यूके में लगातार ही शरणार्थी नीतियों और आप्रवासियों को लेकर लगातार ही बहसें हो रही हैं और लगातार ही कुछ न कुछ नई बातें सामने आती जा रही हैं। अभी जो सामने आया है, वह बहुत ही हैरान करने वाला है और कई लोगों को विचलित करने वाला है।
यह पीड़ा है एक पूर्व सैनिक की। और सैनिक भी कोई आम नहीं है। वैसे तो सैनिक कोई साधारण होता ही नहीं है, परंतु यह सैनिक इसलिए विशेष है क्योंकि यह सैनिक सेना की उस टुकड़ी का सैनिक है, जिसने अफगानिस्तान के लोगों को तालिबान से आजादी पाने में सहायता की थी। जॉर्ज फोर्ड नामक सैनिक ने अपना खून उनके लिए बहाया, जिनका उनके साथ कोई प्रत्यक्ष लेनदेना भी नहीं होगा।
जब वह 21 वर्ष के थे, तो हेलमंद प्रांत में उन्होनें गोली भी खाई थी और उन्हें व्हीलचेयर भी प्रयोग करनी पड़ी थी। मगर उनकी पीड़ा का अभी पारावार नहीं है क्योंकि जब वे यूके वापस आए थे तो उन्होनें एक ही सपना देखा था कि वह अपने गृह नगर ब्रैकनेल, बर्कस में एक सामान्य जीवन जियेंगे, मगर कई और सैनिकों की तरह उन्हें भी दुर्भाग्य से नशे की लत लग गई और उन्हें अपना किराए का घर छोड़ना पड़ा, जब उनका लंबे समय का रिश्ता टूटा।
एक वॉरियर की पीड़ा
thesun के अनुसार, जब स्थानीय अधिकारी उनके लिए घर खोज नहीं पाए तो उन्होंने दो साल अपनी माँ के साथ बिताए। मगर यह उनके लिए एक धक्के की तरह आया कि उन्हीं की सरकार द्वारा उन 300 अफगानियों का स्वागत किया जा रहा है, जिन्हें जॉर्ज ने आजाद कराने के लिए लड़ाई लड़ी थी।
दरअसल ये वे अफगानी परिवार हैं, जिन्होंने अफगानिस्तान में यूके मिशन में यूके के साथ काम किया था। अब सरकार उन्हें ब्रिटेन में बसा रही है। ब्रैकनेल में इन परिवारों को एक फोर स्टार होटल में रखा जा रहा है।
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35 वर्षीय जॉर्ज की पीड़ा उनके शब्दों में दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि उन्हें इससे कोई समस्या नहीं है कि अफगानों की सहायता की जा रही है। वे मदद और आदर के हकदार हैं। उन्होंने कुछ महत्वपूर्ण बातें कहीं। उन्होंने कहा, “लेकिन निश्चित रूप से सरकार को उन लोगों की भी मदद करनी चाहिए, जिन्होंने पहले देश की सेवा की है?” इसके साथ उन्होंने एक और महत्वपूर्ण प्रश्न उठाया, जिसे लेकर लोग अक्सर बात करते हैं कि क्या वास्तव में पीड़ित लोग ब्रिटेन आ रहे हैं?
ब्रिटेन में अफगानों के पहुंचने पर उठ रहे सवाल
“मुझे समझ में नहीं आता कि कुछ परिवार ब्रिटेन में कैसे पहुँच गए, क्योंकि मैंने होटल के बाहर कुछ लोगों को देखा है और उनमें से कुछ तो अंग्रेज़ी भी नहीं बोलते, इसलिए मुझे यकीन नहीं है कि उन्होंने हमारे मिशनों की किस तरह मदद की।“ तो क्या ऐसे लोग आ रहे हैं, जिन्होंने मदद नहीं की थी? ब्रिटेन में लोग कई बार यह प्रश्न उठा चुके हैं कि ऐसे लोग क्यों ब्रिटेन आ रहे हैं, जिनकी लड़ने वाली उम्र है और लड़कियों या बच्चों को क्यों नहीं ला रहे हैं? यही कुछ जॉर्ज के भी प्रश्न हैं। जॉर्ज ने भी पूछा, “उनमें से बहुत से युद्ध-उम्र के पुरुष हैं और यह चिंताजनक है क्योंकि किसी ने उन महिलाओं या बच्चों को नहीं देखा है जिन्हें उनके साथ होना चाहिए था।”
उन्होंने यह कहा, “मैं बस इतना चाहता हूँ कि जो कुछ भी मैंने सहा है उसके बाद जीवन में कुछ स्थिरता आए।”
जीबी न्यूज़ पर दिए गए अपने इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि उन्हें इससे बहुत अपमानित महसूस हो रहा है कि उनके पास रहने के लिए घर नहीं है और अफगानी शरणार्थियों को घर मिल हरे हैं। लोग सोशल मीडिया पर बात कर रहे हैं कि जॉर्ज ने देश की सेवा की, जॉर्ज ने खून बहाया और और अब वे बेघर है। लोगों का कहना है कि यह आरोप नहीं है, बल्कि यह प्राथमिकता की बात है।
इसे लेकर रिफॉर्म के सांसद ली एंडरसन का बयान था कि यह बहुत ही दुख की बात है कि जॉर्ज जैसे सैनिक को, जिसने देश के लिए गोलियां खाईं घर नहीं है और वहीं शहर की काउंसिल शरणार्थियों के लिए स्वागत में कालीन बिछा रही है।
उन्होंने कहा कि आर्म्ड फोर्सेस कवनन्ट का उद्देश्य हमारे दिग्गजों का सम्मान करना है, न कि उन अप्रशिक्षित लोगों के पक्ष में अनदेखा किया जाना चाहिए जो अंग्रेजी भी नहीं बोल सकते। हमारे नायक इससे बेहतर के हकदार हैं।
जिन अफगानी नागरिकों के लिए काउंसिल ने होटल की व्यवस्था की है उन्हें अवैध आप्रवासी, शरण चाहने वाले या शरणार्थी के रूप में वर्गीकृत नहीं किया गया है क्योंकि उन्होंने या तो यूके मिशन की मदद की थी, जिनमें से कई अनुवादक के रूप में काम कर रहे थे, या वे देश से इसलिए भाग गए क्योंकि उन्हें तालिबान से खतरा माना गया था।
लेकिन इस कदम से स्थानीय लोगों और पूर्व सैनिकों मे गुस्सा है। लोग कह रहे हैं कि इतना खर्च कौन देगा? जॉर्ज ने यह भी बताया कि उन्हें अफगानिस्तान में लड़ने वाले एक पूर्व सैनिक ने अपना हाल बतात हुए कहा था कि वह और उनकी दो बेटियाँ एक कमरे वाले फ्लैट में रहते हैं।
जॉर्ज ने कहा: “मैं एक ऐसा व्यक्ति हूं, जिस पर मुझे गर्व है, लेकिन वे मुझे ऐसा महसूस करा रहे हैं जैसे मेरे हाथ में भीख का कटोरा है।” उन्होंने आगे कहा कि “मुझे अफ़गानों को मदद दिए जाने से कोई समस्या नहीं है – जब तक कि दिग्गजों को भी समान महत्व दिया जाता है।

















