पाकिस्तान के साथ युद्धविराम: भारत के लिए सैन्य और नैतिक जीत
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पाकिस्तान के साथ युद्धविराम: भारत के लिए सैन्य और नैतिक जीत

पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशक (डीजीएमओ) ने 10 मई को दोपहर 3.30 बजे अपने भारतीय समकक्ष को फोन किया और दोनों सेनाएं 10 मई को शाम 5.00 बजे से युद्धविराम के लिए सहमत हुईं।

Written byलेफ्टिनेंट जनरल एम के दास,पीवीएसएम, बार टू एसएम, वीएसएम ( सेवानिवृत)लेफ्टिनेंट जनरल एम के दास,पीवीएसएम, बार टू एसएम, वीएसएम ( सेवानिवृत)
May 11, 2025, 11:04 am IST
inविश्लेषण

भारत ने 10 मई दोपहर को पाकिस्तान के संघर्ष विराम (Ceasefire) प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। पाकिस्तान के सैन्य संचालन महानिदेशक (डीजीएमओ) ने 10 मई को दोपहर 3.30 बजे अपने भारतीय समकक्ष को फोन किया और दोनों सेनाएं 10 मई को शाम 5.00 बजे से युद्धविराम के लिए सहमत हुईं। इस प्रकार, 22 अप्रैल को पहलगाम में प्रायोजित आतंकी हमले के माध्यम से पाकिस्तान द्वारा शुरू किया गया एक खूनी संघर्ष अचानक लेकिन एक न्यायसंगत अंत पर आ गया है। केवल यह तथ्य कि भारतीय सशस्त्र बल चार दिनों से भी कम समय में पाकिस्तानी सेना को अपने घुटनों पर ला सकते हैं, हमारे सैन्य बलों के लिए सबसे उत्कृष्ट जीत है। जैसा कि व्यापक रूप से पता था, पाकिस्तान के पास चार दिनों से अधिक समय तक भारत के साथ पारंपरिक युद्ध लड़ने के लिए गोला-बारूद और रसद नहीं था।

 

भारत के लिए नैतिक जीत

पाकिस्तान के साथ संघर्ष विराम भी भारत के लिए एक नैतिक जीत है। 22 अप्रैल के नृशंस आतंकी हमले के बाद भारत ने जबरदस्त रणनीतिक धैर्य का प्रदर्शन किया। सभ्यतागत मान्यताओं वाले एक राष्ट्र के रूप में, भारत ने आंतरिक स्थिरता और राष्ट्रीय एकजुटता सुनिश्चित की। पूरे देश, विशेष रूप से जम्मू-कश्मीर के लोगों ने एकजुट होकर विरोध किया और पाकिस्तान को भारत में आतंकवाद के प्रायोजक के रूप में दंडित करने के लिए अद्वितीय एकता प्रदर्शित की। भारत में भी कोई सांप्रदायिक प्रतिक्रिया नहीं हुई, जैसा कि पाकिस्तान ने अनुमान लगाया था और इस प्रकार भारत को आंतरिक रूप से अस्थिर करने का उसका प्रारंभिक उद्देश्य बुरी तरह विफल रहा। भारतीय राजनीतिक दलों ने भी राष्ट्रीय हित में आवश्यक कार्रवाई करने के लिए मोदी सरकार का समर्थन किया। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच ऐसा सुंदर कार्यात्मक संबंध हमारे लोकतंत्र की एक और पहचान है।

 

प्रधानमंत्री मोदी ने सुझाया ऑपरेशन सिंदूर नाम

भारत ने 22 अप्रैल के पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेते हुए 6/7 मई की आधी रात के बाद पाकिस्तान में नौ आतंकी ठिकानों पर सटीक मिसाइलों और ड्रोन से हवाई हमले किए। ऑपरेशन को उपयुक्त रूप से ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया था, जो खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद सुझाया था। 22 अप्रैल को पहलगाम में 26 पर्यटकों, ज्यादातर हिंदुओं की नृशंस और चयनात्मक हत्या के बाद, जवाबी कार्रवाई हमारी बहनों के लिए एक उचित प्रतिशोध थी, जिन्होंने बर्बर आतंकी हमले में अपने सिंदूर को खो दिया था। भारत ने आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने के अपने संकल्प को केवल पाकिस्तान के भीतर ज्ञात आतंकी स्थलों पर केंद्रित, नपे-तुले और गैर-उत्तेजक जवाबी कार्रवाई के साथ प्रदर्शित किया । अपने पहले हमले में भारत ने पाकिस्तान में किसी भी सैन्य सुविधाओं और नागरिक ठिकानों को निशाना नहीं बनाकर काफी संयम का प्रदर्शन किया ।

 

भारत की असाधारण सैन्य जीत

7 मई के बाद से, भारत ने केवल पाकिस्तानी आतंकी पैड और आतंक का समर्थन करने वाले सैन्य सुविधाओं को लक्षित करने पर ध्यान केंद्रित किया। भारत ने केवल ड्रोन और मिसाइलों के माध्यम से, भारत में सैन्य और नागरिक लक्ष्यों पर पाकिस्तानी दुस्साहस का अनुपात में जवाब दिया। पाकिस्तान के गंभीर उकसावे के बावजूद भारत ने गरिमा के साथ काम किया और फिर भी पाकिस्तान में नागरिक आबादी को नुकसान नहीं पहुंचाया। पाकिस्तान की ओर से तनाव बढ़ने के आधार पर भारत ने 9/10 मई की रात को पाकिस्तान के रणनीतिक हवाई अड्डों, रडार सुविधाओं और सैन्य मुख्यालयों को क्षतिग्रस्त कर दिया । इसने अंततः पाकिस्तानी सेना की कमर तोड़ दी और उन्हें मजबूर होकर भारत के साथ संघर्ष विराम की मांग करनी पड़ी। इस प्रकार, भारत ने पाकिस्तान पर एक असाधारण सैन्य जीत हासिल की।

