बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव में एक बहुत बड़ा परिवर्तन मुहाने पर खड़ा दिख रहा है। यह परिवर्तन महागठबंधन में नया भूचाल लेकर लाता दिख रहा है। बिहार में महागठबंधन में लालू यादव का राष्ट्रीय जनता दल सबसे बड़ा दल है और यही राज्य में गठबंधन की दिशा दशा को तय करती है। कांग्रेस पार्टी बिहार में राजद की एक छोटी घटक के तौर पर काम करती है। कांग्रेस पार्टी और राजद का यह गठबंधन संयुक्त बिहार के आखिरी विधानसभा चुनाव 2000 के बाद सरकार बनाने के लिए हुआ था। उसके बाद दोनों दल एक बार लोकसभा चुनाव 2009 और एक बार विधानसभा चुनाव 2010 में अलग-अलग लड़ने के बाद फिर एक दूसरे से कदम से कदम मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं।
RJD के लिए पनौती साबित हुई कांग्रेस
मगर यह भी एक संयोग है कि जब से राजद कांग्रेस पार्टी के साथ चुनाव लड़ना शुरू किया है तब से राजद कभी भी चुनाव नहीं जीत सकी है। सिर्फ 2015 के विधानसभा चुनाव में जब इस गठबंधन में नितीश कुमार की जेडीयू चुनाव लड़ रही थी तब राजद-कांग्रेस-जेडीयू ने चुनाव जीता था। यह जीत मुख्यतः जेडीयू के कारण मिली थी।
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लालू यादव का कांग्रेस मोह भंग हो रहा
अब लालू यादव और राजद का कांग्रेस पार्टी से मोहभंग होता जा रहा है। लालू यादव के सामने कांग्रेस पार्टी का 2010 का विधानसभा का चुनाव परिणाम घूम रहा है जब कांग्रेस पार्टी ने सभी 243 सीटों पर अपने बूते चुनाव लड़ने के बाद भी महज 27 सीटों पर ही अपना जमानत बचा सकी थी। वर्तमान में लालू यादव कांग्रेस पार्टी एक साथ संबंधों पर पूरी तरह चुप हैं। क्या लालू यादव की चुप्पी कांग्रेस पार्टी से किनारा करने की आहट है ?
कांग्रेस की AIMIM पर लालू की निगाहें
लालू यादव की नज़र अब ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन पर आकर टिक गई है। लालू यादव पिछले 2020 के विधानसभा चुनाव में ओवैसी की पार्टी के प्रदर्शन से काफी प्रभावित हैं। 2020 के विधानसभा चुनाव में ओवैसी की पार्टी ने 20 सीटों पर चुनाव लड़कर 5 सीट जीती थी। ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन का यह प्रदर्शन कांग्रेस पार्टी के 2010 के प्रदर्शन से अच्छा है, क्योंकि कांग्रेस पार्टी ने उस चुनाव में कुल 243 सीटों पर चुनाव भी लड़कर महज 4 सीट ही जीत सकी थी। लालू यादव के सामने उत्तर प्रदेश का 2022 का चुनाव भी है जब ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने 95 सीटों पर चुनाव लड़कर 58 सीटों पर कांग्रेस पार्टी से आगे रही थी।
अब आगामी विधानसभा चुनाव में लालू यादव ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन से गठबंधन करने का मन बना रहे हैं। लालू यादव को मालूम है कि कांग्रेस पार्टी अब अपना जनाधार पूर्णतः खो चुकी है। कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार खुद से केवल निर्दलीय उम्मीदवारों के बराबर ही वोट प्राप्त करने की स्थिति में है। ओवैसी ने हाल के दिनों में अनेक मंचों पर यह घोषणा किया हैं कि उनका लालू यादव के साथ गठबंधन के लिए बातचीत चल रही है। लालू यादव की चिंता बिहार के मुस्लिम बाहुल्य सीमांचल इलाके के लिए है। तस्लीमुद्दीन के निधन के बाद इस इलाके में राजद के पास नेता का अभाव है।
जबकि कांग्रेस पार्टी का सीमांचल इलाके में थोड़ा प्रभाव बचा हुआ है। अभी कांग्रेस पार्टी के पास बिहार में तीन लोकसभा के सांसद हैं, जिसमें दो सांसद सीमांचल के कटिहार और किशनगंज सीटों से है। विगत चुनाव में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन ने पांचों सीट इसी इलाके से जीती थी। राजद को सीमांचल इलाके में कांग्रेस पार्टी का विकल्प ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के रूप में दिख रहा है। लालू यादव स्पष्ट रूप से ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन का विरोध करने से बचते रहे हैं।
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यह भी एक तथ्य है कि कांग्रेस पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के साथ चुनावी गठबंधन से बचेगी। कांग्रेस पार्टी लालू यादव के ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के प्रति चुप्पी से थोड़ा परेशान दिख रही है। कांग्रेस पार्टी ने बिहार चुनाव के लिए कन्हैया कुमार को बिहार के चुनावी मैदान में उतार कर लालू यादव को नाराज़ कर चुकी है। राजनीतिक हलकों में यह भी कयास है कि लालू यादव के विरोध के कारण ही कांग्रेस पार्टी ने कन्हैया कुमार को बिहार के चुनाव में पीछे किया है। लालू यादव कन्हैया कुमार को तेजस्वी यादव का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी मानते है। अतएव बिहार चुनाव में लालू यादव कांग्रेस को किनारा करके ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के साथ हाथ मिला सकते है। दूसरा लालू यादव को यह भी आशंका है कि ओवैसी के साथ अगर नहीं होता है तो ओवैसी केवल सीमांचल में ही नहीं, बल्कि राज्य की अन्य हिस्सों से भी चुनाव लड़ सकते हैं। अतएव बिहार के चुनाव में कई चौंकाने वाली खबर आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता है। कांग्रेस पार्टी को बिहार चुनाव में फिर से 2010 की तरह अपने बूते ही चुनाव लड़ना पड़ सकता है।

















