अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने BRICS समूह के 11 देशों को कड़ी चेतावनी दी है। रविवार को उन्होंने ऐलान किया कि जो देश BRICS की “अमेरिका-विरोधी नीतियों” का साथ देंगे, उनके आयात पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया जाएगा। दूसरी ओर, रियो डी जनेरियो में चल रहे BRICS शिखर सम्मेलन में नेताओं ने ट्रम्प के इस फैसले की कड़ी निंदा की और इसे वैश्विक व्यापार के लिए हानिकारक बताया। साथ ही, उन्होंने हाल के इजरायल-अमेरिका के ईरान पर हमलों पर भी सवाल उठाए।
ट्रम्प का सख्त रवैया
ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा, “BRICS की अमेरिका-विरोधी नीतियों में शामिल होने वाले देशों को 10% अतिरिक्त टैरिफ का सामना करना पड़ेगा, कोई अपवाद नहीं।” हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि “अमेरिका-विरोधी नीतियाँ” से उनका क्या मतलब है। यह बयान BRICS देशों द्वारा वैश्विक व्यापार और अमेरिकी नीतियों पर उठाए गए सवालों के जवाब में आया।
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BRICS का जवाब
रियो में आयोजित 17वें BRICS शिखर सम्मेलन में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका और अन्य छह उभरते देशों के नेताओं ने ट्रम्प के टैरिफ को “अनुचित” और विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के खिलाफ बताया। उनके संयुक्त बयान में कहा गया, “ये टैरिफ वैश्विक व्यापार को कमजोर करते हैं, आपूर्ति श्रृंखलाओं में रुकावट पैदा करते हैं और आर्थिक अनिश्चितता को बढ़ावा देते हैं।”
शिखर सम्मेलन के मुख्य बिंदु
नेताओं की अनुपस्थिति: इस सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन शामिल नहीं हुए। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूक्रेन युद्ध के कारण जारी अंतरराष्ट्रीय गिरफ्तारी वारंट के चलते वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हिस्सा लिया।
मध्य पूर्व पर चर्चा: BRICS नेताओं ने गाजा में मानवीय संकट और इजरायल-अमेरिका द्वारा ईरान पर हाल के हमलों पर चिंता जताई। उन्होंने दो-राज्य समाधान और सभी बंधकों की रिहाई की मांग की।
AI और स्वास्थ्य पर जोर: नेताओं ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर बात की, जिसमें AI को केवल अमीर देशों तक सीमित न रखने की अपील की गई।
वैश्विक व्यापार पर असर
BRICS देश, जो वैश्विक आबादी का लगभग आधा हिस्सा और 40% आर्थिक उत्पादन का प्रतिनिधित्व करते हैं, ट्रम्प के टैरिफ को वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम मानते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये टैरिफ वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को और अस्थिर कर सकते हैं। भारत, जो BRICS का एक अहम सदस्य है, ने इस मुद्दे पर सावधानी भरा रुख अपनाया है, क्योंकि वह अमेरिका के साथ अपने आर्थिक रिश्तों को बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।
भारत का रुख
भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में डी-डॉलराइजेशन की अवधारणा को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा, “हम BRICS मुद्रा के पक्ष में नहीं हैं।” भारत का प्रयास वैश्विक दक्षिण के साथ सहयोग और अमेरिका के साथ आर्थिक संबंधों के बीच संतुलन बनाए रखना है।
ब्रिक्स में कितने देश हैं?
ब्रिक्स गठबंधन की जब शुरुआत हुई थी, तब केवल पांच ही देश ब्राजील , रूस , भारत , चीन , दक्षिण अफ्रीका थे। लेकिन अब ये कुनबा बढ़कर 11 देशों का हो गया है। इसमें शामिल नए मेंबर हैं मिस्र , इथियोपिया , इंडोनेशिया , ईरान, संयुक्त अरब अमीरात। ये 1 जनवरी 2024 से प्रभावी रूप से ब्रिक्स में शामिल हो गए थे। इसके अलावा इसमें सबसे नया मेंबर जो जुड़ा है, वो है इंडोनेशिया, जो कि आधिकारिक तौर पर 6 जनवरी 2025 को इस समूह में शामिल हुआ था।

















