पाकिस्तान में एक आतंकवाद विरोधी अदालत ने एक ईसाई व्यक्ति को बेअदबी के आरोप में मौत की सजा सुनाई है। लाहौर की इस अदालत ने परवेज मसीह को पाकिस्तानी पेनल कोड की धारा 295 सी के अंतर्गत मौत की सजा सुनाई है। जज इकबाल शेख ने जहां परवेज मसीह को मौत की सजा सुनाई है तो वहीं दो अन्य आरोपियों दाउद विलियम्स और शाहिद आफताब को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
अदालत ने परवेज मसीह पर दस साल की जेल और कुल 3 मिलियन पाकिस्तानी रुपयों का दंड भी पाकिस्तानी पेनल कोड की धारा 295-ए के अंतर्गत दिया है।
परवेज पर आरोप था कि उसने कुरआन का अपमान किया है और वर्ष 2023 में इसी मामले को लेकर पंजाब के फैसलाबाद जिले में जारान्वाला के दो ईसाई भाइयों अमीर मसीह और उमैर रॉकी मसीह के खिलाफ बेअदबी के आरोप लगे थे और इसी के चलते मुस्लिमों की एक भीड़ ने ईसाई बस्ती पर हमला कर दिया था और लगभग 20 चर्चों और ईसाइयों के 80 से अधिक घरों को जला दिया गया था।
कुरआन के फटे और जले पन्ने पाए जाने पर यह हिंसा भडकी थी और इन दोनों ईसाई भाइयों पर आरोप आया था। इन दोनों को गिरफ्तार किया गया था। मगर जांच में पाया गया कि दोनों ही भाई निर्दोष हैं, तो उन्हें छोड़ दिया गया।
बाद में पुलिस ने परवेज मसीह को उसके दो साथियों के साथ गिरफ्तार किया था। पुलिस का कहना था कि परवेज ने अपने दो साथियों के साथ मिलकर उमैर और अमीर मसीह को फंसाने के लिए उनके घर के बाहर कुरआन के पन्ने फाड़ कर फेंक दिए थे।
जज ने अपने फैसले में कहा कि मुलजिम परवेज मसीह ने कुरआन के पन्ने दोनों ईसाई भाइयों के घर के बाहर फेंकड़े, जिससे कि वह अपना पुराना मामला निबटा सके। मसीह ने यह सब अदालत में क़ुबूल किया है कि उसने उन दोनों भाइयों को फंसाने के लिए ही यह काम किया था।
परवेज मसीह के वकील अकमल भट्टी ने कहा कि वे लोग इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील करेंगे।
पाकिस्तान में बेअदबी के क़ानून को लेकर रह-रहकर सवाल उठते रहते हैं। ऐसे बहुत मामले सामने आए हैं, जिनमें यह भी पाया गया कि लोगों ने पुराने मामलों का बदला लेने के लिए या फिर अपमान का बदला लेने के लिए इस कानून का दुरूपयोग किया।
वहीं यह भी हैरान करने वाला है कि ईसाइयों के चर्च और ईसाइयों के घर जलाने वाले लोगों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया गया है। लगभग 5 हजार की भीड़ में से केवल लगभग 380 लोगों की गिरफ्तारी हुई थी, जबकि शेष अभी क़ानून की पहुँच से बाहर हैं। गिरफ्तार किये गए लोगों में से भी 228 लोग जमानत पर बाहर हैं। 77 लोगों से आरोप हटा लिए गए हैं।
बेअदबी के आरोप में कई लोगों की लिंचिंग हो चुकी है। श्रीलंका के प्रियंता कुमार की लिंचिंग तो लोगों की स्मृति में अभी तक है। वह दृश्य लोगों की स्मृति में है कि कैसे दस वर्ष से अधिक पाकिस्तान में काम करने वाले प्रियता कुमार को सियालकोट में भीड़ ने घेरकर मार डाला था। और उनके शव को आग लगा दी थी।
वह वीडियो अभी तक सोशल मीडिया पर है, जिसमें वे सैकड़ों की भीड़ से बचने का प्रयास कर रहे हैं। उनपर भी यही आरोप था कि उन्होंने कुछ आयतों वाला पोस्टर हटा दिया है, जो कि बेअदबी है और फैक्ट्री के सुपरवाईजर ने लोगों को भडकाया था कि कुमारा ने पोस्टर फाड़ा है और यह बेअदबी है।















