बांग्लादेश में शेख हसीना वाजेद को सत्ता से हटाने के बाद उन्हें जेल भेजने की कोशिशों में लगी हुई मुहम्मद यूनुस की अगुवाई वाली सरकार आखिरकार अपने मंसूबों में सफल हो ही गई। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने एक ऐतिहासिक फैसले में अदालत की अवमानना के मामले में छह महीने की जेल की सजा सुनाई है। यह फैसला 2 जुलाई 2025 को जस्टिस मोहम्मद गुलाम मुर्तुजा मोजुमदार की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनाया।
5 अगस्त को तख्तापलट के बाद देश छोड़ चुकी शेख हसीना के लिए ये एक बड़ा झटका है। इसी के साथ बांग्लादेश की सियासत में भूचाल आ गया है। अंतरराष्ट्रीय अदालत की सजा और आरोपीICT-1 की तीन सदस्यीय पीठ ने हसीना को छह महीने और शकिल अकंद बुलबुल को दो महीने की सजा सुनाई। कोर्ट ने आदेश दिया कि यह सजा तब लागू होगी, जब दोनों आत्मसमर्पण करेंगे या गिरफ्तार होंगे। अभियोजक ताजुल इस्लाम ने तर्क दिया कि हसीना का बयान न केवल न्यायाधीशों, बल्कि गवाहों और जांचकर्ताओं के लिए भी खतरा था। वहीं, हसीना के समर्थकों ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा बताया।
क्या है पूरा मामला
ये मामला शेख हसीना से जुड़े लीक ऑडियो और धमकी से जुड़ा है, जिसमें कथित तौर पर शेख हसीना आवामी लीग के छात्र संगठन के पूर्व नेता शकिल अकंद बुलबुल की बातचीत थी। आरोप है कि हसीना ने बुलबुल से कहा था कि “मेरे खिलाफ 227 मामले हैं, तो क्या मुझे 227 लोगों को खत्म करने का हक मिल गया?” अभियोजन पक्ष ने इसे अदालत की कार्यवाही को प्रभावित करने और युद्ध अपराधों की जांच में शामिल लोगों को धमकाने की कोशिश करार दिया। फोरेंसिक जांच में ऑडियो की सत्यता की पुष्टि के बाद कोर्ट ने इसे गंभीर अपराध माना।
आवामी लीग की पहचान खत्म करने में जुटी यूनुस सरकार
गौरतलब है कि चार बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहीं शेख हसीना को आंदोलन के चलते 5 अगस्त 2024 को देश छोड़कर भारत में शरण लेनी पड़ी थी। दूसरी ओर बांग्लादेश में अंतरिम सरकार बनने के बाद मुहम्मद यूनुस ने आवामी लीग के नेताओं को एक-एक करके ठिकाने लगाना शुरू कर दिया। आवामी लीग के नेताओं के खिलाफ कई केस दर्ज कर उन्हें जेलों में ठूंस दिया गया। फिलहाल तो हालात ये है कि आवामी लीग भी बांग्लादेश में प्रतिबंधित कर दिया गया है।

















