पाकिस्तान में बेअदबी के मामले एक बार फिर से चर्चा में: बेअदबी या फिर निजी दुश्मनी?
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पाकिस्तान में बेअदबी के मामले एक बार फिर से चर्चा में: बेअदबी या फिर निजी दुश्मनी?

2025 HRW रिपोर्ट में खुलासा- पाकिस्तान के बेअदबी कानून से कैसे ईसाई-अहमदी समुदायों की जमीनें हड़पी जा रही हैं।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by कुलदीप सिंह
Mar 22, 2026, 02:40 pm IST
inविश्व, विश्लेषण
Pakistan Blashphemy laws

पाकिस्तान के कराची में हुए प्रदर्शनों की तस्वीर

पाकिस्तान में इस्लाम की बेअदबी को लेकर कानून बहुत सख्त हैं। इसे लेकर लगातार ही कई घटनाएं सामने आती रहती हैं। बेअदबी का आरोप लगाकर निर्दोषों को फँसाया जा रहा है। इस कानून के आलोचकों का कहना है कि यह कानून जमीन हथियाने के लिए भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

वर्ष 2025 में “A Conspiracy to Grab the Land: Exploiting Pakistan’s Blasphemy Laws for Blackmail and Profit” नामक रिपोर्ट में इस बात का प्रमाणों के साथ खुलासा किया गया था कि कैसे इस कानून का दुरुपयोग किया जा रहा है। इस रिपोर्ट में अल्पसंख्यकों के साथ किये जा रहे सबसे बड़े अत्याचार के विषय में था कि कैसे ईसाई और अहमदी समुदाय के खिलाफ इस्तेमाल किया जाता है और कैसे अहमदी और ईसाई लोग अपने कुनबे के साथ इस कारण से खानाबदोश हो जाते हैं।

इसमें लिखा था कि चूंकि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय के पास जमीन आदि तो होती नहीं है और वे अक्सर जमीन पर बिना किसी अधिकार के ही रहते हैं और जब किसी भी घटना के चलते वे अपनी जमीन आदि छोड़कर जाते हैं, तो उस जमीन पर आसानी से कोई भी कब्जा कर लेता है।

धार्मिक अल्पसंख्यकों को प्रताड़ित करने का हथियार

इसमें यह भी लिखा था कि कैसे धार्मिक अल्पसंख्यकों के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नुकसान पहुंचाने के लिए इस बेअदबी के कानून का दुरुपयोग किया जाता है। और जो हिंसा होती है उससे भी काफी लोग डर जाते हैं। यह भय उन्हें अपने परिवार को लेकर होता है। इसमें लिखा था कि “आपराधिक न्याय प्रणाली में गहरे तक बैठी पक्षपात की भावना के कारण, बेअदबी के आरोपी लोगों के साथ अक्सर अन्याय होता है। अधिकारी, बेअदबी के नाम पर हिंसा करने वालों को शायद ही कभी जवाबदेह ठहराते हैं; वहीं दूसरी ओर, भेदभावपूर्ण और अस्पष्ट कानूनों के तहत आरोपी बनाए गए लोग—जिनके खिलाफ अक्सर कोई सबूत भी नहीं होता—लंबी अवधि तक मुकदमे से पहले की हिरासत, उचित कानूनी प्रक्रिया के अभाव और अनुचित मुकदमों का सामना करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें कई वर्षों की जेल हो सकती है।“

इसे भी पढ़ें: पाकिस्तानी अब्दुल बासित खान भारत पर हमले की धमकी दे रहा, भूल गया ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की मार

जफर भट्टी को कैसे फंसाया

यह कई मामलों में देखा भी गया। वर्ष 2025 में ज़फ़र भट्टी नामक ईसाई आदमी का मामला सामने आया था, जिस पर बेअदबी का आरोप लगाया गया था और जेल भेज दिया गया था। 62 वर्षीय भट्टी एक पादरी थे और उन्होंने जीसस वर्ल्ड मिशन चर्च की स्थापना की थी। उनपर आरोप था कि उन्होंने टेक्स्ट मेसेजेस के माध्यम से इस्लाम के पैगंबर की बेअदबी की थी।

