नैनीताल: बाहरी राज्यों से आए लोगों के सत्यापन अभियान में निकल रहे निष्कर्षों के बाद उत्तराखंड गृह विभाग ने पुलिस प्रशासन को सत्यापन डेटा सिस्टम को पुख्ता करने की तैयारी शुरू कर दी है। इस मामले में मुख्यमत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी निर्देश जारी किए है। उत्तराखंड डेमोग्राफी चेंज की समस्या से जूझ रहा है, बाहरी राज्यों और पड़ोसी देशों के घुसपैठियों की आमद और उनके एड्रेस वेरिफिकेशन को लेकर पिछले माहों में चलाए गए अभियान की समीक्षा किए जाने के बाद पुलिस प्रशासन ने इसे और सख्त किए जाने और इसमें तकनीक का उपयोग करने के लिए निर्णय लिया है।
जानकारी के मुताबिक, पुलिस प्रशासन को सत्यापन डेटा रखने के लिए गृह विभाग ने निर्देशित किया है। पुलिस प्रशासन ने पिछले सत्यापन अभियान में 18 बिंदुओं पर जानकारी बाहरी क्षेत्रों से आए लोगों से मांगी थी। अब इस डेटा को एक एप्प के जरिए दर्ज करते हुए इसका रिकॉर्ड रखने की कवायद पुलिस प्रशासन कर रहा है। पुलिस का आईटी विभाग राज्य सरकार के आई टी विभाग के साथ मिलकर इस एप्प को विकसित करने जा रहा है ताकि स्टेट लेवल पर सत्यापन की जानकारियां एक स्थान पर दर्ज हो सके। इससे उन लोगों पर भी नजर रखने में मदद मिलेगी जो बाहरी राज्यों में अपराध कर उत्तराखंड में छिपने का प्रयास करते रहे हैं।
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सत्यापन अभियान के अच्छे परिणाम
कुमाऊं मंडल की पुलिस महानिरीक्षक रिद्धिम अग्रवाल ने बताया कि पिछले माहों में सत्यापन के सख्त अभियान के अच्छे परिणाम सामने आए हैं। इस अभियान से मिले डेटा की हमने समीक्षा की है और आगे हम तकनीक के सहारा लेकर इसे और आसान बनाना चाहते हैं। जिसे उत्तराखंड राज्य के अलावा अन्य राज्यों की पुलिस के साथ हम सूचनाएं साझा कर सकें। उन्होंने बताया कि भविष्य में सत्यापन का डेटा पुलिस के लिए बेहद उपयोगी साबित होगा।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का बयान
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि बाहरी लोगों के सत्यापन की ड्राइव बार बार चलाई गई है, किंतु इसका कोई डेटा नहीं बना है। हमने डीजीपी को कहा है कि बाहरी व्यक्तियों के सत्यापन का रिकार्ड रखा जाए और इसमें और भी सख्ती की जाए। ताकि बाहरी लोग अपराध करने के बाद उत्तराखंड को अपनी शरण स्थली न बनाने पाए।
















