेंगे?

नितेश राणे – राज्य की सरकार हमारे आदरणीय मुख्यमंत्री देवेंद्र जी के नेतृत्व में है। हमारी सरकार हिंदुत्व की सरकार है। हमारी सरकार के रहते हुए किसी भी हिंदू को महाराष्ट्र में चिंता करने की आवश्यकता नहीं है। सामने वालों से निपटना हमें अच्छी तरह आता है।

सरकार अपना काम करेगी। यदि कोई सरकारी भाषा नहीं समझेगा तो हमें अलग तरीके से बात करना भी आता है। लेकिन हम अपने हिंदू राष्ट्र में, महाराष्ट्र की भूमि पर, किसी भी हिंदू की ओर गंदी नजर से देखने की इजाजत नहीं देंगे और न ही ऐसा होने देंगे। हमें मालूम है कि गजवा-ए-हिंद के अंतर्गत कुछ लोग भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाना चाहते हैं, महाराष्ट्र में जिहाद फैलाना चाहते हैं। यदि उनकी भाषा और नीयत यही रही तो उनसे सख्ती से निपटा जाएगा।

गजवा-ए-हिंद और घुसपैठ का मुद्दा

आपने गजवा-ए-हिंद की बात की। आज सीमावर्ती राज्यों में, चाहे पश्चिम बंगाल हो या उत्तराखंड, बांग्लादेशी और रोहिंग्या अवैध रूप से तेजी से फैल रहे हैं। बिहार में भी SIR चल रहा है और चुनाव आयोग की पुनरीक्षण कार्रवाई पर मामला कोर्ट में है। क्या महाराष्ट्र भी ऐसी समस्या से जूझ रहा है, और अगर हां तो इससे निपटने के लिए आपका नजरिया क्या है.?

नितेश राणे – समस्या हर जगह है। इनका लक्ष्य 2047 तक भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाना है। ये लोग अलग-अलग तरीकों से—कभी लव जिहाद, कभी लैंड जिहाद, तो कभी बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठ—कर रहे हैं। शुरुआत में ये दोस्त बनकर सामने आते हैं, छोटी नौकरियां करने लगते हैं, और फिर धीरे-धीरे मालिक बन बैठते हैं। इनका उद्देश्य हर जगह अपनी हरी चादर फैलाना है।

आजकल ये नाम बदलकर भी काम करने लगते हैं। उदाहरण के तौर पर किसी मंदिर के बाहर फूल की दुकान होगी, दुकान का नाम जय श्रीराम फ्लावर वाला होगा, लेकिन अंदर अब्दुल बैठा होगा। ऐसे लोगों से कहना होगा कि या तो अपना आधार कार्ड दिखाओ या वोटिंग आईडी दिखाओ। अगर नहीं दिखाते तो उनसे खरीदारी नहीं करनी चाहिए। क्योंकि ये पैसा जिहाद के लिए इस्तेमाल होता है। इसलिए तय करना होगा कि खरीदारी सिर्फ हिंदुओं से ही की जाए। आर्थिक बहिष्कार बेहद जरूरी है। अगर हम यह भूमिका बना देंगे तो ये घुसपैठिए वापस बांग्लादेश या पाकिस्तान चले जाएंगे।

कांवड़ यात्रा और सेकुलर राजनीति पर रुख

अभी कांवड़ यात्रा चल रही है। वहां उत्तर प्रदेश सरकार ने दुकानदारों से कहा कि अपना असली नाम लिखो। लेकिन सेकुलर और कथित लिबरल लोग कहते हैं कि यह भेदभावपूर्ण रवैया है। आप क्या कहते हैं?

