कनाडा में खालिस्तानियों के बढ़ते आतंक और ब्रैम्पटन स्थित हिन्दू सभा मंदिर में हमले के विरोध में सोमवार को दिल्ली हिन्दू सिख ग्लोबल फोरम ने दिल्ली स्थित कनाडाई दूतावास के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। साथ ही कनाडाई राजदूत को ज्ञापन सौंपकर मंदिर पर हमले में शामिल अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
अपने ज्ञापन में हिन्दू-सिख फोरम ने अपने ज्ञापन में 4 नवंबर 2024 को ब्रैम्पटन मंदिर में हमले की निंदा की। साथ ही अपने गुप्त उद्देश्यों के लिए कनाडा के अंदर विभाजन का माहौल बनाकर अलगाववाद को बढ़ावा देने वाले तत्कों को लेकर चिंता जाहिर की गई। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने ट्रूडो सरकार से कनाडा में रह रहे अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा संबंधी चिंताओं को दूर करने और दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने की मांग की।
सिख समुदाय का कहना है कि उन्होंने सदा मंदिरों की सुरक्षा और उनके निर्माण में सहयोग दिया। सिखों ने चेतावनी दी है कि हिन्दू और सिखों को बांटने की साजिश को किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस प्रदर्शन में प्रोफेसर हरजिंदर कौर, सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर पी.एस. गोथरा, सरदार तजिंदर सिंह मारवाह, सरदार जीतेंद्र सिंह संटी, सरदार चरणजीत लवली, प्रोफेसर पवनदीप सिंह खालसा और सेवानिवृत्त आईपीएस गुरुदेव सिंह समेत अन्य अगुवा रहे। जबकि प्रदर्शन में 1,200 से अधिक लोग शामिल रहे, जिनमें 300 से अधिक महिलाएं शामिल थीं।

मंदिर हमले के आऱोपी को गिरफ्तार कर छोड़ा
गौरतलब है कि कनाडा पुलिस ने ब्रैम्पटन के मंदिर में हिंदू भक्तों पर खालिस्तान समर्थक हमले के सिलसिले में 35 वर्षीय एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। अधिकारियों ने बताया कि ब्रैम्पटन के इंद्रजीत गोसल नामक व्यक्ति पर हिंदू सभा मंदिर के बाहर विरोध प्रदर्शन के बाद हथियार से हमला करने का आरोप लगाया गया था।
पुलिस ने हिंसा और उसके बाद हुए प्रदर्शनों के सिलसिले में पहले ही तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। हालांकि, इंद्रजीत गोसल को गिरफ्तार करने के बाद शर्तों के साथ रिहा किया गया और उसे बाद में ब्रैम्पटन में ओंटारियो कोर्ट ऑफ जस्टिस में पेश होना है।

















