गुजरात के सुरेन्द्रनगर जिले से विधायक और वरमोरा समूह के निदेशक प्रकाश वरमोरा ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने गुजरात को एक ब्रांड बनाया। उसे वाइब्रेंट गुजरात बना दिया। किसी भी राज्य या जिले के विकास में उद्यमियों की बहुत बड़ी भूमिका होती है। उन्होंने उद्यमियों को ताकत दी। उद्यमों पर बल दिया।
वे 2014 में देश के प्रधानमंत्री बने। तब देश में दो नारे बहुत चल रहे थे- जय जवान, जय किसान। जवान अपने खून-पसीने और बलिदान से देश की रक्षा करता था और वह किसान है, वह अपनी मेहनत और पसीने से देश के अनाज भंडार को बढ़ाता था। तीसरा उद्यमिता तो कहीं न कहीं छूट रहा था। तब उन्होंने कहा कि देश की उन्नति के लिए उद्यमों की भी जरूरत है। हमारा देश 1947 में आजाद हुआ। जापान हमारे साथ था, 1947 में जापान कमजोर हो गया था, लेकिन जापानी बिजनेस कम्युनिटी ने कहा कि हम देश बनाएंगे, तो उन्होंने सोनी, पैरासोनिक, टोयोटा जैसे कई ब्रांड बनाए और वे पूरे देश में फैल गए।
गुजरात से भी छोटे साउथ कोरिया ने भी तय किया कि हम देश को बनाएंगे, तो छोटा देश होने के बावजूद भी उसने एलजी, सैमसंग, हुंडई जैसे ब्रांड दिए। हर किसी का अपना समय होता है। आज हमारा समय है। जैसा कि प्रधानमंत्री कहते हैं कि हमें अपनी अर्थव्यवस्था को 2047 तक 3.5 ट्रिलियन डॉलर की बनाना है। अगर हमें बहुत आगे जाना है तो हमें अपना खुद का ब्रांड बनाने के लिए खुद उद्यमी बनाने होंगे। तभी हम विकसित राष्ट्र की श्रेणी में आ पाएंगे।
‘उत्पादन बढ़ेगा तो हम सबसे आगे होंगे’

ओमेक्स कॉट्सपिन के निदेशक जयेश पटेल ने कहा, ‘‘टेक्सटाइल हमारा पारिवारिक व्यवसाय है। 2012 में गुजरात में हमारी एक टेक्सटाइल नीति आई थी, वहीं से हमारी यात्रा शुरू हुई। सुरेन्द्रनगर हमारा जिला है, यह सबसे बड़ा कपास हरित क्षेत्र है, इसलिए हम चाहते थे कि वहां अच्छी कपास हो। पहले वहां से कपास का निर्यात होता था। हमने फॉरवर्ड इंटिग्रेशन के तहत स्पिनिंग यूनिट शुरू की और उसमें गुजरात की संकर सिक्स कपास का इस्तेमाल किया। यह दुनिया का एक प्रसिद्ध ब्रांड है। इस कपास से बने कपड़ों को सबसे बेहतरीन कपड़ों में गिना जाता है, और चीन जैसे देश भी इसे आयात करते हैं, क्योंकि यह टी-शर्ट के लिए आदर्श सामग्री है। हम ध्यान प्राकृतिक खेती पर रहता है। हम सीधे किसानों से जुड़कर कपास लाते हैं। उससे धागा और फिर कपड़ा बनाते हैं। कपड़ों के जो भी प्रसिद्ध ब्रांड हैं हम इसे उन्हें आयात करते हैं। हमारा प्रति हेक्टेयर उत्पादन कम है। यदि हम इसे बढ़ा पाते हैं, तो कोई भी देश भारत को नहीं हरा सकेगा। हम सबसे आगे होंगे’’
‘शब्द मौन हो जाते हैं, तो शिल्प बोल उठता है’
मूर्तिकार नरेश कुमावत ने कहा, ‘‘जब शब्द मौन हो जाते हैं तो शिल्प बोल उठता है, मूर्ति बोल उठती है। आज मैं यह अनुभव कर रहा हूं। मैं पिछले तीन दशकों से मूर्ति बनाने का काम कर रहा हूं। मेरे पूज्य पिताजी श्री महातूराम जी मेरे गुरु थे। वे एक चित्रकार थे, एक सफल शिक्षक थे, उन्होंने मुझे यह काम सिखाया। मुझे गर्व है कि मैं एक मूर्तिकार हूं। हाल ही में मैंने वृंदावन में चार धाम का निर्माण किया है, मैंने मां वैष्णो देवी, भगवान शंकर, शनि महाराज और राधाकृष्ण धाम की मूर्तियों का निर्माण किया है। आगे भी ऐसे और भी सुन्दर कार्य आएंगे और किए जाएंगे। नए भारत के निर्माण में जिस प्रकार के काम के अवसर हमें एक मूर्तिकार के रूप में मिल रहे हैं, उसी प्रकार के अवसर हम सबको मिल सकते हैं, अगर हम अपने कौशल को निखारें और समय के साथ चलें। अगर हम मूर्तिकला में तकनीक का प्रयोग करते है। तो न इनसे सिर्फ रोजगार पैदा होता है बल्कि संस्कृति को भी बढ़ावा मिलता है।
‘शोध को उद्यमशीलता से जोड़ें’

चार्टेड अकाउंटेंट प्रदीप मोदी ने कहा, ‘‘आज की तारीख में हमारा मुकाबला अमेरिका, चीन, जर्मनी से नहीं है। अभी हमें दो पायदान और ऊपर जाना है। प्रधानमंत्री जी का विश्वास है कि युवाओं के बल पर 2026 तक हम 3 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था पर बन जाएंगे। उद्यमिता को बेहतर करने के लिए जरूरी है शोध, जिसकी हमारे यहां सबसे अधिक कमी है। इसी कारण हमारे युवा अच्छे तरीके से विकास नहीं कर पाते। युवाओं को गहन शोध के बाद ही कोई काम करना चाहिए। अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। लेकिन, एक सच यह भी है कि युवाओं का योगदान लिए बिना हम लोग प्रगति नहीं कर सकते। इसलिए अगर हम शोध के साथ अपनी उद्यमशीलता को जोड़ें तो हम अच्छी प्रगति कर सकते हैं।’’

















