भारत के पूर्व मुख्य न्यायधीश जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ पर ये आरोप लग रहे हैं कि वो लुटियंस दिल्ली में स्थित आधिकारिक बंगले को खाली नहीं कर रहे हैं, जिसे सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस के लिए अलॉट किया जाता है। लेकिन कहा जा रहा है कि रिटायर होने के 8 माह बाद भी जस्टिस चंद्रचूड़ के बंगला खाली नहीं करने के कारण पूर्व सीजेआई संजीव खन्ना बिना बंगले के ही रिटायर हो गए। ऐसे में अब सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने उन्हें बंगला खाली करने को कहा है। सवप
सीजेआई गवई को भी नहीं मिल रहा बंगला
यही हाल अब निवर्तमान बीआर गवई के साथ भी हो रहा है। वो बिना आधिकारिक बंगले के रह रहे हैं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने केंद्र सरकार को एक पत्र लिखकर उनसे पूर्व सीजेआई से यह बंगला खाली कराने की मांग की है। इस पत्र को केंद्रीय आवास और शहरी विकास मंत्रालय को भेजा गया था, जिसमें बताया गया है कि जस्टिस चंद्रचूड़ नवंबर 2024 में ही रिटायर हो गए थे। वह लुटियंस दिल्ली स्थित कृष्ण मेनन मार्ग का सरकारी बंगले में रह रहे थे।
उन्हें 31 मई 2025 तक इसमें रहने की अनुमति दी गई थी, लेकिन उसकी समय सीमा खत्म हो गई है। अब वह तय समय सीमा से अधिक वक्त तक वहां रुके हुए है। सुप्रीम कोर्ट जजेस (संशोधन) नियम 2022 के तहत नियम 3 बी के तहत भी उनकी समयसीमा समाप्त हो चुकी है। ऐसे में उनसे तुरंत ये बंगला वापस लिया जाना चाहिए।
क्या कहते हैं नियम
नियम 3B की मानें तो पूर्व सीजेआई चंद्रचूड़ को कायदे से टाइप VII श्रेणी के बंगले में रहना चाहिए, लेकिन फिर भी वे टाइप VIII बंगले पर कब्जा जमाए हुए हैं। जबकि, यह बंगला अब कायदे से मौजूदा सीजेआई के पास होना चाहिए।
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क्या कहते हैं जस्टिस चंद्रचूड़
वहीं इस मामले के सामने आने के बाद पूर्व सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ ने बंगला न खाली करने की वजह अपनी बेटियों के स्वास्थ्य को बताया है। उनका कहना है कि उनकी दोनों बेटियों को जेनेटिक डिसॉर्डर (नेमालीन मायोपैथी ) की समस्या है और इस कारण से उनका एम्स में इलाज चल रहा है। इसकी जानकारी हमने पहले ही सुप्रीम कोर्ट प्रशासन को दे दी थी। वह कहते हैं कि उन्हें उनका वैकल्पिक आवास मिल चुका है, जो कि फिलहाल रहने के योग्य नहीं है। उसके रेनोवेशन का कार्य किया जा रहा है।
ऐसे में जैसे ही ये कार्य पूरा हो जाता है तो हम वहां शिफ्ट हो जाएंगे। जस्टिस चंद्रचूड़ का कहना है कि मुझे अपनी जिम्मेदारियों का अहसास है।













