26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। 24 साल पहले इसी दिन भारत ने पाकिस्तान को हराकर कारगिल युद्ध में बड़ी जीत हासिल की थी। इस युद्ध में भारतीय सैनिकों ने बहादुरी से पाकिस्तान की सेना को पीछे हटाया था। कारगिल युद्ध की बात करते समय पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ का जिक्र जरूर होता है।
परवेज मुशर्रफ का जन्म 11 अगस्त 1943 को दिल्ली के दरियागंज में हुआ था। 1947 में भारत के बंटवारे से पहले उनका परिवार पाकिस्तान चला गया। उनके पिता वहां सरकार में काम करते थे। साल 1998 में मुशर्रफ ने जनरल का पद प्राप्त किया और इसके बाद उन्होंने भारत के खिलाफ कारगिल युद्ध की साजिश रची। हालांकि, भारत के सैनिकों ने उनकी हर योजना को विफल कर दिया। अपनी किताब ‘इन द लाइन ऑफ फायर’ में मुशर्रफ ने लिखा कि उन्होंने कारगिल पर कब्जा करने की ठानी थी, लेकिन पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की वजह से वह सफल नहीं हो पाए।
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1999 में परवेज मुशर्रफ ने नवाज शरीफ की सरकार हटा दी और खुद सत्ता में आ गए। इसके बाद नवाज शरीफ को देश छोड़ना पड़ा। मुशर्रफ 2008 तक पाकिस्तान के शासक रहे। 2019 में उन पर संविधान को निलंबित करने का आरोप लगा और उन्हें मौत की सजा भी सुनाई गई, जिसे बाद में निलंबित कर दिया गया। परवेज मुशर्रफ को अमाइलॉइडोसिस नाम की गंभीर बीमारी थी। इस बीमारी में शरीर में एक खास प्रोटीन जमा होने लगता है, जो दिल, किडनी, लीवर और दिमाग जैसे अंगों को नुकसान पहुंचाता है। यह बीमारी धीरे-धीरे पूरे शरीर को कमजोर कर देती है। इसका इलाज कैंसर जैसी कीमोथेरेपी से किया जाता है। 2016 में इलाज के लिए परवेज मुशर्रफ पाकिस्तान से दुबई चले गए थे। लंबी बीमारी के बाद 5 फरवरी 2023 को दुबई में 79 साल की उम्र में उनका निधन हो गया। वे इतने बीमार थे कि खुद चल भी नहीं पाते थे। भारत से दुश्मनी रखने वाले मुशर्रफ का अंत बहुत मुश्किल हालात में हुआ।

















