पूर्वोत्तर में नहीं थम रहा बारिश और बाढ़ का कहर : 5.5 लाख से अधिक प्रभावित, 36 की मौत
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पूर्वोत्तर में नहीं थम रहा बारिश और बाढ़ का कहर : 5.5 लाख से अधिक प्रभावित, 36 की मौत

पूर्वोत्तर भारत में बाढ़ और भूस्खलन से अब तक 36 मौतें, 5.5 लाख लोग प्रभावित, राहत कार्य जारी, हिमंत बिस्व सरमा और सेना की टीमें मैदान में।

Written byPanchjanyaPanchjanya
Jun 3, 2025, 09:44 pm IST
in भारत, असम, मणिपुर, मिजोरम, सिक्किम

गुवाहाटी (हि.स.) । पूर्वोत्तर भारत में लगातार हो रही भारी बारिश और नदियों के उफान से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित है। असम, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मिजोरम, सिक्किम, मेघालय, नागालैंड और त्रिपुरा में बाढ़ और भूस्खलन से अब तक 36 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 5.5 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। बारिश के चलते सड़क, रेल और नौका सेवाएं बाधित हो गई हैं। क्षेत्र में बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है और हजारों लोगों को राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है। राहत और बचाव कार्य एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और सेना की मदद से तेजी से जारी है।

असम के 22 जिलों में 5.35 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं। आधिकारिक बुलेटिन के अनुसार, राज्य की 15 नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने सबसे अधिक प्रभावित जिलों में से लखीमपुर और कछार का दौरा किया और हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया।

वहीं, सिक्किम में भी भूस्खलन से तीन सैनिकों की मौत हो गई और छह अन्य लापता हैं। मृतकों की पहचान हवलदार लखविंदर सिंह, लांस नायक मनीष ठाकुर और पोर्टर अभिषेक लाखड़ा के रूप में हुई है। लाचुंग और चुंगथांग से 1,678 फंसे पर्यटकों को सुरक्षित निकाला गया है, जबकि लाचेन में 100 से अधिक अब भी फंसे हैं। कई पुल क्षतिग्रस्त होने से गुरुडोंगमार लेक, वैली ऑफ फ्लावर्स और जीरो प्वाइंट जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंच बाधित है। कठिन परिस्थितियों में राहत अभियान जारी है।

मणिपुर में भारी बारिश के कारण नदी तटबंधों के टूटने से 19,800 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। 3,365 से ज्यादा घरों को नुकसान पहुंचा है और 103 बस्तियां जलमग्न हैं। राज्य प्रशासन ने 31 राहत शिविर बनाए हैं, जिनमें से अधिकतर इम्फाल ईस्ट में हैं।

अरुणाचल प्रदेश के 23 जिलों और 156 गांवों में बाढ़ और भूस्खलन से तबाही मची है। अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है। कई स्थानों पर सड़कें धंसने से संपर्क टूट गया है।

नगालैंड में भी लगातार बारिश के चलते कई स्थानों पर भूस्खलन की सूचनाएं मिली हैं। हालांकि, किसी के हताहत होने की सूचना सामने नहीं है। कई क्षेत्रों में घरों और सड़कों को नुकसान होने की सूचना है।

त्रिपुरा की स्थिति में थोड़ा सुधार आया है। बारिश कम होने और नदियों का जलस्तर घटने से राहत मिली है, लेकिन अभी भी 10,000 से अधिक लोग 66 राहत शिविरों में हैं। पश्चिम त्रिपुरा में सबसे अधिक प्रभावित परिवार हैं।

मिजोरम में लगातार बारिश के चलते सभी स्कूल बंद रहे। भूस्खलन, चट्टानें गिरने और जलभराव ने जनजीवन को प्रभावित किया है। अब तक पांच लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें तीन म्यांमार से आए शरणार्थी शामिल हैं।

सभी राज्यों में आपात बैठकें हो रही हैं। राज्यों के अधिकारी स्थिति की समीक्षा के लिए उच्च स्तरीय बैठकें कर रहे हैं। पर्यटन विभाग ने पर्यटकों से मौसम और सड़कों की स्थिति देखकर ही यात्रा की योजना बनाने की अपील की है।

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