नितेश राणे – ये जो सेकुलर नाम का टेप रिकॉर्ड है, यह सिर्फ हिंदुओं के खिलाफ बजता है। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के मूल संविधान मसौदे में सेकुलर शब्द था ही नहीं। बाद में कांग्रेस ने इसे जोड़ा। हमारा देश हिंदू राष्ट्र है। यहां 90% लोग हिंदू हैं। अगर हम इसे स्वीकार कर लें तो हमारी अधिकांश समस्याएं खत्म हो जाएंगी।

त्योहारों के समय—नवरात्रि हो या दिवाली—हमें सोच-समझकर खरीदारी करनी चाहिए। अगर हिंदू समाज का पैसा हिंदुओं की जेब में जाएगा तो देश मजबूत होगा। लेकिन अगर जिहाद करने वालों को पैसा देंगे तो वही लोग हमारे पैसों से भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाने की कोशिश करेंगे। यह बात बिल्कुल स्पष्ट और सरल है।

औरंगजेब की मजार और इतिहास में मुगलों का महिमामंडन

महाराष्ट्र में औरंगजेब की मजार को लेकर विवाद हुआ। अब हमारे एनसीईआरटी की पुस्तकों में भी बदलाव हो रहा है, जहां पहले लेफ्ट इतिहासकारों के जरिए मुगलों को महिमामंडित किया गया था। अब यह चीजें बदलने की कोशिश हो रही हैं। आपको क्या लगता है, मुगलों को बढ़ावा देने के लिए मराठा वीरों या देश के अन्य वीर नायकों को जानबूझकर इतिहास से मिटाया गया? और यह कदम कितना महत्वपूर्ण है?

नितेश राणे – सवाल ही क्यों उठाना चाहिए कि हम मुगलों के बारे में क्यों पढ़ें? हम उसे औरंगजेब नहीं, औरंग्या कहते हैं। उसे इज्जत देने की कोई जरूरत नहीं है।

टीपू सुल्तान को हम टिप्या कहते हैं। उन्हें भी इतनी इज्जत देने की जरूरत नहीं है। इनसे हमें क्या फायदा हुआ?

इससे अच्छा तो यह है कि हमारे राजा—छत्रपति शिवाजी महाराज, छत्रपति संभाजी महाराज और अन्य—जिन्होंने हमारा इतिहास बनाया, उनका गौरव बताया जाए। स्वराज्य की स्थापना हिंदुओं के लिए हुई थी। कई लोग कहते हैं कि शिवाजी महाराज की सेना में मुसलमान थे, इसलिए यह हिंदू बनाम मुसलमान की लड़ाई नहीं थी। लेकिन सच्चाई यह है कि शिवाजी महाराज की लड़ाई हिंदुओं के अस्तित्व की रक्षा के लिए थी, क्योंकि मुगल मंदिर तोड़ रहे थे और हिंदुओं का नामोनिशान मिटा रहे थे।

यही सही इतिहास है और यह हमारे बच्चों तक पहुंचना चाहिए।

इतिहास सुधार और हिंदू राष्ट्र की दिशा

क्या आपको नहीं लगता कि इतिहास में जिनको जगह नहीं मिली, उन्हें पाठ्यक्रम में लाया जाना चाहिए, न कि भाषा पर विवाद किया जाए?

नितेश राणे – सभी चीजों को सुधारने के लिए ही देश की जनता ने नरेंद्र मोदी जी को सत्ता सौंपी। हम सबके आशीर्वाद से सत्ता में हैं ताकि हिंदू राष्ट्र को मजबूत किया जा सके। मुझे खुद को हिंदू कहने में कोई शर्म नहीं है। विधायक और मंत्री होने से पहले मैं हिंदू हूं। अगर इस देश में रहकर हिंदुओं की बात नहीं करूंगा, तो क्या पाकिस्तान जाकर करूंगा?

डबल इंजन सरकार और महाराष्ट्र का विकास

कहते हैं कि जब डबल इंजन की सरकार होती है तो विकास तेजी से होता है। लेकिन जब उद्धव ठाकरे सरकार थी और उन्होंने कांग्रेस के साथ गठबंधन किया, तब लगातार विवाद सामने आए। अब सरकार बदलने के बाद आपको क्या बदलाव दिखते हैं?

