वॉर के तीन यार : आईएनएस सूरत, नीलगिरी और वाघशीर
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होम रक्षा

वॉर के तीन यार : आईएनएस सूरत, नीलगिरी और वाघशीर

- समंदर में अपनी ताकत का विस्तार करता भारत

Written byयोगेश कुमार गोयलयोगेश कुमार गोयल
Jan 16, 2025, 08:00 pm IST
in रक्षा, विश्लेषण

भारतीय नौसेना के इतिहास में तीन महाबलियों के एक साथ नौसेना में शामिल होने के साथ ही 15 जनवरी की तारीख गौरवशाली इतिहास के रूप में दर्ज हो गई। नौसेना के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ, जब एक डिस्ट्रॉयर, एक फ्रिगेट और एक सबमरीन को एक साथ नौसेना में कमीशन किया गया हो। नौसेना को मिले इन तीन महाबलियों में दो युद्धपोत आईएनएस सूरत और आईएनएस वाघशीर तथा एक पनडुब्बी नीलगिरी शामिल हैं, जिन्हें नौसेना के बेड़े में शामिल कर लिया गया। समंदर में अपनी ताकत का विस्तार करते भारत ने नौसेना को ये तीनों विनाशक युद्धपोत सौंप दिए हैं, जिससे भारतीय नौसेना की ताकत में कई गुना वृद्धि हो गई है। मुंबई के नौसेना डॉकयार्ड में तीन युद्धपोतों आईएनएस सूरत, आईएनएस नीलगिरी और आईएनएस वाघशीर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सेवा में शामिल किया गया।

ये तीनों युद्धपोत डिफेंस सेक्टर में स्वदेशी निर्माण का बेहतरीन उदाहरण हैं, जिन्हें मुंबई के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) में डिजाइन किया और बनाया गया है। ‘आईएनएस सूरत’ एक स्टील्थ गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर है जबकि ‘आईएनएस नीलगिरी’ प्रोजेक्ट 17ए की पहली स्टील्थ फ्रिगेट है और ‘आईएनएस वाघशीर’ एक स्कॉर्पीन-क्लास सबमरीन है। आईएनएस नीलगिरी और आईएनएस वाघशीर क्रमशः अत्याधुनिक फ्रिगेट और पनडुब्बी हैं, जो लंबे समय तक समुद्र में रहने और शत्रु की गतिविधियों पर नजर रखने के साथ समुद्र के भीतर छिपे खतरों से निपटने के लिए तैयार की गई हैं। इन तीनों को नौसेना में कमीशन किए जाने के बाद भारतीय नौसेना के पास अब 15 हमलावर पनडुब्बियों के अलावा 2 बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियां, 13 विध्वंसक पोत और 14 फ्रिगेट का सशक्त बेड़ा हो गया है।

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आईएनएस सूरत, आईएनएस वाघशीर और आईएनएस को नौसेना में शामिल करने का कदम भारत की समुद्री क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र का रणनीतिक व आर्थिक महत्व तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य में जिस प्रकार बढ़ा है, साथ ही चीन के नौसैनिक बेड़े के निरंतर विस्तार ने इस क्षेत्र के अस्थिर होने की आशंकाएं बढ़ाई हैं, ऐसे में इन तीनों अत्याधुनिक युद्धपोतों का नौसेना में शामिल होना सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है और यह इस क्षेत्र में भारत की बढ़ती ताकत को रेखांकित करता है।

