कमल किशोर गोयनका: वो जो हममें तुममें करार था...
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होम श्रद्धांजलि

वो जो हममें तुममें करार था…

कमल किशोर गोयनका जी को श्रद्धांजलि : गोयनका जी के प्रेमचंद, भारतीयता के प्रेमचंद थे, हिन्दू प्रेमचंद थे। गोयनका जी के ही शब्दों को उधार लें तो हिन्दू होकर ही प्रेमचंद हुआ जा सकता है।

Apr 2, 2025, 09:35 am IST
inश्रद्धांजलि
कमल किशोर गोयनका (फाइल फोटो)

कमल किशोर गोयनका (फाइल फोटो)

सुबह सूचना मिली कि कमल किशोर गोयनका जी नहीं रहे। गोयनका जी कुछ समय से अस्वस्थ थे। उम्र के 85 वर्ष पार कर चुके थे। आयुजनित शारीरिक अस्वस्थता स्वभाविक ही है। मित्र हितेश जी का फ़ोन आया की गोयनका जी पर लिखना है तो सोचा कहां से शुरू करू? एक वर्ष कौंधा 1992 ई.। वर्तमान तेलंगाना और तब के आंध्र प्रदेश में अखिल भारतीय साहित्य परिषद् का राष्ट्रीय अधिवेशन था। दिल्ली से, ट्रेन से, मैं, डॉ.सत्यपाल जी चुघ, जीत सिंह जीत, आनंद आदीश, कमल किशोर गोयनका सभी साथ चले। ट्रेन की यात्रा थी, रास्ते में सह-यात्री जुड़ते गए, किन्तु दिल्ली से जो विषय शुरू हुआ वह नहीं बदला।

डॉ. सत्यपाल जी चुघ ने भी हिंदी उपन्यासों पर काम किया था। कमल किशोर गोयनका जी ने भी प्रेमचंद के अध्ययन से शुरुवात की थी। पूरी यात्रा में गोयनका जी प्रेमचंद को वामपंथी बनाने के विश्वविद्यालयीय तर्क का खंडन करते रहे। प्रमाण देते रहे। सत्यपाल जी चुघ भोले और भावुक थे। कमल किशोर गोयनका जी के तर्क शांत होते और सत्यपाल जी चुघ जी की प्रतिक्रिया भावुकता पूर्ण होती। बाद में ट्रेन यात्रा में देवेन्द्र दीपक जी भी जुड़े, पर ये पूरी यात्रा प्रेमचंद यात्रा में बदल गई।

कमल किशोर गोयनका जी का निवास दिल्ली के अशोक विहार क्षेत्र में था। इसी अशोक विहार में दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल महाविद्यालय से सेवानिवृति के उपरान्त डॉ. सत्यपाल जी चुघ का भी रहना हुआ। डॉ. सत्यपाल जी चुघ का घर हिंदी की राष्ट्रीय सांस्कृतिक वैचारिकी से जुड़े लोगों का स्थायी पता बना।  सन 1996 ई. में कमल किशोर गोयनका जी ही मुझे तब के जाकिर हुसैन स्नातकोत्तर सांध्य महाविद्यालय का रास्ता दिखाने वाले बने। कमल किशोरे गोयनका जी के वक्तित्व की कुछ फाँस थी। पहली फाँस थी विश्वविद्यालयीय उच्च शिक्षा में वामपंथी वर्चस्व। दूसरी फाँस थी बड़े साहित्यकारों को चयनित और पूर्वाग्रह प्रेरित उदाहरणों से वामपंथी सिद्ध करने का कुटिल बौधिक प्रयास। तीसरी फाँस थी तथाकथित धर्म निरपेक्ष पैकेजिंग में मुसलमान सांप्रदायिकता की प्रस्तुति। चौथी फाँस थी कि उनके अपने कहे जाने वाले लोग उन्हें समझते नहीं है।

कमल किशोर गोयनका जी के साथ तब के जाकिर हुसैन स्नातकोत्तर सांध्य महाविद्यालय में मुझे सहकर्मी होने का अवसर मिला। शाम का कॉलेज था। हम दोनों क्लास लेकर कमला मार्किट थाने के पास 901 नंबर बस पकड़ने जाते थे। वह मुझसे अक्सर कहते थे, चन्दन तुम इतना बोलते हो सतर्क होकर रहा करो। इन्हीं दिनों सन 1995-96 ई. में दयाप्रकाश सिन्हा जी से परिचय हुआ। दया प्रकाश जी भाजपा के राष्ट्रीय कार्यालय में बैठा करते थे। कॉलेज शुरू होने से पहले दया प्रकश जी का 11 अशोक रोड स्तिथ कमरा अपना नया अड्डा बना। वहां भी प्रेमचंद, विश्वविद्यालय आदि ही होता रहता था। हाँ, दयाप्रकाश जी के होने से उसमें नाटक भी जुड़ गया। प्रेमचंद के संबंध में कमल किशोर गोयनका जी के पास प्रमाणिक जानकारी थी। प्रेमचंद की कहानियों, लेख, व्यक्तिगत सूचनाओं का अज्ञात पक्ष गोयनका जी को उपलब्ध था। कमल किशोर गोयनका जी ने इस प्रामाणिक सूचना का यथासंभव उपयोग प्रेमचंद को वामपंथी छाया से निकालने के लिए किया। कालांतर में मौरिसिअस के भारतीय साहित्यकार अभिमन्यु अनत से मित्रता के उपरान्त प्रवासी भारतीय हिंदी लेखन में कमल किशोर गोयनका जी की रुचि बढ़ी।

गोयनका जी ने प्रवासी हिंदी लेखन की दिशा में प्रामाणिक कार्य भी किया। अपने पुत्र के पास, अमेरिका प्रवाश के दिनों में गांधी की पत्रकारिता पर कमल किशोर गोयनका जी ने प्रामाणिक पुस्तक भी लिखी। प्रवासी हिंदी साहित्य हो या मोहनदास करमचंद गांधी हों, कमल किशोर गोयनका जी का पहला प्यार प्रेमचंद ही थे। गोयनका जी के प्रेमचंद, भारतीयता के प्रेमचंद थे, हिन्दू प्रेमचंद थे। गोयनका जी के ही शब्दों को उधार लें तो हिन्दू होकर ही प्रेमचंद हुआ जा सकता है। होरी हिन्दू है। घिसु और माधव हिन्दू है। सूरदास हिन्दू है। कमल किशोर गोयनका जी की बौद्धिक कर्मठता हिंदी में वामपंथी बौधिक वर्चस्व का बौधिक प्रतिपक्ष रचने में सन्नद्ध रही। गोयनका जी को जानने वाले उनके बौद्धिक दाए को भारत भाव के रूप में स्स्वीकारें यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है। कमल किशोर जी मुझसे कहा भी करते थे कि चंदन तुम्हें बहुत काम करना है। आज उनके प्रयाण के उपरान्त उनके कहे गए वाक्य हमारा पाथेय हैं। इतना ही कह सकता हूँ कि हमें करार याद हैं – वो जो हममें तुममें करार था।

 

 

Topics: प्रेमचंद पर लेखप्रेमचंदकमल किशोर गोयनकासाहित्यकार गोयनका जीकमल किशोर गोयनका का निधनप्रेमचंद पर प्रमाणिक लेखनअशोक विहारकिरोड़ीमल कॉलेजजाकिर हुसैन कॉलेजदिल्ली विश्वविद्यालय
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