दिल्ली में भूकंप के झटके किसी बड़े संकट की आहट तो नहीं! भूकंप को लेकर दिल्ली की इमारतें कितनी सुरक्षित?
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दिल्ली में भूकंप के झटके किसी बड़े संकट की आहट तो नहीं! भूकंप को लेकर दिल्ली की इमारतें कितनी सुरक्षित?

17 फरवरी की सुबह 5 बजकर 36 मिनट पर दिल्ली-एनसीआर में भूकंप के तेज झटकों ने अचानक लोगों की नींद उड़ा दी और दहशत में लोग अपने घरों से बाहर निकल गए।

Written byयोगेश कुमार गोयलयोगेश कुमार गोयल
Feb 17, 2025, 11:54 am IST
in दिल्ली
Earthquake

Earthquake

17 फरवरी की सुबह 5 बजकर 36 मिनट पर दिल्ली-एनसीआर में भूकंप के तेज झटकों ने अचानक लोगों की नींद उड़ा दी और दहशत में लोग अपने घरों से बाहर निकल गए। झटके इतने तेज थे कि इमारतें हिलने लगी और ऐसा लगा मानो कोई बम ब्लास्ट हुआ हो। हालांकि नेशनल सेंटर फॉर सीस्मोलॉजी (एनसीएस) के मुताबिक, नई दिल्ली में आया भूकंप रिक्टर स्केल पर 4.0 तीव्रता वाला ही था लेकिन इसका केंद्र नई दिल्ली में जमीन से केवल पांच किलोमीटर की गहराई पर ही था, इसीलिए इसकी गहराई कम होने और केंद्र दिल्ली में होने के कारण ही दिल्ली-एनसीआर में इसे ज्यादा महसूस किया गया। झटके इतने तेज थे कि इमारतें हिलने लगी, पेड़ों पर बैठे पक्षी भी तेज आवाज के साथ इधर-उधर उड़ने लगे और लोग खौफ के साये में अपने घरों से बाहर निकल गए। राष्ट्रीय भूकंप केंद्र (एनसीएस) के मुताबिक, कई वर्षों के बाद भूकंप का केंद्र दिल्ली रहा और इसी कारण यहां लोगों को भूकंप के झटके काफी देर तक महसूस हुए। भूकंप का केंद्र नई दिल्ली के धौला कुआं में दुर्गाबाई देशमुख कॉलेज ऑफ स्पेशल एजुकेशन के पास था।

राहत की बात यही है कि भूकंप के झटकों से जान-माल का कोई नुकसान नहीं हुआ लेकिन लोगों के मन में सवाल यही है कि कहीं दिल्ली एनसीआर सहित उत्तर भारत में हल्के और मध्यम भूकंप के झटके हिमालय क्षेत्र में किसी बड़े भूकंप की आशंका को तो नहीं बढ़ा रहे। दरअसल कुछ भूगर्भ वैज्ञानिकों का मानना है कि अक्सर कई छोटे भूकंप बड़ी तबाही का संकेत होते हैं। दिल्ली-एनसीआर को लेकर खतरा इसलिए भी जताया जाता रहा है क्योंकि पिछले कुछ दशकों में दिल्ली-एनसीआर की आबादी काफी बढ़ी है और ऐसे में यदि यहां 6 से अधिक तीव्रता का भूकंप आता है तो वह भारी तबाही मचा सकता है। एनसीएस के वैज्ञानिकों के मुताबिक दिल्ली को हिमालयी बेल्ट से काफी खतरा है, जहां 8 की तीव्रता वाले भूकंप आने की भी क्षमता है। दिल्ली से करीब दो सौ किलोमीटर दूर हिमालय क्षेत्र में अगर 7 या इससे अधिक तीव्रता का भूकंप आता है तो दिल्ली के लिए बड़ा खतरा है। हालांकि ऐसा भीषण भूकंप कब आएगा, इस बारे में वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका कोई सटीक अनुमान लगाना संभव नहीं है। दरअसल भूकंप के पूर्वानुमान का न तो कोई उपकरण है और न ही कोई मैकेनिज्म।

दिल्ली में बड़े भूकंप के खतरे को देखते हुए भारतीय मौसम विभाग के भूकंप रिस्क असेसमेंट सेंटर द्वारा कुछ समय पहले दिल्ली-एनसीआर में इमारतों के मानक में शीघ्रातिशीघ्र बदलाव किए जाने का परामर्श दिया गया था। राष्ट्रीय भू-भौतिकीय अनुसंधान संस्थान (एनजीआरआई) के वैज्ञानिकों के मुताबिक दिल्ली-एनसीआर में आ रहे भूकंपों को लेकर अध्ययन चल रहा है। उनका कहना है कि इसके कारणों में भू-जल का गिरता स्तर भी एक प्रमुख वजह सामने आ रही है, इसके अलावा अन्य कारण भी तलाशे जा रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दिल्ली की ऊंची-ऊंची आलीशान इमारतें और अपार्टमेंट किसी बड़े भूकंप को झेलने की स्थिति में हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार दिल्ली में बार-बार आ रहे भूकंप के झटकों से पता चलता है कि दिल्ली-एनसीआर के फॉल्ट इस समय सक्रिय हैं और इन फॉल्ट में बड़े भूकंप की तीव्रता 6.5 तक रह सकती है। इसीलिए विशेषज्ञ कहते रहे हैं कि बार-बार लग रहे भूकंप के इन झटकों को बड़े खतरे की आहट मानते हुए दिल्ली को नुकसान से बचने की तैयारियां कर लेनी चाहिएं। दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों में निरन्तर लग रहे झटकों को देखते हुए दिल्ली हाईकोर्ट भी कई बार कड़ा रूख अपना चुका है। हाईकोर्ट ने कुछ समय पहले भी दिल्ली सरकार, डीडीए, एमसीडी, दिल्ली छावनी परिषद, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद को नोटिस जारी करते हुए पूछा था कि तेज भूकंप आने पर लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं? अदालत द्वारा चिंता जताते हुए कहा गया था कि सरकार और अन्य निकाय हमेशा की भांति भूकंप के झटकों को हल्के में ले रहे हैं जबकि उन्हें इस दिशा में गंभीरता दिखाने की जरूरत है।

