स्थानीय नागरिकों के लिए, अवैध आप्रवासियों की बढ़ती संख्या से आएदिन समस्याएं पैदा हो रही हैं। उनके लिए संसाधन कम पड़ रहे हैं क्योंकि वे उन्हें ऐसे लोगों से साझा करने पड़ रहे हैं जो देश और देश के लोगों के प्रति दुर्भावना से भरे हैं। इतना ही नहीं, नागरिकों को अपनी सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। प्रदर्शनों की वजह से अब ग्रीस सरकार की स्थिरता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
ग्रीस इन दिनों उबल रहा है। उबाल का कारण वही अवैध आप्रवासी हैं जिन्होंने यूरोप में भयंकर अमानवीयता बरपा रखी है। फ्रांस, जर्मनी, नार्वे, ब्रिटेन जैसे देश इस दंश को रोज भुगत रहे हैं, लेकिन इसे रोकने के प्रयास भी कर रहे हैं तो वह आधे—अधूरे मन से। इन देशों के नागरिक अब भर चुके हैं इनकी अराजकता देखकर। सीरिया, पश्चिम एशिया और पाकिस्तान से आकर उक्त देशों में कानूनों को ताक पर रखकर शरिया की मांग कर रहे हैं। ग्रीस भी अब ऐसे ही विरोध प्रदशनों का साक्षी बन रहा है। हाल के दिनों में ग्रीस में बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतरकर सरकार को झकझोर रहे हैं। वे मांग कर रहे हैं कि बस, बहुत हुआ, सरकार आप्रवासन नीति में सुधार करे। नागरिक इस बारे में ग्रीस सरकार के नरम रवैए से गुस्साए हुए हैं।
ग्रीस की आप्रवासन नीति ने पिछले कुछ वर्षों में कई विरोधाभासों को जन्म दिया है। मुख्य विरोधाभास यह है कि सरकार ने आप्रवासियों को शरण देने की नीति अपनाई हुई है। लेकिन इसमें कई समस्याएं और कमजोरियां हैं। आप्रवासी बड़ी संख्या में ग्रीस में प्रवेश कर रहे हैं, जिससे स्थानीय समुदायों पर दबाव बढ़ रहा है। एक अनुमान के अनुसार, रोज लगभग 500 अवैध आप्रवासी समंदर के रास्ते ग्रीस में दाखिल हो रहे हैं। पिछले साल लगभग 60,000 अवैध आप्रवासियों ने इस तरह इस देश में प्रवेश किया था जो उससे पिछले साल यानी 2023 में प्रवेश करने वाले आप्रवासियों से 50 प्रतिशत ज्यादा थे।

अवैध आप्रवासियों को लेकर ग्रीस सरकार की नीति में खामियों के साथ ही उसके नरम रवैए ने स्थानीय नागरिकों में आप्रवासियों के प्रति विरोध की भावना उत्पन्न कर दी है। अवैध आप्रवासियों के प्रति बढ़ते अंसतोष ने ग्रीस की रेाजमर्रा जिंदगी को बहुत प्रभावित किया है।
स्थानीय नागरिकों के लिए, अवैध आप्रवासियों की बढ़ती संख्या से आएदिन समस्याएं पैदा हो रही हैं। उनके लिए संसाधन कम पड़ रहे हैं क्योंकि वे उन्हें ऐसे लोगों से साझा करने पड़ रहे हैं जो देश और देश के लोगों के प्रति दुर्भावना से भरे हैं। इतना ही नहीं, नागरिकों को अपनी सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। प्रदर्शनों की वजह से अब ग्रीस सरकार की स्थिरता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
दूसरी ओर ऐसी भी कुछ आवाजें उठती रही हैं कि जो आप्रवासियों की दृष्टि से आप्रवासन नीति में सुधार की बात करती हैं। उनका कहना है कि सरकार को आप्रवासियों की समस्याओं के समाधान ढूंढने होंगे, उसके लिए ठोस कदम उठाने होंगे और उन्हें ‘समाज में एकीकृत करने’ के उपाय करने होंगे। सिर्फ तभी ग्रीस की सरकार एक ‘स्थिर और शांतिप्रिय समाज का निर्माण’ कर पाएगी, जहां आप्रवासी और स्थानीय नागरिक एक साथ मिलकर रह सकेंगे।

