भारत ने एक साथ इन तीन जहाजों को नौसेना के बेड़े में शामिल करके न केवल अपने जल क्षेत्र को सुरक्षित रखने बल्कि हिंद महासागर और व्यापक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करने की अपनी प्रतिबद्धता को स्पष्ट रेखांकित किया है। इससे पूरी दुनिया को यह संदेश गया है कि भारत अपनी सीमाओं और समुद्री हितों की रक्षा करने में पूर्ण रूप से सक्षम है। आईएनएस सूरत तथा आईएनएस नीलगिरी में महिला अधिकारियों और नाविकों के लिए भी विशेष आवासीय सुविधाएं प्रदान की गई हैं, जो नौसेना में लैंगिक समावेशन और महिला अधिकारियों की भागीदारी को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इन तीनों युद्धपोतों के नौसेना में शामिल होने से भारतीय नौसेना को पारंपरिक और आधुनिक खतरों से निपटने में और अधिक सक्षमता प्राप्त होगी। पी15बी गाइडेड मिसाइल डिस्ट्रॉयर प्रोजेक्ट का चौथा और आखिरी जहाज आईएनएस सूरत दुनिया के सबसे बड़े और सबसे आधुनिक विध्वंसक जहाजों में से एक है, जिसमें 75 फीसदी स्वदेशी सामान है और यह अत्याधुनिक हथियार-सेंसर पैकेज तथा उन्नत नेटवर्क-केंद्रित क्षमताओं से लैस है। पी17ए स्टील्थ फ्रिगेट प्रोजेक्ट का पहला जहाज आईएनएस नीलगिरी नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया है, जिसमें तमाम अत्याधुनिक सुविधाएं हैं।

पी75 स्कॉर्पीन प्रोजेक्ट की छठी और अंतिम पनडुब्बी आईएनएस वाघशीर पनडुब्बी निर्माण में भारत की बढ़ती विशेषज्ञता का प्रतिनिधित्व करती है, जिसे फ्रांस के नौसेना समूह के सहयोग से बनाया गया है।

एआई से लैस नौसेना का पहला युद्धपोत है आईएनएस सूरत

स्वदेशी रूप से निर्मित आईएनएस सूरत एक फ्रंटलाइन युद्धपोत और गाइडेड मिसाइल विध्वंसक जहाज है, जिसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह दुश्मन के रडार में नहीं आएगा। यह देश के समुद्री क्षेत्र में किसी भी संभावित खतरे को नष्ट करने की क्षमता रखता है। इसमें सतह से हवा में मार करने वाले दो वर्टिकल लांचर मौजूद हैं। इससे एक बार में 16 ब्रह्मोस मिसाइल फायर की जा सकती है। इसमें रॉकेट लांचर, टॉरपीडो लांचर भी मौजूद हैं, जो दुश्मन की सबमरीन को नष्ट करने में सक्षम हैं। भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट 15बी के तहत बनाया गया आईएनएस सूरत दुश्मनों के खिलाफ सटीक प्रहार करने की क्षमता रखता है। इसकी नींव 7 नवंबर 2019 को रखी गई थी और 17 मई 2022 को इसे लांच किया गया था। यह भारतीय नौसेना का अब तक का सबसे तेजी से निर्मित स्वदेशी डिस्ट्रॉयर है, जिसे 31 महीनों में ही बनाकर तैयार कर लिया गया। 164 मीटर लंबा यह युद्धपोत स्टील्थ फीचर्स और उन्नत रडार सिस्टम से लैस है, जिससे इसे दुश्मनों द्वारा ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। 7400 टन के डिस्प्लेस्मेंट वाले इस युद्धपोत में संयुक्त गैस और गैस प्रणोदन सिस्टम है, जो चार गैस टर्बाइनों से संचालित होता है।

‘आईएनएस सूरत’ नाम गुजरात के किसी शहर के नाम पर रखा गया भारत का पहला युद्धपोत है, जिसमें 75 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री है। आईएनएस सूरत से दिन और रात यानी किसी भी समय और किसी भी मौसम में ऑपरेशन बखूबी संचालित किए जा सकते हैं। इस युद्धपोत से चेतक, एएलएच, सी किंग और एमएच-60आर सहित कई हेलीकॉप्टरों को ऑपरेट किया जा सकेगा। आईएनएस सूरत भारत का अभी तक का सबसे तेज स्वदेशी विध्वंसक है, जिसका परीक्षण 15 जून 2024 को शुरू हुआ था और 25 नवंबर 2024 को खत्म हुआ था अर्थात 6 महीने से भी कम समय में इसने सभी परीक्षण पास कर लिए, जो अपने आप में एक रिकॉर्ड है। इस युद्धपोत को सतह से सतह और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों, एंटी-शिप मिसाइलों, टॉरपीडो सहित अन्य अत्याधुनिक हथियारों और सेंसरों से सुसज्जित किया गया है। समुद्री परीक्षणों के दौरान इस पोत ने 30 नॉट्स (लगभग 56 किलोमीटर प्रतिघंटा) की गति प्राप्त की। आईएनएस सूरत आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस से लैस भारतीय नौसेना का पहला युद्धपोत है, जिसका स्वदेशी रूप से विकसित एआई, इसकी ऑपरेशनल ताकत को बहुत बढ़ाता है।