अदालत का कहना था कि भूकंप जैसी विपदा से निपटने के लिए ठोस योजना बनाने की जरूरत है क्योंकि भूकंप से लाखों लोगों की जान जा सकती है। दिल्ली सरकार तथा एमसीडी द्वारा दाखिल किए गए जवाब पर सख्त टिप्पणी करते हुए अदालत यहां तक कह चुकी है कि भूकंप से शहर को सुरक्षित रखने को लेकर उठाए गए कदम या प्रस्ताव केवल कागजी शेर हैं और ऐसा नहीं दिख रहा कि एजेंसियों ने भूकंप के संबंध में अदालत द्वारा पूर्व में दिए गए आदेश का अनुपालन किया हो। दिल्ली-एनसीआर भूकंप के लिहाज से काफी संवेदनशील है, जो दूसरे नंबर के सबसे खतरनाक सिस्मिक जोन-4 में आता है। इसीलिए अदालत को कहना पड़ा था कि केवल कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा बल्कि सरकार द्वारा जमीनी स्तर पर ठोस काम करने की जरूरत है। दरअसल वास्तविकता यही है कि पिछले कई वर्षों में भूकंप से निपटने की तैयारियों के नाम पर केवल खानापूर्ति ही हुई है।

दिल्ली-एनसीआर में पिछले कुछ समय में आए भूकंप के ज्यादातर झटके भले ही रिक्टर पैमाने पर कम तीव्रता वाले रहे हों और 17 फरवरी को आया भूकंप भी रिक्टर पैमाने पर 4.0 तीव्रता का ही रहा हो किन्तु इस भूंकप के जोरदार झटकों ने जिस कदर लोगों को खौफजदा कर दिया, ऐसे में भूकंप पर शोध करने वाले ऐसे झटकों को बड़े खतरे की आहट मान रहे हैं। इसीलिए अधिकांश भूकंप विशेषज्ञों का कहना है कि दिल्ली एनसीआर की इमारतों को भूकंप के लिए तैयार करना शुरू कर देना चाहिए ताकि बड़े भूकंप के नुकसान को न्यूनतम किया जा सके। एक अध्ययन के मुताबिक दिल्ली में करीब 90 फीसदी मकान क्रंकीट और सरिये से बने हैं, जिनमें से 90 फीसदी इमारतें रिक्टर स्केल पर छह तीव्रता से तेज भूकंप को झेलने में समर्थ नहीं हैं। एनसीएस के अध्ययन के अनुसार दिल्ली का करीब 30 फीसदी हिस्सा जोन-5 में आता है, जो भूकंप की दृष्टि से सर्वाधिक संवेदनशील है। पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की एक रिपोर्ट में भी कहा गया है कि दिल्ली में बनी नई इमारतें 6 से 6.6 तीव्रता के भूकंप को झेल सकती हैं जबकि पुरानी इमारतें 5 से 5.5 तीव्रता का भूकंप ही सह सकती हैं। विशेषज्ञ बड़ा भूकंप आने पर दिल्ली में जान-माल का ज्यादा नुकसान होने का अनुमान इसलिए भी लगा रहे हैं क्योंकि करीब 2.25 करोड़ आबादी वाली दिल्ली में प्रतिवर्ग किलोमीटर दस हजार लोग रहते हैं और कोई बड़ा भूकंप 300-400 किलोमीटर की रेंज तक असर दिखाता है।

वैसे तो वैज्ञानिकों के मुताबिक भूकंप की तीव्रता की अधिकतम सीमा तय नहीं की गई है। हालांकि रिक्टर स्केल पर 7 या उससे अधिक तीव्रता वाले भूकंप को सामान्य से कहीं अधिक खतरनाक माना जाता है। रिक्टर स्केल पर 2 या उससे अधिक तीव्रता वाला भूकंप ‘सूक्ष्म भूकंप’ कहलाता है, जिसके झटके सामान्यतः महसूस नहीं होते। 4.5 की तीव्रता वाले भूकंप घरों को क्षतिग्रस्त कर सकते हैं। बहरहाल, यहां सवाल इस बात का नहीं है कि कितनी तीव्रता का भूकंप नुकसान पहुंचा सकता है बल्कि सवाल यह है कि निरन्तर आ रहे भूकंप को रोका कैसे जाए और क्या ऐसे कदम उठाए जाएं, जिससे विकास की गति भी प्रभावित न हो और प्रकृति को नुकसान भी न हो ताकि आने वाले समय में दिल्ली जैसे शहर जोशीमठ जैसी भयावह त्रासदी झेलने को विवश न हों। सरकारों के साथ लोगों को भी इन सवालों को गंभीरता से लेते हुए कोई ठोस कदम उठाने की सख्त जरूरत है।

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