जिन्ना का इस्लामी देश भारत के खौफ से थर्राया हुआ है। पीओजेके में चल रहीं अपनी आतंक की फैक्ट्रियों को उसने खाली करा लिया है, वहां मौजूद जिहादियों को उसने अन्य स्थानों पर भेज कर छुपा दिया है। इसी तरह पाकिस्तान सरकार के फरमान पर स्थानीय प्रशासन एलओसी के आसपास से मजहबी मदरसों को भी खाली करा रही है। ताजा जानकारी के अनुसार करीब एक हजार मदरसों को खाली कराकर दस दिन तक बंद रखने का फरमान सुनाया गया है। इतना ही नहीं, सीमा के ठीक सटे हुए मदरसों को तो अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया गया है। इस्लामाबाद को डर है कि भारत कहीं किसी प्रकार की सर्जिकल सट्राइक न कर दे, और अगर ऐसा किया तो उसकी सौगात यानी ये जिहादी और मदरसे में तैयार हो रहे नौसिखिए जिहादी कहीं हलाक न हो जाएं। उसकी ‘फैक्ट्रियों’ बस यही तो उत्पादन होता है सो उसे इस्लामी देश सहेज रहा है।
पीओजेके की पाकिस्तान की कठपुतली सरकार ने करीब तीन दिन पहले से उस क्षेत्र में यह कार्रवाई चला रखी है। ‘मजहबी तालीम’ दे रहे इन मदरसों को दस दिन बंद रखने को कहा गया है। स्थानीय अधिकारियों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए जिहादी हमले के बाद उन्हें लगता है कि भारत की फौज उनकी कमर तोड़ने के लिए सैन्य हमला कर सकती है। और ये मदरसे और जिहाद की फैक्ट्रियां उसके निशाने पर होंगी।
इधर इस्लामाबाद का यह भी दावा है कि ऐसी “भरोसे लायक खुफिया जानकारी” उसके हाथ लगी है जो इशारा करती है कि भारत जल्दी कोई बड़ी सैन्य कार्रवाई कर सकता है। उधर नई दिल्ली का आरोप है कि 22 अप्रैल को हुए उस हमले में 26 हिन्दू मारे गए थे, और उसे अंजाम देने में पाकिस्तान स्थित आतंकवादी संगठन शामिल थे।

रॉयटर्स की खबर है कि पीओजेके के मजहबी मामलों के विभागीय निदेशक हाफिज नजीर अहमद ने इस बात की पुष्टि की है कि प्रशासन के अधिकारियों को भारत की कठोर कार्रवाई की चिंता सता रही है। सुरक्षा अधिकारियों को डर है कि ‘भारतीय सेना मदरसों पर हमला कर सकती है और उन्हें आतंकवादी प्रशिक्षण केंद्र के रूप में प्रस्तुत कर सकती है’। यानी फर्जी और झूठे दुष्प्रचार का काम अधिकारियों के हवाले से भी इस्लामबाद करा रहा है।
इतना ही नहीं, गत 30 अप्रैल को एक सरकारी अधिसूचना जारी की गई थी कि ‘गर्मी ज्यादा होने की वजह से मदरसे बंद किए जा रहे हैं’। हालांकि, अहमद ने यह भी साफ कहा कि यह फैसला अफरातफरी से बचने के लिए लिया गया था। अहमद का कहना था कि ‘हम इस वक्त दो तरह की गर्मी को झेल रहे हैं, एक मौसम से और दूसरी (भारतीय प्रधानमंत्री) मोदी से।’
इसमें संदेह नहीं है कि भारत के आक्रोश के अपने पूर्व अनुभवों को देखते हुए पाकिस्तान की सत्ता और फौजी अधिकारी घबराए हुए हैं। लेकिन हैरानी की बात है कि उन्हें जनता की उतनी चिंता नहीं दिखती जितनी पीओजेके में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पास आतंकी शिविरों में पल रहे प्रशिक्षु जिहादियों की है। पीओजेके में एक बैठक हुई थी जिसमें सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि ‘मासूम बच्चों को जोखिम में नहीं डाला जाए।’ प्रशासन के आंकड़ों के अनुसार, इस क्षेत्र में 445 पंजीकृत मदरसे हैं, जिनमें 26,000 से अधिक ‘छात्र’ तालीम ले रहे हैं। पीओजेके के ‘राष्ट्रपति कार्यालय’ का भी बयान आया कि वर्तमान सुरक्षा स्थिति को देखते हुए सावधानी बरतते हुए मदरसों बंद करने का फैसला लिया गया है।
बहरहाल, पाकिस्तानी कब्जे वाले जम्मू कश्मीर में हजार से ज्यादा मदरसों पर फिलहाल ताले लटक रहे हैं। यहां के नागरिकों को सैन्य तनाव को देखते हुए अंडरग्राउंड बंकर तैयार करने को कह दिया गया है। सैकड़ों मदरसों में 10 दिन की ‘छुट्टी’ घोषित कर दी गई है।

















