6 जुलाई, 2025 को तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में अपना 90वां जन्मदिन मनाया। इस अवसर पर दुनिया भर के नेताओं ने उन्हें बधाई दी, लेकिन उनकी उत्तराधिकारी प्रक्रिया को लेकर चीन के साथ तनाव एक बार फिर चर्चा में आ गया। दलाई लामा ने अपने संदेश में शांति और करुणा का आह्वान किया, जो उनके जीवन का मूल मंत्र रहा है।
धर्मशाला में उत्सव का रंग
धर्मशाला का त्सुगलाखांग मंदिर इस खास दिन पर उत्साह और भक्ति से गूंज उठा। भारी बारिश और कोहरे के बावजूद, हजारों तिब्बती शरणार्थी, भिक्षु, इसमें शामिल हुए। पारंपरिक तिब्बती नृत्य, संगीत और प्रार्थनाओं ने माहौल को और जीवंत बना दिया। दलाई लामा ने अपने संबोधन में कहा, “मैंने अपना जीवन मानवता की सेवा में बिताया है और मुझे इसकी संतुष्टि है।” उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा कि वे अगले 30-40 साल और जीना चाहेंगे, जिस पर श्रोता मुस्कुरा उठे।
विश्व नेताओं का सम्मान
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने X पर दलाई लामा को शुभकामनाएं देते हुए उन्हें प्रेम और नैतिकता का प्रतीक बताया। उन्होंने लिखा, “1.4 अरब भारतीयों की ओर से मैं दलाई लामा को उनके 90वें जन्मदिन पर बधाई देता हूँ।” अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपतियों बराक ओबामा, जॉर्ज डब्ल्यू. बुश और बिल क्लिंटन ने वीडियो संदेश भेजे, जिसमें उन्होंने दलाई लामा के वैश्विक योगदान की सराहना की। ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते ने भी उनकी स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता को सलाम किया।
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उत्तराधिकारी विवाद और भू-राजनीति
दलाई लामा ने हाल ही में स्पष्ट किया कि उनकी मृत्यु के बाद उत्तराधिकारी की प्रक्रिया गदेन फोदरंग ट्रस्ट के माध्यम से होगी, और इसमें किसी बाहरी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यह बयान चीन के लिए सीधी चुनौती है, जो तिब्बती बौद्ध धर्म के अगले नेता को चुनने का अधिकार अपने पास होने का दावा करता है। भारत के केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने दलाई लामा के इस फैसले का समर्थन किया, जिसके बाद चीन ने भारत को तिब्बत से जुड़े मामलों में सावधानी बरतने की चेतावनी दी। चीन ने दलाई लामा को “अलगाववाद में शामिल होने का आरोप लगाया और कहा कि उत्तराधिकारी प्रक्रिया में बीजिंग की सहमति जरूरी है।
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दूसरी ओर, अमेरिका ने तिब्बतियों के धार्मिक और सांस्कृतिक अधिकारों का समर्थन करते हुए चीन से इस मामले में दखल न देने की अपील की। यह मुद्दा भारत-चीन के बीच पहले से तनावपूर्ण रिश्तों को और जटिल कर सकता है।
दलाई लामा का संदेश
अपने जन्मदिन पर दलाई लामा ने खुद को “एक साधारण भिक्षु” बताया और शांति, करुणा और मानवीय मूल्यों को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने तिब्बती संस्कृति और प्राचीन भारतीय ज्ञान को विश्व के लिए अनमोल बताया, जो आज की अशांत दुनिया में शांति का रास्ता दिखा सकता है।

