 

प्रधानमंत्री मोदी ने सैन्य बलों को पूरी छूट दी

पाकिस्तान के साथ संघर्ष विराम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की एक बड़ी राजनीतिक जीत है। श्री मोदी ने पहलगाम आतंकी हमले का बदला लेने और उसके बाद के हालात पर भारतीय सैन्य बलों को पूरी छूट  दी । प्रधानमंत्री मोदी आतंकवाद के दोषियों को अकल्पनीय सजा देने के राष्ट्र के अपने वादे पर खरे उतरे। पाकिस्तान के खिलाफ आर्थिक प्रतिबंधों ने समय पर अपना प्रभाव डाला, जिससे पाकिस्तान की राजकोषीय स्थिति और खराब हो गई। अमेरिका ने पाकिस्तान पर आईएमएफ का 1.0 अरब डॉलर का कर्ज सशर्त रखा था।

 

अब आगे क्या होगा

कूटनीतिक रूप से, भारत पाकिस्तान को अलग-थलग करने में सक्षम रहा और उसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से भी झाड पड़ी। अब तक, केवल सैन्य संघर्ष विराम को स्वीकार किया गया है। भारत और पाकिस्तान बाद में आर्थिक और कूटनीतिक मुद्दों के बारे में आगे की डी-एस्केलेशन पर चर्चा करेंगे।

 

भारत ने आतंक के खिलाफ नई रणनीति बनाई

भारत ने अपनी धरती पर भविष्य में किसी भी आतंकवादी गतिविधि के प्रति अपनी प्रतिक्रिया में एक बड़े बदलाव का संकेत 10 मई को संघर्ष विराम से पहले ही दे दिया। भारत ने आतंकवाद को कतई बर्दाश्त नहीं करने की अपनी नीति में संशोधन किया है। भारत ने अब स्पष्ट किया है कि राज्येतर तत्वों (Non State Actors) द्वारा आतंकवाद के किसी भी कृत्य को प्रायोजक देश की ओर से युद्ध की कार्रवाई माना जाएगा। ऐसा लगता है कि अमेरिका आतंकवाद के खिलाफ भारत की नई नीति से सहमत है। इसके बाद ही भारत ने पाकिस्तान के सीजफायर प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। इसलिए गेंद भारत के साथ संघर्ष विराम समझौते का सम्मान करने के लिए अब पाकिस्तान के पाले में है। लेकिन आतंकवाद के प्रति भारत की नीति में आमूल बदलाव के लिए अल्प सूचना और बहुत कम नोटिस पर युद्ध छेड़ने की क्षमता  हासिल करने के लिए बड़े रक्षा सुधारों की आवश्यकता होगी।

 

संघर्ष विराम ने चीन को भी आईना दिखाया

संघर्ष विराम ने चीन को भी  आईना दिखाया है जो भारत और पाकिस्तान के बीच इस तनाव में अपने हितों को तलाश रहा था। भारत ने चीन को शांत रखने के लिए अपने आर्थिक प्रभाव का इस्तेमाल किया है। चीन को भी भारत की सैन्य शक्ति का एहसास हो गया होगा। भारतीय सैन्य बलों ने प्रौद्योगिकी और सैन्य रणनीति में पाकिस्तान पर उल्लेखनीय श्रेष्ठता का प्रदर्शन किया है। नपी-तुली प्रतिक्रिया के साथ भी, भारत पाकिस्तान की युद्ध छेड़ने की क्षमता को बेअसर करने में सक्षम रहा। चीन ने इस बात पर ध्यान दिया होगा। हमारी सैन्य श्रेष्ठता बांग्लादेश जैसे कृतघ्न पड़ोसी के लिए भी एक संदेश होगी। कुल मिलाकर, पाकिस्तान के साथ इस संघर्ष के बाद भारत ग्लोबल साउथ में एक प्रमुख सैन्य शक्ति के रूप में उभरा है।

 

जीत का श्रेय देशभक्त भारतीयों को

इस जीत का बहुत श्रेय देशभक्त भारतीयों को जाना चाहिए, जिन्होंने युद्ध की अनिश्चितताओं का सामना करने के लिए अपने आप को तैयार किया। नागरिक सुरक्षा अभ्यासों का पूरे भारत में कड़ाई से पालन और अभ्यास हुआ। सीमावर्ती राज्यों के लोगों ने सशस्त्र बलों का समर्थन करने के लिए अपनी एकता और संकल्प का प्रदर्शन किया। स्थानीय नागरिक प्रशासन की सहायता के लिए बड़ी संख्या में स्वयंसेवी संगठन और सेल्फ हेल्प  समूह आगे आए। इसलिए, यह नया भारत है जो हर राष्ट्रीय संकट में एकजुटता से खड़ा नजर आता है। लेकिन पाकिस्तान पर आंख मूंदकर भरोसा करना एक गलती होगी और भारत को निकट भविष्य में अपनी चौकसी बनाए रखनी होगी। अब भारतीय सैन्य बलों की वीरता को सलाम करने और पाकिस्तान पर भारत की सैन्य और नैतिक जीत का जश्न मनाने का समय है। जय भारत!

 

 

Topics: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदीभारतीय सेनापाकिस्तानी सेनापहलगाम अटैकऑपरेशन सिंदूरभारत पाकिस्तान संघर्ष विराम
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