नितेश राणे – महाराष्ट्र में विकास तेजी से हो रहा है। हमारे आदरणीय मुख्यमंत्री देवेंद्र जी और दोनों डिप्टी सीएम के नेतृत्व में विकास गतिमान तरीके से चल रहा है। देश का सबसे बड़ा वोट बंदरगाह महाराष्ट्र के पालघर जिले में आ रहा है, जिससे हमारा देश इस सेक्टर में विश्व की शीर्ष 5 सूची में शामिल होगा।

इसी तरह सागरी सुरक्षा और फिशरीज को कृषि का दर्जा देने जैसे निर्णयों से मछुआरों को भी किसानों जैसी सुविधाएं मिल रही हैं। हमारे पास शिप रिपेयर की एक मजबूत पॉलिसी भी है। उड़ीसा की कुछ योजनाओं को महाराष्ट्र में लागू करने और महाराष्ट्र की कुछ योजनाओं को उड़ीसा में लागू करने की दिशा में हम प्रयासरत हैं। इस प्रकार परस्पर संवाद और सहयोग से हमारा हिंदू राष्ट्र नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में विश्वगुरु बनेगा।

ब्लू इकोनॉमी में महाराष्ट्र-उड़ीसा सहयोग

उड़ीसा भी विकास की राह पर है और महाराष्ट्र भी, ब्लू इकोनॉमी के क्षेत्र में अगर दोनों राज्य आपस में सहयोग करें तो क्या संभावनाएं हैं?

नितेश राणे – उड़ीसा ने अपने मछुआरों के लिए बहुत अच्छी योजनाएं बनाई हैं। हम देख रहे हैं कि उन्हें महाराष्ट्र में कैसे लागू किया जा सकता है। इसी तरह महाराष्ट्र में जो सुविधाएं हैं, उनसे उड़ीसा भी लाभ उठा सकता है। जैसे मैंने कहा, उड़ीसा एक प्रगतिशील और विकसित राज्य है, और हमारे मुख्यमंत्री जी के नेतृत्व में महाराष्ट्र भी कंधे से कंधा मिलाकर विकास की ओर बढ़ेगा।

भाजपा और कांग्रेस में अंतर

आप पहले कांग्रेस में थे। दोनों पार्टियों की तुलना करें तो लोकतांत्रिक नजरिए से या युवाओं के नेतृत्व के तौर पर क्या अंतर पाते हैं?

नितेश राणे – सबसे बड़ा अंतर यह है कि भारतीय जनता पार्टी कार्यकर्ताओं की पार्टी है और कार्यकर्ताओं के दम पर चलती है। हमारी सरकार में जितने भी प्रोजेक्ट लागू होते हैं, वे कार्यकर्ताओं के सुझाव और जमीनी स्तर पर उनके अनुभवों पर आधारित होते हैं। यह काम केवल भारतीय जनता पार्टी में ही संभव है।

कांग्रेस में स्थिति बिल्कुल उलट है। जब तक राहुल गांधी विदेश से वापस नहीं आते और उनके कान तक बात नहीं पहुंचती, तब तक काम नहीं होता। मेरे पिताजी ने 39 साल तक हिंदुत्व के लिए काम किया। उद्धव ठाकरे की वजह से हमें कुछ समय दूर रहना पड़ा, लेकिन अब भाजपा के साथ हमारी जोरदार घर वापसी हो चुकी है।

युवाओं को अवसर और जिम्मेदारी

भाजपा में युवाओं को अवसर किस तरह मिलते हैं.? क्या उन्हें विचारधारा और विकास दोनों को साथ लेकर चलना पड़ता है.?