ब्लू वॉटर ऑपरेशन का किंग आईएनएस नीलगिरी

आईएनएस नीलगिरी भारतीय नौसेना के प्रोजेक्ट 17ए के तहत बनाया गया अत्याधुनिक तकनीकों से लैस पहला स्टील्थ फ्रिगेट है, जो समुद्री सुरक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है। मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (एमडीएल) का कहना है कि आईएनएस नीलगिरी दुनिया में कहीं भी इसी श्रेणी के सबसे बेहतरीन जहाजों के बराबर है, जो दुश्मन की पनडुब्बियों, सतह के युद्धपोत, एंटी-शिप मिसाइलों और लड़ाकू विमानों से मुकाबला कर सकता है। आईएनएस नीलगिरी की नींव 28 दिसंबर 2017 को रखी गई थी और इसे 28 सितंबर 2019 को पानी में उतारा गया था। आईएनएस नीलगिरी ने अपने समुद्री परीक्षण अगस्त 2024 में शुरू किए थे और सभी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरे किए। आईएनएस नीलगिरी बिना किसी सहायक जहाज के स्वतंत्र रूप से संचालन करने में सक्षम है तथा नौसेना टास्क फोर्स के प्रमुख के रूप में भी काम कर सकता है।

6670 टन के डिस्प्लेस्मेंट वाले 149 मीटर लंबे आईएनएस नीलगिरी को भारतीय नौसेना के युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया है और इसे बढ़ी हुई क्षमता, समुद्र में लंबे समय तक रहने तथा स्टील्थयुक्त उन्नत सुविधाओं के साथ नौसेना में शामिल किया गया है। स्वदेशी फ्रिगेट की अगली पीढ़ी को दर्शाता यह युद्धपोत दुश्मन के जमीनी टारगेट के साथ-साथ समुद्र में पानी के नीचे सबमरीन को भी टारगेट कर सकता है। एयर डिफेंस गन और 8 लंबी दूरी की सर्फेस-टू-एयर मिसाइलों से लैस आईएनएस नीलगिरी पर दो हेलीकॉप्टर भी लैंड कर सकते हैं। इसमें सुपरसोनिक सतह-से-सतह पर मार करने वाली मिसाइल के अलावा मीडियम रेंज सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें भी लगाई गई हैं। इसके अलावा इसमें रैपिड फायर क्लोज-इन वेपन सिस्टम भी लगाए गए हैं।

आईएनएस नीलगिरी में कुल 8 ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइलें, सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों के लिए एक वर्टिकल लांच सिस्टम, एक 76-मिलीमीटर गन और एक एके-630 क्लोज-इन हथियार प्रणाली सहित उन्नत हथियार और प्रणालियां हैं। इसमें शामिल की गई अत्याधुनिक विशेषताएं इसकी स्टील्थ, उत्तरजीविता और समुद्री क्षमता को बढ़ाती हैं।

आईएनएस सूरत की ही भांति आईएनएस नीलगिरी से भी एमएच-60आर सीहॉक्स सहित कई तरह के हेलीकॉप्टर ऑपरेट किए जा सकते हैं। एमएफ-स्टार रडार से सुसज्जित होने के कारण यह दुश्मन के रडार से बचकर सटीक हमला करने में सक्षम है। इसमें रेल-लेस हेलीकॉप्टर ट्रैवर्सिंग सिस्टम और विजुअल एड और लैंडिंग सिस्टम लगाया गया है, जिससे इससे रात-दिन अर्थात् किसी भी समय ऑपरेशन चलाए जा सकते हैं। ‘ब्लू वाटर’ वातावरण में ऑपरेशन करने तथा भारत के समुद्री हितों के क्षेत्र में पारंपरिक और गैर-पारंपरिक दोनों ही प्रकार के खतरों से निपटने में आईएनएस नीलगिरी पूरी तरह सक्षम है। ब्लू वॉटर ऑपरेशन के लिए डिजाइन किए गए आईएनएस नीलगिरी में रडार सिग्नेचर को कम करने के लिए विशेष डिजाइन का उपयोग किया गया है। ‘इंटीग्रेटेड प्लेटफॉर्म मैनेजमेंट सिस्टम’ (आईपीएमएस) से सुसज्जित यह शिप पारंपरिक और गैर-पारंपरिक खतरों से निपटने में पूरी तरह सक्षम है।

