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मंदिर की तिजोरी, डाका सरकारी!

हिमाचल की कांग्रेस सरकार वित्तीय संकट में है। यहां तक कि सरकार जनहित की सरकारी योजनाओं को भी नहीं चला पा रही। अब सुक्खू सरकार ने मंदिरों से पैसा मांगा

Written byआर.पी. सिंहआर.पी. सिंह
Mar 27, 2025, 02:47 pm IST
in विश्लेषण, हिमाचल प्रदेश
मंदिरों से पैसा मांगने पर हिमाचल प्रदेश सरकार घिर गई। (प्रकोष्ठ में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू )

मंदिरों से पैसा मांगने पर हिमाचल प्रदेश सरकार घिर गई। (प्रकोष्ठ में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू )

मुफ्त की रेवड़ियां और दर्जनों लोकलुभावन वादे कर सत्ता पर काबिज हुई कांग्रेस सरकार की आर्थिक बदहाली आए दिन जगजाहिर हो रही है। कभी वेतन और पेंशन में देरी तो कभी सरकारी संपत्तियों की नीलामी की बात से हिमाचल सरकार की किरकिरी हो रही है। आलम यह है कि सरकार की नजर मंदिरों में आने वाले चढ़ावे पर है। उसने अपनी योजनाओं को पूरा करने के लिए मंदिरों से धन की व्यवस्था करने का आदेश जारी किया है।

गत दिनों प्रदेश सरकार के द्वारा चलाए जा रहे मंदिरों से सरकार की दो योजनाओं मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना और मुख्यमंत्री सुख शिक्षा योजना के लिए सहायता देने के लिए एक पत्र लिखा गया है। भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव की ओर 29 जनवरी, 2025 को जारी किए गए इस पत्र में कुल्लू और किन्नौर को छोड़कर शेष 10 जिलों के जिला उपायुक्तों को दो सरकारी योजनाओं में योगदान देने के लिए पैसा मांगा है।

36 मंदिरों पर है नियंत्रण

राज्य में 36 बड़े मंदिर सरकारी नियंत्रण में हैं। मंदिरों से पैसा लेने के मामले पर भाजपा ने जबरदस्त तरीके से सुक्खू सरकार को घेरा है। यह कोई पहला मामला नहीं है जब सरकार की आर्थिक तंगहाली के हालात जनता के सामने आए हों। इससे पहले भी सरकार के पास कई बार पर्याप्त बजट न होने की बात सामने आ चुकी है।

हिमाचल के पूर्व मुख्यमंत्री और नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने इस मामले पर कहा, ‘‘हिमाचल सरकार बहुत अजीबोगरीब फैसले लेने के लिए पूरे देश भर में चर्चित हो चुकी है। पूरे देश भर में अभी महाकुंभ में स्नान करने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे लेकिन कांग्रेस के नेताओं ने महाकुंभ के इस पवित्र स्नान के लिए जाने में भी संकोच किया। एक तरफ वे सनातन का विरोध करते हैं, दूसरी तरफ मंदिरों से पैसा मांग रहे हैं। तर्क दे रहे हैं कि सरकार के पास पैसे नहीं है जिसके चलते उन्हें मंदिरों से पैसा मांगना पड़ रहा है। मैं समझता हूं, यह बहुत दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है, आज तक कभी भी किसी भी सरकार ने मंदिरों और ट्रस्ट का पैसा लेकर सरकार की योजनाओं के लिए खर्च नहीं किया है।

केवल आपदा के दौरान मंदिरों से पैसा लिया गया है। जैसे कोविड महामारी, बाढ़ आदि जैसी बड़ी आपदा के दौरान ही मंदिरों से धन लिया गया ताकि लोगों की सहायता की जा सके।’’ उन्होंने कहा, ‘‘उस लोगों की जान बचाने के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में मंदिरों से पैसा देने की अपील की गई थी, लेकिन सरकारी योजनाओं को चलाने के लिए कभी मंदिरों से पैसा मांगा गया हो, ऐसा कभी नहीं हुआ। वर्तमान कांग्रेस सरकार ने तो सीधे आदेश जारी कर मंदिरों से पैसा मांगा है। इसके लिए सरकारी अधिकारियों को लगाया गया है। सरकार का यह फैसला हैरान करने वाला है। एक तरफ तो वे सनातन का विरोध करते हैं और सनातन को गालियां देते हैं लेकिन योजनाओं को चलाने के लिए मंदिरों से पैसा मांगा जा रहा है।’’

