वाराणसी। गुरु–शिष्य परंपरा को लेकर काशी की एक अलग पहचान है। यह परंपरा में जाति, धर्म और मजहब से ऊपर उठकर है। संगीतकारों, कलाकारों, साहित्यकारों की नगरी में गुरु – शिष्य परंपरा में जाति और धर्म कभी दीवार नहीं बनी। पहली बार जगद्गुरु रामानंदाचार्य की पीठ पर 151 मुस्लिम महिला – पुरुष दीक्षा लेंगे। गुरु पूर्णिमा पर भव्य आयोजन की तैयारी पातालपुरी मठ में की जा रही है। जगद्गुरु बालकाचार्य रामपंथ में दीक्षा देंगे।
भगवान राम को अपना पूर्वज मानने वाले मुस्लिम समाज के 151 पुरुषों और महिलाओं को गुरु दीक्षा विधि विधान से दी जाएगी पातालपुरी मठ के पीठाधीश्वर जगद्गुरु बालकाचार्य ने बताया कि पहली बार ऐसा आयोजन काशी में होने जा रहा है। सनातन परंपरा को पूरी दुनिया में पहुंचाने के लिए ये आयोजन एक मिशाल बनेगा।
पातालपुरी मठ के ट्रस्टी व रामपंथ के पंथाचार्य डॉ राजीव श्रीगुरूजी ने बताया कि बहुत से मुस्लिम, भगवान राम को ये लोग अपना पूर्वज मानते हैं। मुस्लिम महिलाओं द्वारा होली, दिवाली, भगवान राम की आरती जैसे आयोजन पूरे विश्व में अलग संदेश देते आ रहे हैं। सांस्कृतिक पुनर्जागरण के तहत भगवान राम को अपना पूर्वज मानने वाले 151 मुस्लिमों को पहली बार गुरु दीक्षा देकर दीक्षित किया जाएगा।











