महाकुंभ में जिसने जो खोजा, उसे वो मिला, गिद्धों को तो सिर्फ लाशें मिलीं...जानिए सीएम योगी ने ऐसा क्यों कहा?
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महाकुंभ में जिसने जो खोजा, उसे वो मिला, गिद्धों को तो सिर्फ लाशें मिलीं…जानिए सीएम योगी ने ऐसा क्यों कहा?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष को करारा जवाब देते हुए कहा कि हमने समाजवादी पार्टी की तरह आस्था के साथ खिलवाड़ नहीं किया। उनके समय में मुख्यमंत्री को फुर्सत नहीं थी कि वे उस आयोजन को देख सकें, उसकी समीक्षा कर सकें।

Written byसुनील रायसुनील राय
Feb 24, 2025, 07:13 pm IST
inउत्तर प्रदेश
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को बजट सत्र के पांचवें दिन महामहिम राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने विपक्ष द्वारा महाकुंभ का दुष्प्रचार करने पर आड़े हाथों लिया। सीएम योगी ने कहा कि विपक्ष द्वारा महाकुंभ में एक जाति विशेष को वहां जाने से रोकने की बात कही, किसी जाति को रोका नहीं गया था। हमने कहा था कि महाकुंभ में जो सद्भावना से जाएगा उसका स्वागत है। वह सम्मान से कुम्भ में आ सकते हैं, लेकिन जो सद्भावना से नहीं दुर्भावना से जाएगा तो उसके दुर्गति भी होगी। महाकुंभ में अगर किसी ने अव्यवस्था पैदा करने का प्रयास किया। उसके खिलाफ सख्ती से निपटा जाएगा। सरकार ने विपक्ष की तरह आस्था के साथ खिलवाड़ नहीं किया।

सीएम योगी ने कहा कि महाकुंभ आयोजन सनातन धर्मलंबियों का था, लेकिन खुशी उनको भी हो रही थी क्योंकि ऐसा आयोजन पहली बार हुआ और दुनिया में ऐसा आयोजन कहीं नहीं होता है। महाकुंभ में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने एक साथ एक मंच पर आ करके अपने अनुसार आयोजन को आगे बढ़ाने में लगातार योगदान दे रहे हैं। यह हमारे लिए गौरव का विषय होना चाहिए। गत वर्ष अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि में प्राण प्रतिष्ठा का भव्य आयोजन हुआ। उसको भी पूरी दुनिया ने देखा। पूरी दुनिया अयोध्या के प्रति ललायित थी। इस वर्ष महाकुंभ के आयोजन के साथ हमें जुड़ने का अवसर प्राप्त हुआ है। वहीं महाकुंभ के साथ-साथ अयोध्या और काशी को नजदीक से देखने का अवसर आमजन को प्राप्त हुआ है। मेरा मानना है कि यह दो महा आयोजन अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि पर रामलला का विराजमान होना और महाकुंभ का आयोजन। इन दोनों ने ही एक भारत श्रेष्ठ भारत को दर्शाया है। यह प्रधानमंत्री के विजन में मील का पत्थर साबित होगा। यह भारत की आध्यात्मिक परंपरा और आर्थिकी के लिए महत्वपूर्ण आयोजन होने जा रहे हैं। मेरा मानना है कि पूरे आयोजन के प्रति लोगों के मन में जो भाव आया है वह भाव राष्ट्रीय एकता को मजबूती प्रदान करने वाला भाव है। महाकुंभ में भेदभाव की बात कहने वालों ने भी देखा होगा कि पूरे महाकुम्भ में बिना किसी भेदभाव के सभी एक साथ एक घाट पर स्नान कर रहे हैं। इससे बड़ी एकात्मता और एकता का संदेश नहीं हो सकता है। यही सच्चा सनातन धर्म भी है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष को करारा जवाब देते हुए कहा कि हमने समाजवादी पार्टी की तरह आस्था के साथ खिलवाड़ नहीं किया। उनके समय में मुख्यमंत्री को फुर्सत नहीं थी कि वे उस आयोजन को देख सकें, उसकी समीक्षा कर सकें। यही वजह है कि उन्होंने एक नॉन सनातनी को कुंभ का प्रभारी बनाया था, लेकिन यहां मैं स्वयं इसकी समीक्षा लगातार कर रहा था और लगातार कर रहा हूं। यही वजह है कि 2013 के कुंभ में जो भी गया, उसे अव्यवस्था, भ्रष्टाचार और प्रदूषण देखने को मिला। मां गंगा, यमुना और सरस्वती की त्रिवेणी में स्नान करने लायक पानी नहीं था। माॅरिशस के प्रधानमंत्री उसके उदाहरण हैं, जिन्होंने स्नान करने से ही इंकार कर दिया था। वहीं इस बार देश और दुनिया को कोई ऐसा व्यक्ति नहीं था, जो महाकुंभ में शामिल न हुआ हो और लगातार आ रहे हैं। राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति, भूटान के नरेश समेत दुनिया के तमाम देशों से जुड़े 74 देशों के हेड आफ कमिशन भी महाकुंभ में शामिल हुए। सभी ने आयोजन में भागीदार बन करके महाकुंभ को सफल बनाया। पहली बार उत्तर, दक्षिण, पूरब, पश्चिम से लोग आयोजन का हिस्सा बने।

