भारत हर क्षेत्र में लगातार प्रगति करता जा रहा है। दशकों की मेहनत रंग लाई है और अब देश ट्रैकोमा मुक्त हो गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने भारत को ट्रैकोमा मुक्त देश घोषित किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम के 123वें संस्करण में इस बात की पुष्टि की थी। उन्होंने इसे देश के लिए गर्व का पल करार दिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि बैक्टीरिया के इन्फेक्शन के कारण फैलने वाली ये बीमारी एक वक्त देश में आम थी। ये इतनी खतरनाक है कि अगर वक्त आंखों का इलाज न किया जाए तो आंखों की रौशनी जाने का खतरा भी बना रहता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसे जड़ से समाप्त करने का संकल्प लेकर हम आगे बढ़े और आज हमने अपने लक्ष्य को हासिल कर लिया है। उन्होंने इसका श्रेय उन लोगों को दिया है, जिन डॉक्टरों ने लगातार इससे लड़ाई लड़ी है।
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क्या है ट्रैकोमा?
ट्रैकोमा एक संक्रामक नेत्र रोग है, जो क्लैमाइडिया ट्रैकोमैटिस नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। यह बीमारी मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में फैलती है जहां स्वच्छ पानी और सैनिटेशन की कमी होती है। बार-बार होने वाले संक्रमण से आंखों की पलकों के अंदरूनी हिस्से में जख्म हो जाते हैं, जिसके परिणामस्वरूप पलकें अंदर की ओर मुड़ सकती हैं। इससे कॉर्निया को नुकसान पहुंचता है और अगर इलाज न किया जाए तो यह अंधापन तक पैदा कर सकता है। WHO के अनुसार, यह विश्व स्तर पर रोकथाम योग्य अंधेपन का प्रमुख कारण रहा है।
नेपाल और म्यांमार के बाद तीसरा देश बना भारत
गौरतलब है कि भारत ट्रैकोमा मुक्त होने वाला नेपाल और म्यांमार के बाद तीसरा देश बन गया है। WHO ने 8 अक्टूबर 2024 को भारत को ट्रैकोमा से मुक्त होने का प्रमाणपत्र प्रदान किया था, जिसकी घोषणा 20 मई 2025 को जिनेवा में आयोजित 78वीं विश्व स्वास्थ्य सभा में की गई।
1963 में शुरू हुए राष्ट्रीय ट्रैकोमा नियंत्रण कार्यक्रम को बाद में राष्ट्रीय अंधापन नियंत्रण कार्यक्रम (NPCBVI) में शामिल किया गया। 1971 में, ट्रैकोमा के कारण भारत में 5% अंधापन होता था, जो 2018 तक घटकर 0.008% हो गया। 2017 में भारत को सक्रिय ट्रैकोमा से मुक्त घोषित किया गया था, और 2021 से 2024 तक 200 प्रभावित जिलों में राष्ट्रीय ट्रैकोमैटस ट्राइकियासिस सर्वेक्षण किया गया।
स्वच्छ भारत और जल जीवन मिशन की भूमिका
पीएम मोदी ने इस उपलब्धि का श्रेय देश के स्वास्थ्यकर्मियों के साथ-साथ स्वच्छ भारत अभियान और जल जीवन मिशन को दिया। इन पहलों ने स्वच्छता और स्वच्छ पानी की उपलब्धता को बढ़ावा देकर ट्रैकोमा के मूल कारणों को खत्म करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। स्वच्छ भारत अभियान ने सैनिटेशन सुविधाओं को बेहतर किया, जबकि जल जीवन मिशन ने हर घर तक स्वच्छ पानी पहुंचाने में मदद की, जिससे इस तरह की बीमारियों का जोखिम काफी हद तक कम हुआ।

















