नई दिल्ली । भारत में मौनी अमावस्या के दौरान महाकुंभ में हुई भगदड़ की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है, हालाँकि उसके पीछे के कारणों की जाँच चाल रही है, रिपोर्ट आने के बाद कार्रवाई होना भी निश्चित है। लेकिन इस घटना के बाद से तथाकथित सेक्युलर और लिबरल लोगों और मीडिया पूरे आयोजन में “अव्यवस्था” और “सुरक्षा में नाकामी” बताने लगती है। बिना इस बात को ध्यान में रखते हुए कि महाकुंभ 2025 दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है, इसमें भाग लेने आए श्रद्धालुओं की संख्या ही कई देशों की आबादी से कहीं अधिक ज्यादा है।
लेकिन जब बात सऊदी अरब में होने वाली हज भगदड़ों की आती है, तो यही तथाकथित सेक्युलर और लिबरल मीडिया चुप्पी साध लेते हैं।
आज हम आपको अपनी इस रिपोर्ट में उन 12 बड़े हादसों के बारे में बतायेंगे जो हज यात्रा के दौरान हुए, जिनमें 10,000 से अधिक हाजियों की मौत हो गई। लेकिन क्या आपने किसी अंतरराष्ट्रीय संगठन या सेक्युलर मीडिया को सऊदी अरब की आलोचना करते देखा..?
आइए जानते हैं कि 1990 से 2024 तक हज यात्रा के दौरान हुए 12 बड़े हादसों का काला सच :
🕋 हज यात्रा के दौरान 12 बड़े हादसे (1990-2024)
| 📅 तारीख | 👥 कुल हज यात्री | 💀 मृतक | 🏥 घायल | 📌 कारण |
|---|---|---|---|---|
| 31 जुलाई, 1987 | 16,19,324 | 400 | 2,000 | ईरानी शिया हाजियों और सऊदी पुलिस के बीच झड़प |
| 2 जुलाई, 1990 | 14,83,294 | 1,426 | – | मिना की सुरंग में दम घुटने से भगदड़ |
| 23 मई, 1994 | 18,34,780 | 270 | – | भीड़ का अत्यधिक दबाव, प्रशासन की कमजोर व्यवस्था |
| 15 अप्रैल, 1997 | 19,42,851 | 343 | 1,500+ | गैस सिलेंडर ब्लास्ट से आग |
| 9 अप्रैल, 1998 | 18,32,114 | 188 | – | पुल पर संतुलन बिगड़ने से भगदड़ |
| 5 मार्च, 2001 | 19,13,263 | 35 | – | भीड़ का अनियंत्रित होना और सुरक्षा की कमी |
| 11 फरवरी, 2003 | 20,12,074 | 14 | – | जमरत ब्रिज पर भीड़ नियंत्रण की नाकामी |
| 1 फरवरी, 2004 | 21,64,469 | 251 | 244 | अव्यवस्थित हज यात्री और प्रशासन की लापरवाही |
| 22 जनवरी, 2005 | 22,58,050 | 3 | – | भीड़ नियंत्रण में प्रशासन की नाकामी |
| 12 जनवरी, 2006 | 23,78,636 | 345 | 1,000 | बसों से गिरी सामान की वजह से भगदड़ |
| 24 सितंबर, 2015 | 19,52,817 | 2,411 | – | दो बड़े समूहों के टकराने से भगदड़ |
| 14-19 जून, 2024 | 18,33,164 | 1,301 | – | 50°C से अधिक तापमान, गर्मी से मौत |
यहां आपको बता दें कि महाकुंभ में हज की तुलना में 50 गुना अधिक श्रद्धालु आते हैं। फिर भी भारतीय प्रशासन इसे कुशलता से संभालता है। वहीं हज में भगदड़ और अव्यवस्थाओं पर कोई चर्चा नहीं होती, लेकिन महाकुंभ पर छोटी-छोटी बातों को तूल केवल इस भव्य आयोजन को बदनाम करने के लिए दिया जाता है। जबकि 1990 से 2024 के बीच की इन 12 बड़ी घटनाओं में हजारों हज यात्रियों की मौत हुई। जिसके पीछे के अत्यधिक भीड़, प्रशासनिक लापरवाही और सुरक्षा उपायों की कमी मुख्य कारण रहे।
अब सवाल यह उठता है कि जब भारत में कुंभ मेले जैसी धार्मिक यात्राओं में कोई हादसा होता है, तो उसे “सरकारी नाकामी” और “अव्यवस्था” कहा जाता है, लेकिन सऊदी अरब में हज यात्रा के दौरान हजारों मौतों पर कोई सवाल क्यों नहीं उठता?
कुंभ मेले में करोड़ों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। वहीं सऊदी अरब में हज यात्रा के दौरान की जाने वाली व्यवस्थाएं जिनका गुणगान पूरे विश्व में इस्लाम के मानने वालों के द्वारा किया जाता है, बावजूद उसके 10,000 से अधिक मौतें क्यों हुईं? इस सवाल पर कोई चर्चा नहीं की जाती, ना ही जाँच की मांग की जाती है। वहीं भारत के कथित लिबरल और सेक्युलर लोग इस पर क्यों नहीं बोलते?
हर बार महाकुंभ पर हल्ला क्यों..?
यह कोई पहला अवसर नहीं है जब सनातन के सबसे बड़े आयोजन कुंभ की छवि को खराब करने का प्रयास किया जा रहा हो, इससे पहले भी 2003 कुंभ में हुई हल्की भगदड़ को “अव्यवस्था” बताकर दुष्प्रचारित किया गया था। 2013 कुंभ में लाखों लोग शामिल हुए, लेकिन कोई बड़ी घटना नहीं हुई, फिर भी मीडिया ने नेगेटिव रिपोर्टिंग की। 2019 प्रयागराज कुंभ को दुनिया का सबसे व्यवस्थित धार्मिक आयोजन कहा गया, फिर भी कई मीडिया आउटलेट्स ने निगेटिव प्रचार किया। अब इस पर सवाल उठता है कि क्या भारत में धार्मिक आयोजनों को निशाना बनाना ही सेक्युलरिज्म है..?

