सीएम ने कहा कि सोशल मीडिया हैंडल पर एक सज्जन ने महाकुंभ का विरोध करने वालों पर बहुत ही सटीक टिप्पणी की। उन्होंने लिखा कि पिछले डेढ़ महीने में आप वामपंथियों और समाजवादियों की वॉल खंगाल लीजिए, वहां महाकुंभ को लेकर विषवमन के अलावा कुछ नहीं दिखेगा। उनकी वॉल पर गंदगी, अव्यवस्था, पर्यटकों की परेशानी के अलावा दूसरा कुछ भी नहीं मिलेगा, लेकिन इन सभी से इतर धरातल पर इनकी बजबजाती विचारधारा का कोई असर नहीं है। हज के दौरान अव्यवस्था से होने वाली सैकड़ों मौतें किसी से छुपी नहीं हैं। वहीं भारत के वामपंथी, सेकुलर स्कॉलर महाकुंभ की भव्यता पर उल्टी करते नजर आए हैं। हर बार उनकी कोशिश महाकुंभ को बदनाम करने और फेल करने की रही है, लेकिन ऐसे तमाम लोगों की मनसा को दरकिनार करते हुए करोड़ों लोगों ने आस्था की डुबकी लगाकर उनके जले पर नमक छिड़कने का काम किया है। उन्होंने आगे लिखा है कि महाकुंभ के दौरान दुखद हादसा हुआ। इसके बाद भी आस्था और विश्वास तमाम परेशानियों पर भारी पड़ी। तीर्थ यात्री समस्त परेशानी और मुश्किलों का पहाड़ चढ़ करके भी प्रयागराज महाकुम्भ पहुंचे। वहां से स्नान कर खुशी-खुशी वापस लौटे। रिश्तों के जटिल समीकरण को परिभाषा करता महाकुंभ अब अपने समापन की ओर है, लेकिन यहां से निकला संदेश हर सनातनी के मन में अमिट छाप छोड़ गया, जो वर्षों तक लोगों की बात कही और कहानियों में जीवंत रहेगा। महाकुंभ में अपनी सास को पीठ पर उठाकर कुंभ स्नान करानी वाली बहू को भी लोगों ने देखा होगा, लेकिन सनातन विरोधियों की नजर केवल गंदगी पर पड़ी है।

सीएम योगी ने कहा कि किसी ने सच कहा कि महाकुंभ में जिसने जो तलाशा उसको वह मिला है। महाकुम्भ में गिद्धों को केवल लाश मिली है, सुअरों को गंदगी मिली, संवेदनशील लोगों को रिश्तों की खूबसूरत तस्वीर मिली, आस्थावान को पुण्य मिला, सज्जनों को सज्जनता मिली, गरीबों को रोजगार मिला, अमीरों को धंधा मिला, श्रद्धालुओं को साफ सुथरी व्यवस्था मिली, पर्यटकों को व्यवस्था मिली, सद्भावना वाले लोगों को जाति रहित व्यवस्था मिली, भक्तों को भगवान मिले। इससे साफ है कि सब ने अपने स्वभाव और चरित्र के अनुसार चीजों को देखा है। एक ही घाट पर सभी जाति वर्ग के तीर्थ यात्री बिना भेदभाव के नहाते रहे। सनातन की सुंदरता आखिर समाजवादी और वामपंथियों को कैसे नजर आएगी। वहीं इनके द्वारा लगातार किए जाने वाले प्रश्न, उनकी नियत को ही संदेह के दायरे में खड़ी करती है। यह टिप्पणी अचानक नहीं है, यह भारत की टिप्पणी है और भारत की भावनाओं की टिप्पणी है। जो स्वयं कुछ नहीं कर सकते थे, जिन लोगों ने अपने समय में इस पूरे आयोजन को अव्यवस्था और भ्रष्टाचार का शिकार बनाया था, आज वह महाकुंभ पर इस प्रकार की टिप्पणी करके भारत की भावनाओं के साथ खिलवाड़ करने का काम कर रहे हैं।

Topics: यूपी समाचारUP NewsUP Politicsयोगी आदित्यनाथYogi Adityanathयूपी विधानसभाUP AssemblyMaha Kumbh Melaप्रयागराज महाकुंभ 2025prayagraj maha kumbh 2025
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पाञ्चजन्य ब्यूरो चीफ, लखनऊ, उत्तर प्रदेश [Read more]
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