गत दिसंबर को लखनऊ में मासिक पत्रिका ‘राष्ट्रधर्म’ के विशेषांक ‘विकसित भारत’ का लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख श्री स्वांत रंजन ने कहा कि सभी को साथ लेकर चलने से ही विकसित भारत का निर्माण होगा। विकसित भारत बनाने में समाज को भी लगना होगा। जो आक्रमणकारी ताकतें बाहर से आईं, उन्होंने देश पर कुठाराघात किया। ऐसे में हम अपने ‘स्व’ को ही भूल गए।
समाज आत्मकेंद्रित हो गया, असंगठित हो गया। आज समाज धीरे-धीरे संगठित हो रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष के लगातार प्रयासों से ही समाज जागरण हुआ है। इसी में एक प्रयत्न था राम मंदिर आंदोलन। उन्होंने कहा कि 2013-14 से 2022-23 के मध्य 25 करोड़ भारतीय गरीबी रेखा से बाहर आए हैं।
राष्ट्र जागरण का आंदोलन बीते 100 वर्ष से चल रहा है। इस आंदोलन की परिणति मात्र राम मंदिर बनाने की नहीं थी। इससे समाज का जागरण करना अनिवार्य था। उन्होंने स्व पर बल देते हुए कहा कि हमें अपने मूल को पहचानना होगा। उन्होंने ‘नागरिक कर्तव्य’ के बारे में कहा कि हमें आत्मानुशासन का पालन करते हुए समाज निर्माण करने में सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए।
कुटुम्ब प्रबोधन पर उनका कहना था कि परिवार में मिल-जुलकर रहना, एक-दूसरे के साथ बांटकर खाना बहुत आवश्यक है। ऐसा करके हम अपनी परंपरा और संस्कृति को बरकरार रख सकते हैं। उन्होंने पर्यावरण पर जोर देते हुए कहा कि हम सबको प्रकृति के साथ ही चलना होगा। उन्होंने सामाजिक समरसता को भी विकसित भारत के लिए आवश्यक बताते हुए कहा कि संघ इन विषयों को लेकर गांव-गांव में जाएगा।
कार्यक्रम के अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सभापति कुंवर मानवेंद्र सिंह ने कहा कि विकसित भारत, ज्ञान का भारत, ध्यान भारत, सुरक्षित भारत और स्वच्छ भारत होगा। राष्ट्रधर्म के संपादक प्रो. ओमप्रकाश पांडेय ने कहा कि राष्ट्रधर्म का दायित्व है कि वह समाज का जो घटनाक्रम है, उसे सबके समक्ष प्रस्तुत करे। राष्ट्र के प्रति इस धर्म का पालन सतत प्रकार से किया जा रहा है। कार्यक्रम में अनेक वरिष्ठ जन उपस्थित थे।

















