Kargil Vijay Diwas: कारगिल विजय दिवस को 26 साल हो गये हैं। सेना के शौर्य और बलिदान की कहानी पीढ़ियों तक याद रखी जाएगी। इसी युद्ध में पाकिस्तान के उस वक्त के सेना प्रमुख परवेज मुशर्रफ के चेहरे से नकाब हटा था और भारतीय सेना ने पाकिस्तान के घुसपैठियों को, और वहां की सेना के मंसूबों को नाकाम कर दिया था। भारतीय खुफिया एजेंसी ‘रिसर्च एंड एनॉलिसिस विंग’ (रॉ) ने परवेज मुशर्रफ और ले. जन. मोहम्मद अजीज खान के मध्य हुई बातचीत को इंटरसेप्ट कर ली थी।
बातचीत का वह टेप पाकिस्तान के तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को भी सुनवाया गया था। ‘रॉ’ के इस कारनामे से पाक ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया हैरान रह गई थी। पाकिस्तानी के उस वक्त के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की साजिश भी बे-नकाब हो गई थी। परवेज मुशर्रफ को लगता था कि उन्होंने जो साजिश रची है, उसका भारत का पता नहीं चल पायेगा। मुशर्रफ ने रेडियो पर ‘बाल्टी और पश्तो’ भाषा में कई ‘संदेश’ जारी कराए थे। उस वक्त ‘एलओसी’ पर पाकिस्तान के जितने भी जेहादी सक्रिय थे, वे आपसी बोलचाल के लिए इन्हीं दो भाषाओं का इस्तेमाल कर रहे थे। परवेज मुशर्रफ चाहता था कि भारतीय सेना गुमराह हो जाये।
भारतीय सेना को यह विश्वास दिलाने की चाल थी कि एलओसी पर जो कुछ चल रहा है, उसमें पाक सेना शामिल नहीं है। रॉ ने पाकिस्तान में कई फोन कॉल इंटरसेप्ट कर लिये थे। इससे पाकिस्तान और परवेज मुशर्रफ की पूरी पोल खुल गई थी। इसके बाद भारतीय वायु सेना ने जो साहस दिखाया उसके आगे पाकिस्तान पस्त हो गया। वायुसेना की जबरदस्त बमबारी से पाकिस्तान की सेना भाग खड़ी हुई।













