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नक्सली आतंक का विघटन तय, बसव राजू के बाद नेतृत्व का संकट

नक्सल महासचिव बसव राजू की मौत के बाद संगठन विघटन की कगार पर, सुरक्षाबलों के निशाने पर 15 शीर्ष नक्सली, मार्च 2026 तक अभियान जारी।

Written byPanchjanyaPanchjanya
May 31, 2025, 06:49 pm IST
in भारत, छत्तीसगढ़, झारखण्‍ड, दिल्ली

जगदलपुर (हि.स.) । छत्तीसगढ़ सहित अन्य नक्सल प्रभावित प्रदेशाें में भी लगातार कमजोर होते नक्सल संगठन में 21 मई को अबूझमाड़ में संगठन का महासचिव और नक्सली संगठन का शीर्षस्थ नेता नंबाला केशव राव उर्फ बसव राजू मारा गया । इसके बाद से लगातार जारी मुठभेड़ में जहां नक्सली संगठन के कई बड़े नेता सहित दूसरी पंक्ति के नक्सली कैडर मारे जा रहे हैं वहीं नक्सलियाें के आत्मसमर्पण व गिरफ्तारी से पूरा नक्सली संगठन तहस-नहस हाे गया है। बस्तर आईजी का कहना है कि नक्सली संगठन आज पूर्णतः विघटन की कगार पर है।

सुरक्षाबलों के अनुसार बस्तर संभाग में अब केवल 300 सशस्त्र नक्सली कैडर ही बचे हैं, जिनमें शीर्ष नक्सली कैडर की संख्या लगभग 25 है। नक्सली संगठन का शीर्षस्थ नेता नंबाला केशव राव उर्फ बसव राजू मारे जाने के बाद अब सुरक्षाबलों ने करोड़ाें के इनामी 15 शीर्ष नक्सलियों में पोलित ब्यूरो और सेंट्रल कमेटी सदस्य सुरक्षाबलाें के निशाने पर हैं । सुरक्षाबलाें का दावा है कि उक्त 15 शीर्ष नक्सलियाें में से 9 नक्सली बस्तर के जंगलों में छिपे हुए हैं। प्रदेश में 30 मार्च 2026 तक नक्सलियों के समूल सफाये को लेकर नक्सल विराेधी अभियान लगातार जारी है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि मार्च 2026 तक नक्सलवाद का पूरी तरह से खात्मा कर दिया जाएगा।

बस्तर आईजी सुंदरराज पी. का कहना है कि, नक्सली संगठन आज पूर्णतः विघटन की कगार पर है, जहां कोई नेतृत्व नहीं बचा है। नंबाला केशव राव उर्फ बसव राजू के मारे जाने बाद उनके उत्तराधिकारी को लेकर चर्चाएं अब बेमानी हैं। उसकी मौत के साथ ही यह आंदोलन अपनी वैचारिक और संचालन क्षमता भी खो चुका है। यह माना जा सकता है कि नंबाला केशव राव उर्फ बसव राजू ही इस अवैध नक्सली संगठन का अंतिम महासचिव था । सुरक्षाबलों का लक्ष्य अब शीर्ष नक्सलियों को निशाना बनाना है । उन्हाेंने कहा कि नक्सल मुक्त बस्तर मिशन अब केवल एक सपना नहीं बल्कि तेजी से साकार होती हुई हकीकत है।

आईजी ने कहा कि एक समय आतंक और हिंसा का प्रतीक रहा नक्सल आंदोलन अब अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है, जबकि शांति और विकास की नई सुबह बस्तर में दस्तक दे चुकी है। अब नक्सली कैडरों के पास एक मात्र सम्मानजनक विकल्प यह है कि वे आत्मसमर्पण करें। हिंसा का रास्ता छोड़ें और समाज की मुख्यधारा में लौटें। सरकार लगातार पुनर्वास और शांतिपूर्ण जीवन की पेशकश कर रही है। आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को पुनर्वास नीति के तहत लाभ दिया जाएगा। लेकिन यदि कुछ तत्व अब भी इस अवसर को नजर अंदाज करते हैं, तो उनका अंत निकट और निश्चित है।

