26/11 के आरोपी तहव्वुर राणा की डर भरी चाल : सुप्रीम कोर्ट में लगाई गुहार, कहा- 'भारत गया तो जिंदा नहीं बचूंगा'...
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26/11 के आरोपी तहव्वुर राणा की डर भरी चाल : सुप्रीम कोर्ट में लगाई गुहार, कहा- ‘भारत गया तो जिंदा नहीं बचूंगा’…

26/11 हमले के आरोपी तहव्वुर राणा ने भारत प्रत्यर्पण से बचने के लिए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर टॉर्चर का डर जताया। भारत में लोगों का गुस्सा भड़का, सोशल मीडिया पर आक्रोश। पढ़ें पूरी रिपोर्ट...

Written byShivam DixitShivam Dixit
Mar 6, 2025, 10:30 pm IST
in भारत, विश्व

नई दिल्ली । मुंबई 26/11 हमले का आरोपी तहव्वुर राणा एक बार फिर सुर्खियों में है। प्रत्यर्पण से बचने के लिए उसने नया पैंतरा खेला है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में दायर ताजा याचिका में राणा ने दावा किया है कि भारत भेजे जाने पर उसे “टॉर्चर” का सामना करना पड़ेगा और “बचने की उम्मीद भी कम” है। उसने कोर्ट से प्रत्यर्पण पर तुरंत रोक लगाने की गुहार लगाई है, वरना वह “जल्द मर जाएगा।”

राणा को सता रहा मौत का डर 

तहव्वुर राणा ने अपनी याचिका में कहा, “मैं पाकिस्तानी मूल का मुस्लिम हूं। भारत में मेरे साथ यातना होगी और मुकदमे में जिंदा बचने की संभावना न के बराबर है।” उसने दलील दी कि अगर सुप्रीम कोर्ट ने तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया तो यह मामला अमेरिकी अदालतों के दायरे से बाहर चला जाएगा।

राणा का यह बयान सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है और भारत में लोगों का गुस्सा भड़क उठा है। इससे पहले 21 जनवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट उसकी एक याचिका खारिज कर चुका है, जिसमें उसने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी।

ट्रंप के ऐलान से राणा का प्रत्यर्पण तय

पिछले महीने पीएम नरेंद्र मोदी की अमेरिकी यात्रा के दौरान वाशिंगटन डीसी में डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा ऐलान किया था। संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कहा, “हम तहव्वुर राणा को तुरंत भारत को सौंप रहे हैं। नई दिल्ली से कई और अनुरोध आए हैं, आगे भी प्रत्यर्पण होंगे।” ट्रंप के इस बयान के बाद राणा की बेचैनी बढ़ गई थी, जिसके चलते उसने यह नई याचिका दायर की। भारत सरकार लंबे समय से राणा के प्रत्यर्पण की मांग कर रही है, क्योंकि वह 26/11 हमले के मास्टरमाइंड डेविड हेडली का करीबी सहयोगी रहा है।

कौन है तहव्वुर राणा..?

पाकिस्तानी मूल का तहव्वुर राणा कनाडाई नागरिक है। वह मुंबई हमले में शामिल आतंकी डेविड हेडली का साथी था। हेडली, जिसे दाऊद गिलानी के नाम से भी जाना जाता है, अमेरिकी-पाकिस्तानी मूल का है। 2009 में अमेरिका ने हेडली को गिरफ्तार किया था। जांच में पता चला कि राणा ने हेडली को हमले की साजिश रचने में मदद की थी। राणा पर आरोप है कि उसने मुंबई हमले की रेकी और आतंकियों को लॉजिस्टिक सपोर्ट देने में अहम भूमिका निभाई।

26/11 हमला : वो खौफनाक मंजर

26 नवंबर 2008 को लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने मुंबई को खून से रंग दिया था। समुद्र के रास्ते नाव से आए इन आतंकियों ने ताज होटल, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस और नरीमन हाउस समेत कई ठिकानों पर हमला बोला। चार दिन तक चले इस आतंकी हमले में 18 सुरक्षाकर्मियों सहित 166 लोग मारे गए थे, जबकि 300 से ज्यादा घायल हुए थे। सुरक्षाबलों ने एकमात्र जिंदा आतंकी अजमल कसाब को पकड़ा था, जिसे बाद में फांसी दी गई।

सोशल मीडिया पर आक्रोश

राणा का यह नया दावा भारत में गुस्से की वजह बन गया है। सोशल मीडिया पर लोग उसे “आतंकी” और “कायर” बता रहे हैं। कई यूजर्स ने लिखा, “166 लोगों की मौत का जिम्मेदार अब डर का नाटक कर रहा है।” दूसरी ओर, अमेरिकी कोर्ट इस याचिका पर क्या फैसला लेता है, इस पर सबकी नजरें टिकी हैं। अगर प्रत्यर्पण हुआ तो राणा को भारत में मुकदमे का सामना करना होगा, जहां उसे सजा-ए-मौत तक हो सकती है।

अब आगे क्या..?

राणा की यह चाल कामयाब होगी या नहीं, यह आने वाला वक्त बताएगा। लेकिन इतना तय है कि 26/11 हमले का यह आरोपी अपनी आखिरी सांस तक बचने की जद्दोजहद में लगा है। भारत सरकार और अमेरिका के बीच मजबूत होते रिश्तों के बीच क्या राणा का प्रत्यर्पण होगा? यह सवाल हर किसी के जेहन में है।

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Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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