नितेश राणे – हमारे देश को बड़ा बनाना है तो युवाओं को जिम्मेदारी लेनी पड़ेगी। सिर्फ सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने से नहीं, बल्कि निर्णय की कुर्सी पर बैठकर काम करना होगा। भाजपा जैसी पार्टी युवाओं को प्लेटफॉर्म देती है। महाराष्ट्र में हमारे प्रदेश अध्यक्ष भी कार्यकर्ता से ही प्रदेश अध्यक्ष बने हैं। उड़ीसा में भी यही वातावरण है।

हमारे प्रधानमंत्री जी देश को आगे बढ़ा रहे हैं और युवाओं का कर्तव्य है कि हिंदू राष्ट्र को और मजबूत करें। मैं हर युवा से कहता हूं कि चाहे कुछ भी करो, अपना भगवा मत छोड़ो। इस्लाम के नाम पर जिहाद को रोकने का काम युवाओं को ही करना होगा। जहां जरूरत हो वहां पेन उठाना है, और जहां जरूरत हो वहां तलवार भी उठानी है, क्योंकि धर्म की रक्षा के लिए हथियार उठाना हमारे धर्म में उचित है। अगर कोई लव जिहादी हमारी बहन-बेटी को गंदी नजर से देखेगा तो हर हिंदू भाई को खड़ा होकर उन्हें सुरक्षित करना ही होगा।

लव जिहाद : मिथ या सच्चाई..?

सेक्युलर और लिबरल लोग कहते हैं कि लव जिहाद तो एक मिथ है, जबकि कई आंकड़े सामने आते हैं। आप क्या कहते हैं..?

नितेश राणे – हाल ही में यूपी में छांगुर मौलवी का मामला सामने आया है। जो लोग कहते हैं कि ऐसा कुछ नहीं होता, वे सच्चाई से मुंह मोड़ रहे हैं। हिंदू बहनों को झूठे प्यार और शादी के नाम पर कन्वर्जन करने की कोशिशें हो रही हैं। अगर शादी के नाम पर धोखा देकर उनका कन्वर्जन किया जाए और उन्हें प्रताड़ित किया जाए, तो यह लव जिहाद है और उसके खिलाफ खड़ा होना हर किसी का कर्तव्य है।

गुजरात और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में अच्छे कन्वर्जन विरोधी कानून लागू हो चुके हैं। जल्द ही महाराष्ट्र में भी ऐसा कानून आने वाला है। इसके खिलाफ खड़ा होना हमारी जिम्मेदारी है।

लव जिहाद कानून की परिभाषा

लव जिहाद के कानून को कैसे परिभाषित करेंगे?

नितेश राणे – किसी से शादी करने पर किसी को आपत्ति नहीं है, लेकिन नाम और पहचान छिपाना गलत है। कई बार शादी से पहले लड़का अपना नाम आशीष बताता है और बाद में पता चलता है कि वह अब्दुल है। यह धोखा है। अगर शादी करनी है तो ईमानदारी से करनी चाहिए। कन्वर्जन की कोई जरूरत नहीं है।

लव जिहाद देश को इस्लामिक राष्ट्र बनाने की साजिश का हिस्सा है। इसलिए सतर्क रहना जरूरी है। हमारी हिंदू बहनों को भी सावधान रहना होगा। नवरात्र या डांडिया में जब साथ बैठें तो यह देख लें कि सामने वाला सच में हिंदू है या नहीं। आधार कार्ड और वोटिंग कार्ड चेक करना चाहिए। ऐसे लोगों को परमिशन नहीं दी जानी चाहिए, क्योंकि यह सब साजिश का हिस्सा है।

लव जिहाद : देश की सबसे बड़ी समस्या

कहा जाता है कि सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ रहा है, लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से यह कितना महत्वपूर्ण हो जाता है..? क्या आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं..?

नितेश राणे – हमारे हिंदुत्वनिष्ठ कार्यकर्ता जब हमारी बहनों से मिलते हैं, जो लव जिहाद की शिकार हुई हैं, और उनकी दर्दनाक कहानियां सुनते हैं, तो पता चलता है कि उनकी पूरी जिंदगी बर्बाद हो जाती है। इसी वजह से हम बाकी सब चीजें छोड़कर लव जिहाद को देश की सबसे बड़ी समस्या मानते हैं और इसके खिलाफ हमें भूमिका लेनी ही पड़ेगी।

भाषा विवाद और समरसता का सवाल

भाषा समरसता बनाए रखने के लिए क्या किया जाना चाहिए? 

