बलात्कारी पादरी बजिंदर सिंह उर्फ सवि जिस रास्ते पर चला वह उसकी गलत संगत का असर है। बजिंदर का उपनाम सवि है और वह यमुनानगर की विकास नगर कालोनी का निवासी है। उसका पिता जगदीश सिंह हरियाणा रोडवेज से सेवानिवृत है और भाई की फोटोग्राफर की दुकान है।
सवि का बचपन के दोस्त सुबोध त्यागी बताते हैं कि अच्छा खासा जीवन चलने के बावजूद गलत संगत में पड़ कर उसने अपना सबकुछ उजाड़ लिया। बीए करने के बाद जब वह काम की तलाश में था और काम नहीं मिला तो वह शराब पीने लगा। एक बार उसने शराब के नशे में शहर के नारंग चिकन सेंटर के मालिक इंद्रजीत नारंग पर गोली चला दी और उसके खिलाफ केस दर्ज हुआ। वह जेल भी रहा और जेल में ही वह किसी पास्टर के चक्कर में फंस गया और अपना जीवन बर्बाद कर बैठा।
गोली वाले केस में उसका राजीनामा हो गया और वह जेल से बाहर आ कर चर्च के कामों में लग गया। आकूत धन व मान सम्मान देख वह चौंधिया गया और फिर से अपराध कर बैठा। उसके दोस्त सुबाध त्यागी बताते हैं कि जब वह अपने धर्म का नहीं हुआ तो और किसी का क्या होगा? अब जेल में गिड़गिड़ाने से क्या होता है?

