दुनिया की सबसे शांत पनडुब्बी है आईएनएस वाघशीर

अत्याधुनिक तकनीक और गुप्त संचालन क्षमता के लिए जानी जाने वाली आईएनएस वाघशीर भारतीय नौसेना की स्कॉर्पीन-क्लास प्रोजेक्ट 75 के तहत निर्मित छठी और अंतिम डीजल-इलैक्ट्रिक सबमरीन है। प्रोजेक्ट-75 का उद्देश्य भारतीय नौसेना के लिए 18 पारंपरिक पनडुब्बियों और छह परमाणु ऊर्जा से चलने वाली पनडुब्बियों का निर्माण करना है। भारत का यह प्रोजेक्ट बेहद महत्वाकांक्षी है लेकिन चूंकि भारत ने टेक्नोलॅजी ट्रांसफर की शर्त रखी हुई है, इसीलिए अभी तक किसी देश के साथ डील नहीं हो पाई है। फ्रांसीसी कंपनी इस प्रोजेक्ट से यह कहकर पीछे हट गई थी कि तकनीक हस्तांतरण के लिए प्रोजेक्ट का बजट कम है। इसी प्रोजेक्ट के तहत बनी आईएनएस वाघशीर को मॉड्यूलर निर्माण तकनीक के तहत बनाया गया है। इस तकनीक के कारण इसकी भविष्य की क्षमताओं को उन्नत करना आसान हो जाएगा। विशेष रूप से भारत के समुद्री हितों की रक्षा के लिए तैयार की गई इस सबमरीन का निर्माण फ्रांस के नेवी ग्रुप के सहयोग से किया गया है। 40 फीट ऊंची आईएनएस वाघशीर दुश्मन के रडार से बचने, इलाके की निगरानी करने, उच्च तकनीक वाली ध्वनि नियंत्रण, खुफिया जानकारी जुटाने में सक्षम है।

वाघशीर की उल्लेखनीय विशेषता यह है कि इसे दुनिया की सबसे शांत और अनुकूलनीय डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों में से एक माना गया है, जिसे बेहद शांत संचालन और दुश्मन के इलाकों में गुप्त रूप से काम करने के लिए डिजाइन किया गया है। 67 मीटर लंबी और 1565 टन वजनी यह सबमरीन पानी के अंदर 35 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से दौड़ सकती है। एंटी सर्फेस और एंटी सबमरीन ऑपरेशन को अंजाम देने में माहिर इस सबमरीन में वायर-गाइडेड टॉरपीडो, एंटी-शिप मिसाइल और उन्नत सोनार सिस्टम लगाए गए हैं। इसमें एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) तकनीक को भविष्य में जोड़ने की क्षमता है।

आईएनएस वाघशीर सतह-रोधी युद्ध, पनडुब्बी-रोधी युद्ध, खुफिया जानकारी एकत्रित करना, क्षेत्र की निगरानी और विशेष अभियानों सहित कई प्रकार के मिशनों को अंजाम दे सकती है, जो पानी की सतह और पानी के नीचे के लक्ष्यों को सटीकता से नष्ट करने में सक्षम है। इस पनडुब्बी की एडवांस स्टील्थ क्षमताओं में एक हाइड्रोडायनामिक आकार शामिल है, जो शोर और चुंबकीय संकेतों को काफी कम कर देता है, जिससे यह एक रहस्यमयी पनडुब्बी बन जाती है। स्कॉर्पीन क्लास की इस पनडुब्बी को दुश्मन पर चुपके से हमला करने के लिए ही तैयार किया गया है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार तथा सामरिक मामलों के विश्लेषक हैं)

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