नितेश राणे – यह विवाद कुछ लोग चुनावी मुद्दा बनाने के लिए खड़ा करते हैं, क्योंकि महाराष्ट्र में बीएमसी चुनाव आ रहे हैं। आपने जिन दो भाइयों का जिक्र किया, उन्हें अपने अस्तित्व के लिए ऐसे मुद्दों की जरूरत है। लेकिन हमारा पूरा महाराष्ट्र और मुंबई हमेशा साथ रहा है। मराठी और अन्य भाषाओं के लोग अच्छे संवाद और संबंध रखते हैं।

जब यह विवाद हुआ तो कई मराठी लोगों ने भी कहा कि हिंदुओं को इस तरीके से नहीं बांटना चाहिए। यह केवल एक परसेप्शन है कि बहुत तकलीफ है, जबकि जमीनी हकीकत अलग है।

आज सांसद में ऑपरेशन सिंदूर की बात हुई. जब पहलगाम में जब आतंकियों ने हमला किया तो उन्होंने न भाषा देखी, न जात, सिर्फ हिंदू पूछकर गोली मारी। इसलिए हमें इन विवादों में फंसने की बजाय हिंदू बनकर एकजुट रहना होगा।

बीएमसी चुनाव और हिंदू एकता

मुंबई में बीएमसी चुनाव होने वाले हैं। क्या विवादों का असर वहां पड़ेगा? 

नितेश राणे – 1993 में जब मुंबई में बम ब्लास्ट हुए, उसके बाद की स्थिति सबको मालूम है। लेकिन बालासाहेब ठाकरे जी ने जो भूमिका निभाई, उससे हिंदुओं में आत्मविश्वास आया। हर कोई कहता है कि मुंबई का हिंदू जिंदा है तो सिर्फ बालासाहेब ठाकरे की वजह से। अब मुंबई में हिंदुओं का प्रभाव बढ़ा है।

देखना चाहिए कि लंदन और न्यूयॉर्क में क्या हो रहा है। वहां गलत चुनाव के कारण आज तीसरी महिला हिजाब में घूम रही है। अगर मुंबई में भी कोई अब्दुल या शेख मेयर बन गया, तो हमारी आर्थिक राजधानी की पूरी गणना बिगड़ जाएगी।

नई पीढ़ी और सुरक्षा का विश्वास

90 के दशक में मुंबई ने बम ब्लास्ट और 26/11 जैसे आतंकी हमले देखे। लेकिन पिछले 10–12 सालों में हालात बदले हैं।

नितेश राणे – इसका पूरा श्रेय हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी और गृह मंत्री अमित शाह जी को जाता है। पहले बम ब्लास्ट या 26/11 जैसा हमला सामान्य बात हो गई थी। लेकिन आज मोदी जी की सरकार में कोई हिम्मत नहीं करता कि 20 तरह की प्लानिंग करे।
आज जिहाद करने के तरीके बदल गए हैं। कोई हलाल जिहाद करता है, कोई लैंड जिहाद, तो कोई वीडियो गेम्स के माध्यम से युवाओं को टारगेट करता है। हमें इन नए-नए पैंतरों पर पैनी नजर रखनी होगी और गहराई से अध्ययन करना होगा। तभी हम इन्हें रोक पाएंगे।

स्वाभिमान संगठन की स्थापना

जब आप कम उम्र के थे, तो आपने स्वाभिमान संगठन बनाया था। स्वाभिमान संगठन का उद्देश्य क्या था..?

नितेश राणे – मुझे लगता है कि हमारी सबसे बड़ी उपलब्धि यह रही कि हमने एक दिन में सबसे ज्यादा नौकरियां देने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था। उस दिन 25,300 नियुक्तियां की गईं और अपॉइंटमेंट लेटर भी उसी दिन वितरित किए गए। ऐसे अनेक कार्य हमने समाज के लिए किए, जिनसे सकारात्मक परिवर्तन आए।

अभी आगे अपडेट जारी है…

 

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Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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