भारतीय रेलवे ने “ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते” के तहत 2024 से जून 2025 के बीच 16,000 से ज्यादा नाबालिग बच्चों को ट्रेनों और रेलवे स्टेशनों से बचाया है। इनमें से अधिकांश बच्चे मामूली पारिवारिक झगड़ों या पढ़ाई को लेकर डांट-फटकार के कारण घर से भाग गए थे। रेलवे द्वारा बचाए गए बच्चों में लगभग 3,000 से अधिक लड़कियाँ शामिल थीं।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, साल 2024 में रेलवे सुरक्षा बल (RPF) ने 10,914 बच्चों को सुरक्षित जगह पहुँचाया। इनमें 7,570 लड़के और 3,344 लड़कियाँ थीं। वहीं, साल 2025 में जून महीने तक RPF ने 6,088 बच्चों को बचाया, जिनमें 4,177 लड़के और 1,911 लड़कियाँ शामिल थीं।
अपहरण से बचाए गए बच्चे
रेलवे की रिपोर्ट के मुताबिक, 2024 में अपहरण किए गए 134 बच्चों को भी रेलवे पुलिस ने ढूंढकर बचाया, जिनमें 65 लड़के और 69 लड़कियां थीं। वहीं 2025 में जून तक 20 अपहृत बच्चों को बचाया गया है, जिनमें 7 लड़के और 13 लड़कियां शामिल हैं। अधिकारियों ने बताया कि ये बच्चे कई बार घर में पढ़ाई को लेकर डांट खाने, खराब अंक लाने या माता-पिता से मामूली झगड़े के कारण घर छोड़ देते हैं। पूछताछ में पता चला कि कुछ बच्चों को अच्छी नौकरी का लालच देकर बड़े शहरों में बुलाया गया था। रेलवे ने ऐसे कई बच्चों को सुरक्षित किया, जो सफर के दौरान स्टेशन या ट्रेन में पीछे छूट गए थे। साल 2024 में रेलवे ने 844 नाबालिग लड़कों और 436 नाबालिग लड़कियों को ऐसी स्थिति में पाया और उन्हें उनके परिवार या प्रशासन को सौंप दिया। वहीं, 2025 में जून तक ऐसे 405 लड़के और 222 लड़कियां बरामद की गईं। रेलवे ने ऐसे बच्चों को भी बचाया जो लापता हो गए थे और देखभाल तथा संरक्षण की जरूरत में थे। रेलवे की टीमों ने ऑपरेशन ‘नन्हे फरिश्ते’ के तहत 1,399 लड़कों और 659 लड़कियों को ढूंढकर सुरक्षित जगह पहुँचाया। रेलवे के एक बड़े अधिकारी ने बताया कि इस अभियान में हर बड़े स्टेशन पर खास टीमें बनाई गई हैं। ये टीमें ऐसे बच्चों पर ध्यान देती हैं जो अकेले, डरे हुए या इधर-उधर घूमते नजर आते हैं। बच्चों से बातचीत कर उन्हें सुरक्षित रखने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। रेलवे प्रशासन ने सभी यात्रियों से अपील की है कि अगर उन्हें कोई बच्चा अकेला या असहाय नजर आए, तो तुरंत रेलवे पुलिस को सूचित करें, ताकि समय पर सहायता पहुंचाई जा सके।

















