25 वर्ष में 28000 पत्थरों पर उकेरा ‘राम’ नाम : मंदिर बनते ही छलके बिहारी लाल के आंसू, किसी तपस्वी से कम नहीं है जीवन
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25 वर्ष में 28000 पत्थरों पर उकेरा ‘राम’ नाम : मंदिर बनते ही छलके बिहारी लाल के आंसू, किसी तपस्वी से कम नहीं है जीवन

बिहारी लाल ने 25 वर्षों में 28,000 पत्थरों पर ‘राम’ लिखा, वह पुत्र सहित बिना छुट्टी लिए मंदिर निर्माण के कार्य में समर्पित रहे। उनकी कहानी सच्ची भक्ति और सेवा की मिसाल है....

Written byShivam DixitShivam Dixit
May 30, 2025, 11:12 pm IST
inभारत, हिमाचल प्रदेश
वीर हनुमान मंदिर और घेरे में पत्थरों पर राम नाम उकेरते बिहारी लाल | चित्र सौजन्य- दैनिक जागरण

वीर हनुमान मंदिर और घेरे में पत्थरों पर राम नाम उकेरते बिहारी लाल | चित्र सौजन्य- दैनिक जागरण

धूप, धूल और हथौड़ी की आवाजें—यही बन गई बिहारी लाल की दुनिया। 25 साल तक एक ही निष्ठा और तपस्या के साथ काम करते रहे, बिना किसी शिकायत और बिना किसी छुट्टी के। हर सुबह उनका एक ही संकल्प होता था—”आज एक और पत्थर पर ‘राम’ लिखना है।” हिमाचल के मंडी जिले के गोहर उपमंडल की गवाड़ पंचायत निवासी 53 वर्षीय बिहारी लाल का जीवन भी किसी तपस्वी से कम नहीं है।

दैनिक जागरण में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार- उनकी इस आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत 17 सितंबर 2000 को हुई, जब सुंदरनगर उपमंडल की महादेव पंचायत में धनोटू-बग्गी मार्ग पर स्थित वीर हनुमान मंदिर के निर्माण कार्य के दौरान उन्हें एक पत्थर पर ‘राम’ नाम तराशने का काम सौंपा गया।

तब बिहारी लाल को प्रतिदिन 150 रुपये मजदूरी मिलती थी, जो अब 1000 रुपये हो गई थी। लेकिन इस बढ़ी हुई मजदूरी से अधिक उन्हें संतोष उस सेवा से था, जो वह प्रभु राम के नाम को पत्थरों पर उकेरकर कर रहे थे।

राम नाम के शिल्पकार

बुधवार को जब मंदिर के अंतिम गुंबद को स्थापित किया गया, तो बिहारी लाल का काम समाप्त हुआ। लेकिन वह सिर्फ एक राजमिस्त्री नहीं रहे। अब वे राम नाम के शिल्पकार बन चुके थे। बीते वर्षों में उन्होंने 28,000 पत्थरों पर ‘राम’ का नाम उकेरा। हर पत्थर को उन्होंने विशेष श्रद्धा से तराशा और मंदिर में उसका स्थान सुनिश्चित किया। मंदिर का निर्माण शंकराचार्य शैली में किया जा रहा था, और इसके लिए पत्थर सुंदरनगर के कपाही पंचायत से मंगवाए जाते थे।

पुत्र ललित भी बना सहभागी

समय के साथ बिहारी लाल का यह संकल्प अकेले का नहीं रहा। उनके बेटे ललित कुमार ने भी पिता के साथ छेनी-हथौड़ी उठाकर इस यज्ञ में भागीदारी निभाई। बुधवार को जब मंदिर के ऊपर अंतिम गुंबद रखा गया, तो चारों ओर “जय श्रीराम” के उद्घोष गूंज उठे। श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच एक कोना ऐसा भी था, जहां चुपचाप बैठा बिहारी लाल अपनी आंखें पोंछ रहे थे। उनका गला भर आया था। उन्होंने कहा—”25 साल तक दिन-रात इन पत्थरों से बात की है। हर पत्थर पर राम लिखा, अब ये पत्थर मेरी आत्मा में भी बस चुके हैं।”

भक्ति का जीवंत रूप

श्रीहनुमान मंदिर सेवा समिति के प्रधान पदम सिंह ठाकुर ने भावुक होकर कहा- “बिहारी लाल जैसे भक्त ही असली मंदिर बनाते हैं। यदि इन पत्थरों में राम हैं, तो उनमें बिहारी लाल की आत्मा भी बसती है।” अब जब वह मंदिर निर्माण से विदा ले रहे हैं, उनके हाथ भले थक चुके हों, लेकिन उनकी आंखों में वही चमक है, मानो कल फिर कोई नया पत्थर आएगा और उस पर ‘राम’ लिखा जाएगा।

पेड़ के नीचे से शुरू हुआ था सफर

कहा जाता है कि एक समय एक साधु यहां पहुंचे थे और एक पेड़ के नीचे हनुमान जी की मूर्ति स्थापित की थी। साधु ने वहीं एक छोटे मंदिर का निर्माण भी करवाया। वर्षों बाद श्रीराम हनुमान मंदिर सेवा समिति ने इस स्थान के जीर्णोद्धार का संकल्प लिया और उसे भव्य रूप प्रदान किया।

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Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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