बेशर्मी की हद

मंदिरों से पैसा मांगे जाने पर चौतरफा घिर जाने के बाद भी कांग्रेस के नेताओं के तेवर कम नहीं हुए हैं। सरकार में पंचायती राज मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने सोशल मीडिया पर इस मामले में टिप्पणी कर कहा है, ‘‘सरकार हमारी है, मुख्यमंत्री हमारे हैं तो कानून भी हमारा चलेगा और फैसले भी हमारे चलेंगे। सरकार को यह तय करना है कि किस पैसे का इस्तेमाल कहां करना है।’’

सरकारी कर्मचारी परेशान

व्यवस्था परिवर्तन के दावे कर सत्ता में आने वाली प्रदेश की कांग्रेस सरकार के खिलाफ सरकारी कर्मचारी नारे लगा रहे हैं, ‘‘यह कैसा व्यवस्था परिवर्तन, न वेतन न प्रमोशन’’ यह नारा हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कर्मचारियों की तरफ से जोर-शोर से लगाया जा रहा है। अभी तक मार्च माह का वेतन और पेंशन भी कर्मचारियों को नहीं मिली है।

सड़कों पर हो चुका है विरोध

हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस सरकार को आए दो वर्ष से अधिक का समय हो चुका है और इन दो वर्षों में युवा, कर्मचारी, पेंशनर और किसान सरकार के खिलाफ कई बार सड़कों पर उतर चुके हैं। यही नहीं, कांग्रेस के अपने विधायक भी उनके खिलाफ बगावत कर पार्टी छोड़ भाजपा में शामिल हो चुके हैं। लोगों का कहना है कि कांग्रेस की ओर से सत्ता में आने से पहले पांच लाख नौकरियां, 300 यूनिट नि:शुल्क बिजली, सभी महिलाओं को 1500 रुपए, गोबर खरीद, ओपीएस समेत जो अन्य वायदे किए गए थे। इन वादों में से किसी को भी वह सही से आज तक पूरा नहीं कर पाई है। सत्ता में आने से पहले जो गारंटियां दी गई थीं, उन्हें पूरा न किया जाना लोगों के दुख और गुस्से का सबसे बड़ा कारण बना हुआ है।

मिल रहीं सुविधाएं भी बंद

हिमाचल सरकार पर लगभग एक लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। कांग्रेस की सरकार बनने से पहले राज्य में लोगों को 125 यूनिट बिजली मुफ्त दी जा रही थी। कांग्रेस 300 यूनिट बिजली मुफ्त देने का वादा कर सत्ता में आई थी। सरकार ने इस वादे को तो पूरा नहीं ही किया, बल्कि कुछ श्रेणियों को छोड़कर बाकी लोगों को दी जा रही 125 यूनिट मुफ्त बिजली दिए जाने को भी बंद कर दिया। भाजपा सरकार ने 2022 में प्रदेश के सभी ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल कनेक्शन मुफ्त कर दिए थे, लेकिन सुक्खू सरकार ने यह कहकर कि जलविभाग की हालत खस्ता है, यह सुविधा भी बंद कर दी। प्रदेश के ऐसे 460 स्कूलों को बंद करके उनका विलय कर दिया जहां छात्रों की संख्या कम थी। बसों में महिलाओं और छात्रों को दी जाने वाली छूट भी बंद कर दी गई।

Topics: जयराम ठाकुरमुफ्त की रेवड़ियांवित्तीय संकटपाञ्चजन्य विशेषतिजोरीमंदिरों पर नियंत्रणमंदिरहिमाचल प्रदेशकांग्रेस सरकार­
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