मिडवाइफ शब्द पर वोकिज़्म का कहर: ट्रांस-जेन्डर विवाद में ब्रिटेन का शोधपत्र
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मिडवाइफ शब्द पर वोकिज़्म का कहर: ट्रांस-जेन्डर विवाद में ब्रिटेन का शोधपत्र चर्चा में

इस शोधपत्र के लेखक का यह मानना है कि “मिडवाइफ” शब्द मध्यकाल से चला आ रहा है और यह पुराना हो चला है एवं साथ ही यह पितृसत्ता का वाहक है।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा
Mar 18, 2025, 01:50 pm IST
in विश्व, विश्लेषण
Britain midwife woke culture

प्रतीकात्मक तस्वीर

यूरोप में वोकिज़्म का शोर लगातार बढ़ता जा रहा है और अब यह पूर्व में लिखी गई रचनाओं और शब्दों तक फैल गया है। ब्रिटेन में Birth Issues in Perinatal Care नामक जर्नल में प्रकाशित एक शोधपत्र में एक प्रस्ताव दिया गया है कि मिडवाइफ शब्द ट्रांस-जेन्डर वाले लोगों के प्रति अन्याय है।

इस शोधपत्र के लेखक का यह मानना है कि “मिडवाइफ” शब्द मध्यकाल से चला आ रहा है और यह पुराना हो चला है एवं साथ ही यह पितृसत्ता का वाहक है।

भारत में जो पहले दाइयाँ हुआ करती थीं, जो प्रसव करवाती थीं एवं प्रसूता तथा नवजात की देखभाल किया करती थीं, उन्हें भी अब लोग मिडवाइफ कहने लगे हैं। कैम्ब्रिज की वेबसाइट पर मिडवाइफ का अर्थ ऐसे व्यक्ति से जो डॉक्टर नहीं है और जो महिलाओं की प्रसव के दौरान सहायता करने के लिए प्रशिक्षित किया गया है। इसमें लिखा है कि वह अक्सर एक महिला ही होती है।

जाहिर है कि महिला प्रसव के दौरान किसी महिला की ही उपस्थिति के कारण सहज रहती है। परंतु बढ़ती ट्रांस जेंडर प्रवृत्ति के चलते परंपरागत शब्द भी वोकनेस का शिकार हो रहे हैं। परंतु मिडवाइफ एक लिंग निरपेक्ष शब्द है, जिसमें पुरुष एवं महिला दोनों ही सम्मिलित होते हैं। कुछ पुरुष भी यह काम करते हैं, जिन्हें मेल मिडवाइफ कहा जाता है।

शोधकर्ता को क्या वाइफ शब्द से समस्या है, क्योंकि वही लैंगिक बोध कराता हुआ शब्द है। वहीं आलोचकों ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज करते हुए इसे बकवास बताया। From Midwife to Lead Perinatal Practitioner: A Utopian Vision नामक इस शोधपत्र के लेखक नॉर्थम्पटन विश्वविद्यालय के मिडवाइफरी के व्याख्याता डॉ. जॉन पेडलटन, तथा कोवेंट्री विश्वविद्यालय की ऐकडेमिक मिडवाइफ से डॉ. सैली पेजारो हैं। इन्होनें इस शोधपत्र में लिखा कि मिडवाइफ के पेशे का जो शीर्षक है, उससे यह पता चलता है कि इस पेशे में सेवा देने वाले लोगों का एक निर्धारित लिंग है। और चूंकि ट्रांस और नॉन-बाइनरी लोगों की संख्या में दिनों दिन वृद्धि हो रही है, और वे ऐसी सेवाओं का भी लाभ लेने के लिए आगे आ रहे हैं, तो यह पेपर सुझाव देता है कि मिडवाइफ के पेशे का शीर्षक मिडवाइफ से बदल दिया जाए और इसे Lead Perinatal Practitioner अर्थात मुख्य प्रसवकालीन चिकित्सक के नाम से पुकारा जाए।

लेखकों का यह भी तर्क है कि मिडवाइफ शब्द आधुनिक समाज के लिए पर्याप्त नहीं है और यह बच्चे पालने में सेक्स और जेन्डर की वही कट्टरपंथी समझ को बनाए रखने के लिए एक माध्यम है। लेखकों का यह भी कहना है कि हो सकता है कि पहले इस शब्द की सामाजिक महत्ता हो, परंतु अब महत्वपूर्ण है कि इस शब्द से परे होकर सोचा जाए और पेशे की पहचान को मजबूत करने के लिए वैकल्पिक भाषा का चयन किया जाए।

इसमें इस शब्द को औपनिवेशिक आदर्श भी बताया गया। इसमें लेखकों ने लिखा है कि यह शब्द लिंग और जन्म के संबंध में दमनकारी उपनिवेशवादी आदर्शों को भी मजबूत करता है, और ऐसा करने से प्रजनन और गर्भकालीन न्याय दोनों के साथ समानता में बाधा उत्पन्न होती है। लेखकों का मानना है कि हो सकता है कि यह शब्द स्वीकार्य हो गया हो, मगर अब इसे बदलना चाहिए।

इसमें भी इस शब्द को लेकर कई तरह के विमर्श बताए गए हैं, जिनमें यह तक है कि आर्थिक रूप से, बच्चे पैदा करना लाभ के लिए पितृसत्तात्मक पूंजीवादी महत्वाकांक्षा से प्रेरित प्रजनन या गर्भकालीन श्रम के रूप में अच्छी विख्यात है परंतु फिर भी समानता की खोज में, इस प्रसव को “महिलाओं”, श्वेत पुनरुत्पादकता और जेन्डर बाइनरी से अलग किया जा सकता है।

इस शोधपत्र में जो भाषा मिडवाइफ और प्रसव के लिए प्रयोग की गई है, उसे लेकर आलोचक भी तल्ख हैं और सोशल मीडिया पर अपने विचार लिख रहे हैं। परंतु यह शोधपत्र अपने विचारों पर अडिग है कि इस पेशे को और समावेशी बनाने के लिए “हम अधिक प्रगतिशील नामकरण की ओर रुख करने का प्रस्ताव करते हैं जो न्याय और समानता को बढ़ावा देता है।“

इनका कहना है कि मिडवाइफ ऐसे कुछ पेशों में से है, जो यह पूरी तरह से स्पष्ट करता है कि यह पूरी तरह से महिलाओं के पक्ष में और उनके द्वारा ही है। सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाएं नकारात्मक ही आईं हैं, जो यह कहती हैं कि वोकिज़्म के पंजे से कम से कम इस महान पेशे को तो बक्श दो!

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