सुरक्षाबलाें के निशाने पर 15 शीर्ष नक्सलियाें में ये हैं शामिल-

क्रमनाम व उपनामनिवासशिक्षापदइनाम
1मुपल्ला लक्ष्मण राव उर्फ गणपतिवीरपुर, करीमनगर, तेलंगानाबीएससी, बीएडसलाहकार, सेंट्रल कमेटी₹1 करोड़
2मल्लोजुला वेणुगोपाल उर्फ भूपतिपेद्दापल्ली, करीमनगर, तेलंगानाबी.कॉमसचिव, सीआरबी₹1 करोड़
3थिप्परी तिरुपति उर्फ देवजीआंबेडकर नगर, करीमनगर, तेलंगानाहायर सेकंडरीप्रभारी, सेंट्रल मिलिट्री कमेटी–
4मिशिर बेसरा उर्फ भास्करगिरडीह, झारखंडस्नातकोत्तरप्रभारी, ईआरबी–
5कादरी सत्यनारायण रेड्डी उर्फ कोसासिरसिला, करीमनगर, तेलंगानाहायर सेकंडरीसीआरबी सदस्य, डीकेएसजेडसी सचिव–
6पुल्लरी प्रसाद राव उर्फ चंद्रन्नापेद्दापल्ली, करीमनगर, तेलंगाना–सचिव, तेलंगाना स्टेट कमेटी–
7मोडेम बालाकृष्णा उर्फ बालन्नावारंगल, तेलंगानाहायर सेकंडरीप्रभारी, ओएससी–
8गणेश उईके उर्फ राजेश तिवारीनालगोंडा–सचिव, ओडिशा स्टेट कमेटी–
9अनल दा उर्फ तूफान दागिरिडीह, झारखंडएमएससीसचिव, बिहार-झारखंड स्पेशल एरिया कमेटी–
10गजराला रवि उर्फ उदयवारंगल, तेलंगानाहायर सेकंडरी, ITIसचिव, एओबीएसजेडसी–
11सब्यसाची गोस्वामी उर्फ अजय दाउत्तर 24 परगना, पश्चिम बंगाल–सचिव, डब्लूबीएसएसी-1–
12कट्टा रामचंद्र रेड्डी उर्फ गुड़सा उसेंडीकरीमनगर, तेलंगाना–सचिव, डीकेएसजेडसी–
13सुजाता उर्फ कल्पनामहबूबनगर, तेलंगाना–सचिव, दक्षिण ब्यूरो डीएकेएमएस–
14नरसिम्हा चालम उर्फ सुधाकरपश्चिम गोदावरी, आंध्रप्रदेश–प्रभारी, सीआरबी–
15माडवी हिड़मा उर्फ हिडमन्नासुकमा, छत्तीसगढ़–दक्षिण सबजोनल ब्यूरो सैनिक प्रभारी–

नक्सली संगठन में नेतृत्व का संकट

सूत्रों का कहना है कि नक्सली संगठन का शीर्षस्थ नेता नंबाला केशव राव उर्फ बसव राजू मारे जाने के बाद संभावित उत्तराधिकारियों की तलाश तेज कर दी है। इस दाैड़ में उक्त 15 कुख्यात नक्सली शामिल हैं । वहीं पिछले कुछ समय से नक्सल संगठन में काफी अंतर्कलह की खबरें हैं । ऐसे में संगठन के महासचिव पद पर आम सहमति कायम करना बड़ी चुनौती है। वर्तमान में जो केंद्रीय नेतृत्व है उनकी औसत उम्र भी 62 वर्ष बताई जाती है।

आलम यह है कि बारह सदस्यों वाली नक्सलियों की शीर्ष संस्था पोलित ब्यूरो में पांच सदस्य बचे थे, लेकिन बसव राजू की मौत के बाद अब यह संख्या घटकर चार रह गई है। इसी तरह 24 सदस्यीय केंद्रीय कमेटी में अब मात्र 11 सदस्य ही बचे हैं। नक्सली संगठन में नेतृत्व का संकट विगत 5 वर्षाें से देखा जा रहा है, जब नक्सलियों की सेंट्रल कमेटी का सचिव तेलंगाना के वारंगल निवासी 2.40 करोड़ के इनामी रमन्ना उर्फ रावलु श्रीनिवास की माैत बस्तर में ही हार्ट अटैक से हो गई थी। इसके बाद से यह कलह खुलकर सामने आ गई थी । इस पद पर नई नियुक्ति की घोषणा लंबे समय तक नहीं की गई थी, बाद में गुडसा उसेंडी को प्रभारी सेंट्रल कमेटी का सचिव बना दिया गया।

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