उन्हें वर्ष 2012 में गिरफ्तार किया गया था और 2017 में उन्हें दोषी ठहराया गया था और उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, जिसे वर्ष 2022 में मौत की सजा में बदल दिया गया था। हालांकि बाद में यह साबित हुआ कि यह पूरा मामला केवल पुष्टिकारी साक्ष्यों के आधार पर था, क्योंकि मुख्य साक्ष्य को खारिज कर दिया गया था। और वर्ष 2025 में जब उन्हें रिहा किया गया तो उसके दो ही दिन बाद उनकी मौत हो गई थी। वे दिल के और डायबिटीज के मरीज थे और उन्हें जेल में रहने के दौरान गैंग्रीन भी हो गया था।

इस रिपोर्ट में आगे था कि  भीड़ द्वारा किए जाने वाले हमलों के मामलों में, पुलिस अक्सर उन लोगों की सुरक्षा के लिए कोई कार्रवाई नहीं करती जिन्हें निशाना बनाया गया हो; और जो पुलिसकर्मी ऐसा करने का प्रयास करते हैं, उन्हें स्वयं हिंसा की धमकियों का सामना करना पड़ सकता है। इसके परिणामस्वरूप, भीड़ द्वारा की गई हिंसा के वे अपराधी, जिन्हें राजनेताओं या धार्मिक नेताओं का संरक्षण और सुरक्षा प्राप्त होती है, या तो गिरफ्तारी से बच जाते हैं या फिर बरी हो जाते हैं।

क्यों है यह कानून फिर से चर्चा में?

बेअदबी का मामला इसलिए चर्चा में है क्योंकि दो मामले हाल ही में आए हैं। एक मामला है लाहौर का, जहां पर एक 62 वर्षीय ईसाई आदमी को निराधार बेअदबी के आरोप से इसलिए मुक्त कर दिया, क्योंकि शिकायतकर्ता ने कहा कि उसने उसे “माफ” कर दिया है और अब वह मामले को वापस लेना चाहता है। शौकत जावेद नामक आदमी पर इस्लाम में पाक माने जाने वाले लोगों के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप लगे थे। जावेद की वकील अरूज़ अयूब ने कहा था कि मोहम्मद मुश्ताक अहमद ने अटोक जिले में पुलिस में 29 मई 2024 को यह रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि शौकत ने इस्लाम के पैगंबर मुहम्मद के साथियों के खिलाफ अपशब्दों का प्रयोग किया है और उसके बाद जावेद को हिरासत में ले लिया गया था। Christianpost के अनुसार जावेद पर शिकायतकर्ता ने पहले नशे की तस्करी के आरोप लगाए थे और जब वह इसमें सफल नहीं हुआ तो उसने बाद में बेअदबी के आरोप लगाए।

हालांकि शिकायतकर्ता तारीखों पर नहीं आया और बाद में उसने कहा कि उसने जावेद को माफ कर दिया है। कुल मिलाकर यह पड़ोस का निजी दुश्मनी का मामला था, जिसे बेअदबी के मामले में बदल दिया गया था। ऐसा ही एक और मामला है, जिसमें इशतियाक सलीम नामक एक ईसाई सफाई कर्मी पर बेअदबी के आरोप लगे हैं और जेल में वह बंद है। उस पर वर्ष 2024 में यह आरोप थे कि उसने सोशल मीडिया पर ऐसा कंटेन्ट पोस्ट किया है, जो इस्लाम के खिलाफ है। अब उस पर अपने ही मुल्क के बेअदबी कानूनों के अंतर्गत कई आरोप लगे हैं और उसे मौत तक की सजा सुनाई जा सकती है। उसकी जमानत याचिकाएं न केवल निचली अदालतों बल्कि सुप्रीम कोर्ट तक से खारिज हो चुकी हैं।

हर पंथ के लोग होते हैं इसके शिकार

ऐसा नहीं है कि केवल ईसाई या अहमदी ही इस बेअदबी के कानून के शिकार होते हैं। लाहौर आधारित सेंटर फॉर सोशल जस्टिस के अनुसार आंकड़ों से पता चलता है कि 1987 से 2021 के बीच पाकिस्तान में बेअदबी के 1,949 मामले दर्ज किए गए। इस समूह ने बताया कि इस दौरान जिन लोगों पर आरोप लगे, उनमें 928 मुस्लिम, 643 अहमदी, 281 ईसाई और 42 हिंदू शामिल थे; इनके अलावा 55 ऐसे लोग भी थे जिनके धर्म का उल्लेख नहीं किया गया था।

Topics: land grabbing blasphemyपाकिस्तान बेअदबी कानूनblasphemy laws Pakistanजमीन हड़पनाअल्पसंख्यक अत्याचारHRW रिपोर्ट 2025Zafar Bhatti caseईसाई प्रताड़नाअहमदी समुदाय
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