अमेरिका क्यों गया जिन्ना के देश का वायुसेना प्रमुख! मुनीर के बाद बाबर की ट्रंप प्रशासन से वार्ता के मायने क्या!
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अमेरिका क्यों गया जिन्ना के देश का वायुसेना प्रमुख! मुनीर के बाद बाबर की ट्रंप प्रशासन से वार्ता के मायने क्या!

जिन्ना के देश के वायु सेना अध्यक्ष बाबर का अमेरिका दौरा दुनिया को दिखाने के लिए एक रणनीतिक पैंतरेबाजी भी हो सकता है, जिसमें वह दिखाना चाह सकता है कि अमेरिका उसका 'एक भरोसेमंद रक्षा साझेदार' है

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Jul 3, 2025, 12:17 pm IST
inविश्व, रक्षा, विश्लेषण
पाकिस्तान के एयर चीफ बाबर ने वॉशिंगटन में अमेरिकी वायुसेना प्रमुख जनरल डेविड ऑल्विन और अन्य सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की

पाकिस्तान के एयर चीफ बाबर ने वॉशिंगटन में अमेरिकी वायुसेना प्रमुख जनरल डेविड ऑल्विन और अन्य सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की

जिन्ना के देश के वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिधू की हाल की अमेरिका यात्रा को लेकर विशेषज्ञों के मन में कई सवाल खड़े हुए हैं। बाबर का यह दौरा पाकिस्तानी मीडिया में ‘ऐतिहासिक’ बताया गया है, क्योंकि दस साल बाद वायुसेना का कोई पदेन प्रमुख अमेरिका के दौरे पर गया था। बेशक, यह एक साधारण सैन्य दौरा नहीं था। खबर है कि अमेरिका के साथ सैन्य सहयोग और रणनीतिक चर्चा इसके केन्द्र में थी। यहां यह भी ध्यान रहे कि अभी कुछ दिन पहले ही पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर भी वहां पांच दिन लगाकर आए, राष्ट्रपति ट्रंप के साथ डिनर पर चर्चा की, हालांकि मुनीर का वह दौरा विवादों से घिरा रहा था। जिन्ना के देश के दो फौजी प्रमुखों का अगल—बगल अमेरिका के चक्कर लगा आना दक्षिण एशिया में शक्ति संतुलन और अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों की दिशा को लेकर कई सवाल तो खड़े करता ही है।

अपने इस दौरे में पाकिस्तान के एयर चीफ बाबर ने वॉशिंगटन में अमेरिकी वायुसेना प्रमुख जनरल डेविड ऑल्विन और अन्य सैन्य अधिकारियों से मुलाकात की। सामने आए बातचीत के विस्तार में बताया गया कि यह साझा सैन्य अभ्यास, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, साइबर सुरक्षा और एडवांस एविएशन सिस्टम्स जैसे विषयों पर केन्द्रित रही।

बाबर की अमेरिकी विदेश मंत्रालय के अधिकारियों से भी मुलाकात हुई, जिसमें ‘पाकिस्तान की भौगोलिक और सामरिक स्थिति को दक्षिण एशिया की स्थिरता के लिए अहम’ बताया गया। जैसा पहले बताया, पाकिस्तान का कोई वायुसेना प्रमुख दस साल बाद अमेरिकी अधिकारियों से मिला था। इससे यह स्पष्ट होता है कि पाकिस्तान अमेरिका के साथ अपने रक्षा संबंधों को फिर से पटरी पर लाने की कोशिश कर रहा है।

पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर का अमेरिका दौरा विवादों से घिरा रहा था

इसमें संदेह नहीं है कि जिन्ना का देश इस समय कई मोर्चों पर चुनौतियों का सामना कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और चीन से कर्ज लेने के बावजूद पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था डगमगाई हुई है। बलूचिस्तान में विद्रोह सुलग ही रहा है। जिहादी गुट टीटीपी की गतिविधियां और सीमापार आतंकवाद फैलाने के आरोपों ने पाकिस्तान की नींद उड़ाई हुई है। इस सबके बीच भारत के आपरेशन सिंदूर ने भी जिन्ना के देश की रक्षा पंक्ति की धज्जियां उड़ाई हैं। कश्मीर को लेकर पाकिस्तान दुनियाभर में झूठ फैला ही रहा है, इस वजह से भारत के साथ संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं।

इन चुनौतियों के बीच अमेरिका से रक्षा सहयोग बढ़ाना पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिकता फिर से हासिल करने की रणनीति का हिस्सा हो सकता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पाकिस्तान में बढ़ती दिलचस्पी को कई विश्लेषक रणनीतिक निवेश के रूप में भी देख रहे हैं। जनरल असीम मुनीर की हाल की अमेरिका यात्रा के दौरान बलूचिस्तान के खनिज संसाधनों पर सौदे की खबरें भी सामने आई थीं। इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका पाकिस्तान को एक भौगोलिक मोर्चे के रूप में देख रहा है—ईरान, अफगानिस्तान और चीन के बीच।

इसके अलावा, अमेरिका ने हाल ही में पाकिस्तान को F-16 फाइटर जेट्स को अपग्रेड करने के लिए 3.58 हजार करोड़ रुपए दिए थे, जो रक्षा सहयोग की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

बाबर का अमेरिका का यह दौरा भारत के लिए निश्चित रूप से कई मायनों में सतर्क होने का संकेत करता है। क्योंकि अगर अमेरिका पाकिस्तान को उन्नत हथियार प्रणाली या सैन्य प्रशिक्षण देता है, तो यह बात भारत की सुरक्षा नीति को प्रभावित कर सकती है। भारत पाकिस्तान के आतंकवाद को समर्थन को लेकर अमेरिका के सामने चिंता जता चुका है। ऐसी परिस्थिति में भारत को अब अपनी रणनीतिक साझेदारियों—जैसे क्वाड, एससीओ और हिन्दू—प्रशांत साझेदारी को और मजबूत करना होगा।

जिन्ना के देश के वायु सेना अध्यक्ष बाबर का अमेरिका दौरा दुनिया को दिखाने के लिए एक रणनीतिक पैंतरेबाजी भी हो सकता है, जिसमें वह दिखाना चाह सकता है कि अमेरिका उसका ‘एक भरोसेमंद रक्षा साझेदार’ है। यह दौरा केवल सैन्य सहयोग तक सीमित नहीं रहा होगा, इसमें राजनीतिक, आर्थिक और भू-राजनीतिक आयाम भी शामिल रहे होंगे। पाकिस्तान की शैतानी सोच को भारत भलीभांति पहचानता है। इसलिए बाबर का यह दौरा भी भारत के नीतिकारों के ध्यान में जरूर है। भारत का विदेश विभाग भी इसको अपने तरीके से समझ ही रहा होगा।

Topics: strategic affaisrsपाकिस्तानPakistanभारतअमेरिकाModiIndiaAmericadiplomacyasim munirair chief babar
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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