बांग्लादेश में आज जो ‘जुगाड़’ सरकार कुर्सी पर बैठी है वह जिन्ना के देश के फौजी अफसरों और नेताओं को इसलिए बहुत रास आ रही है क्योंकि उनकी तरह ही बांग्लादेश की ‘जुगाड़’ सरकार भी दिमाग से गरीब है। इसलिए बांग्लादेश के साथ अपने रिश्ते सुधारने को जिन्ना का देश लगातार उस पर डोरे डाल रहा है। संभवत: इसलिए भी जिससे वह उस ओर से अपने शैतानी मजहबी तत्व भारत के अंदर भेजकर यहां अराजकता फैला सके। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में ढाका अपने जिन्ना के बनाए आका को लेकर लंबी लंबी हांक रहा है और आपसी कारोबार, व्यापार और सैन्य समीकरण बैठाने की जुगत में लगा हुआ है। दक्षिण एशिया में ये दो शैतानी सोच के इस्लामी देश शायद किसी नई भारत विरोधी शरारत की तैयारी में हैं। इसीलिए गत दिनों जिन्ना के देश के तीन फौजी अफसर फर्जी पासपोर्ट के सहारे ढाका गए हैं और यूनुस की सरकार ने पलकें बिछाकर उनका स्वागत किया है। आईएसआई से जुड़े वे अफसर बांग्लादेशी सेना की एक डिविजन का मुआयना भी करने गए हैं और कुछ ‘गोपनीय’ बैठकें भी की हैं। लेकिन जिन्ना के देश की इन सारी हरकतों का खुलाया बांग्लादेश के सुप्रसिद्ध टेब्लॉयड ब्लिट्ज के संपादक ने कर दिया है और वह भी सोशल मीडिया पर।
ब्लिट्ज के संपादक सलाहुद्दीन शोएब चौधरी एक्स पर लिखते हैं, “पाकिस्तान की सेना के तीन अफसर ब्रिगेडियर जनरल नदीम अहमद, ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद नदीम तल्हा तथा ब्रिगेडियर जनरल सऊद अहमद अमीरात एयरलाइंस (फ्लाइट नंबर AK-586) से 28 जून को बांग्लादेश पहुंचे। इन अधिकारियों को ढाका के रेडिसन ब्लू होटल ले पहुंचाया गया। पासपोर्ट में इन अफसरों को ‘मेडिकल कोर का सदस्य’ बताया गया है।”
शोएब की पोस्ट में आगे लिखा है, “दस्तावेज बताते हैं कि ब्रिगेडियर जनरल नदीम अहमद का पासपोर्ट 30 अप्रैल, 2025 को जारी हुआ; ब्रिगेडियर जनरल तल्हा का पासपोर्ट 26 मई को तथा ब्रिगेडियर जनरल सऊद का पासपोर्ट 29 मई, 2025 को जारी हुआ था। यानी साफ ह कि उनके ये पासपोर्ट बांग्लादेश आन के लिए जारी किए गए। तीनों 5 जुलाई को अमीरात एयरलाइंस से बांग्लादेश से लौटेंगे।” बताया गया है कि ये तीनों अफसर पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के स्पेशल सर्विस ग्रुप के हैं।
ढाका के रेडिसन ब्लू होटल में सरकार की तरफ से उन अफसरों को खास सुरक्षा और सुविधाएं दी गई हैं। एक दिन ये तीनों कॉक्स बाजार में बांग्लादेश की सेना की 10वीं इन्फैंट्री डिवीजन का दौरा भी करने गए थे। यह डिविजन म्यांमार सीमा के पास उस इलाके में स्थित है, जहां अराकान आर्मी का दबदबा है।
बांग्लादेश की यूनुस सरकार पर आरोप है कि वह इन आईएसआई अधिकारियों को न केवल संरक्षण दे रही है, बल्कि उन्हें म्यांमार की विद्रोही अराकान आर्मी से जोड़ने वाले नेटवर्क तक पहुंच भी प्रदान कर रही है। पत्रकार सलाहुद्दीन शोएब चौधरी का दावा है कि अमेरिकी “डीप स्टेट” बांग्लादेश के जरिए अराकान आर्मी को सैन्य सहायता पहुंचा रही है और यूनुस सरकार इस योजना में एक सक्रिय भागीदार बनी हुई है।
नि:संदेह यह घटनाक्रम भारत की दृष्टि से बहुत चिंताजनक है। आईएसआई की गतिविधियां पहले से ही भारत के खिलाफ साजिशों के लिए कुख्यात रही हैं। अब यदि बांग्लादेश की सरकार उन्हें खुला समर्थन दे रही है, तो यह भारत की पूर्वोत्तर सीमा की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत को इस मुद्दे को पूरी गंभीरता के साथ कूटनीतिक स्तर पर उठाना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इस प्रकार के शैतानी गुप्त गठबंधनों को उजागर करना चाहिए।

















