गत 4 जून को केंद्रीय मंत्रिपरिषद की बैठक हुई। लगभग साढ़े तीन घंटे तक चली इस बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। बैठक के समापन पर प्रधानमंत्री ने सभी मंत्रियों से कहा कि वे महत्वपूर्ण जिलों और प्रखंडों का दौरा करें और वहां कम से कम 24 घंटे बिताएं। उन्होंने कहा कि दुनिया ने भारत की रक्षा शक्ति देखी है। अब युद्ध की प्रकृति बदल गई है और सब कुछ केवल 20 मिनट में हो सकता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि स्वदेशी हथियारों ने अपनी ताकत सिद्ध कर दी है और दिखाया है कि वे किसी से कम नहीं हैं। उन्होंने युद्ध की बदलती प्रकृति पर कहा कि ‘मेक इन इंडिया’ हथियार और प्लेटफॉर्म सरकार की प्राथमिकता होगी। उन्होंने मंत्रियों से कहा कि वे ऊंचे लक्ष्य रखें और उन्हें प्राप्त करने के लिए तेजी से काम करें।
बैठक में एक प्रस्तुति दी गई, जिसमें पाकिस्तान के विरुद्ध संघर्ष में भारत की शक्ति पर जोर दिया गया। इस बात पर भी प्रकाश डाला गया कि पाकिस्तान ने स्वयं स्वीकार किया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान उसे भारी क्षति हुई। बैठक में कैबिनेट सचिव टी.वी. सामनाथन ने ‘परिवर्तनकारी शासन के 11 वर्ष’ विषय पर एक प्रस्तुति दी, जिसमें राजग सरकार की उपलब्धियों का ब्योरा दिया गया। इस अवसर पर मोदी ने मंत्रियों और सचिवों से कहा कि वे पिछले 10 वर्ष की उपलब्धियों की तुलना उसके पहले के 10 वर्ष से न करें और आने वाले वर्षों के लिए निर्धारित लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करें।
इससे पहले 30 मई को कानपुर में प्रधानमंत्री ने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की स्वदेशी रक्षा क्षमताओं और मेक इन इंडिया की ताकत को दुनिया के सामने प्रदर्शित किया। उन्होंने कहा कि ब्रह्मोस मिसाइल सहित भारत के स्वदेशी हथियारों ने लक्ष्य पर सटीक प्रहार किया और दुश्मन के इलाके में भी तबाही मचाई।
यह क्षमता भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ के प्रति प्रतिबद्धता का प्रत्यक्ष परिणाम है। श्री मोदी ने कहा कि एक समय था जब भारत अपनी सैन्य और रक्षा जरूरतों के लिए अन्य देशों पर निर्भर था। हालांकि, देश ने उन परिस्थितियों को बदलना शुरू कर दिया है और रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बनने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि रक्षा में आत्मनिर्भरता न केवल अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि राष्ट्रीय गौरव और संप्रभुता के लिए भी आवश्यक है।
श्री मोदी ने रक्षा आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में उत्तर प्रदेश के विशेष योगदान पर गर्व व्यक्त किया।
उन्होंने बताया कि कानपुर के ऐतिहासिक आयुध कारखाने की तरह, सात आयुध कारखानों को उन्नत रक्षा उत्पादन इकाइयों में बदल दिया गया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश में एक प्रमुख रक्षा गलियारे की स्थापना पर भी प्रकाश डाला। प्रधानमंत्री ने कहा कि पारंपरिक उद्योग एक बार स्थानांतरित हो गए थे, लेकिन अब रक्षा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियां अपनी उपस्थिति दर्ज करा रही हैं। अमेठी में एके-203 राइफलों का उत्पादन पहले ही शुरू हो चुका है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऑपरेशन सिंदूर में अहम भूमिका निभाने वाली ब्रह्मोस मिसाइल को अब उत्तर प्रदेश में एक नया ठिकाना मिल गया है, जो रक्षा उत्पादन में राज्य की बढ़ती महत्ता को दर्शाता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भविष्य में कानपुर और उत्तर प्रदेश भारत को एक प्रमुख रक्षा निर्यातक बनने की यात्रा में आगे बढ़ाएंगे।

















