US Election Results : ट्रंप की ऐतिहासिक जीत के 10 बड़े कारण, जिन पर नहीं गया कमला हैरिस का ध्यान, यही बना जीत का विज्ञान
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US Election Results : ट्रंप की ऐतिहासिक जीत के 10 बड़े कारण, जिन पर नहीं गया कमला हैरिस का ध्यान, यही बना जीत का विज्ञान

यह चुनाव अमेरिकी मतदाताओं के लिए कई मुद्दों पर आधारित था। इस रिपोर्ट में पढ़िए किन कारणों ने ट्रंप को विजयी बनाया और कमला हैरिस को हार का सामना क्यों करना पड़ा।

Written byShivam DixitShivam Dixit
Nov 6, 2024, 07:27 pm IST
in विश्व
चित्र - डोनाल्ड ट्रंप और कमला हैरिस

चित्र - डोनाल्ड ट्रंप और कमला हैरिस

अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की ऐतिहासिक जीत ने एक बार फिर से राजनीतिक पटल पर हलचल मचा दी है। रिपब्लिकन पार्टी के उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप ने भारी बहुमत के साथ डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार और उपराष्ट्रपति कमला हैरिस को हरा दिया, जो अमेरिकी चुनावी इतिहास में दुर्लभ घटना मानी जाती है। यह चुनाव अमेरिकी मतदाताओं के लिए कई मुद्दों पर आधारित था, जिनमें अर्थव्यवस्था, महंगाई, इमीग्रेशन, विदेश नीति, और बाइडेन प्रशासन के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर शामिल थे। आइए जानते हैं किन कारणों ने ट्रंप को विजयी बनाया और कमला हैरिस को हार का सामना क्यों करना पड़ा।

1. अर्थव्यवस्था

अमेरिकी चुनावों में अर्थव्यवस्था हमेशा एक महत्वपूर्ण मुद्दा रही है। बाइडेन के कार्यकाल में अर्थव्यवस्था में कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले। कोरोना महामारी के दौरान अमेरिका को बड़ी आर्थिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा। ट्रंप ने अपने चुनाव प्रचार में बार-बार इस मुद्दे को उठाते हुए बताया कि उनके कार्यकाल में अर्थव्यवस्था कितनी मजबूत स्थिति में थी। उन्होंने जनता को यह यकीन दिलाने की कोशिश की कि वे अर्थव्यवस्था को बेहतर कर सकते हैं और इसे विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनाए रख सकते हैं।

2. महंगाई

बाइडेन प्रशासन के कार्यकाल में अमेरिका में महंगाई तेजी से बढ़ी। विशेषकर खाद्य और ऊर्जा कीमतों में वृद्धि ने आम अमेरिकी नागरिकों को प्रभावित किया। ट्रंप ने लगातार इस मुद्दे को जनता के बीच उठाते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में महंगाई कम थी और अमेरिकी परिवारों की आय सुरक्षित थी। इस मुद्दे पर ट्रंप ने लोगों को विश्वास दिलाया कि उनकी नीतियां महंगाई को नियंत्रित कर सकती हैं और अर्थव्यवस्था को पुनः मजबूत बना सकती हैं।

3. जो बाइडेन की उम्र और नेतृत्व क्षमता

जो बाइडेन की उम्र और उनकी शारीरिक क्षमता चुनावी मुद्दा बन गए। बाइडेन की उम्र के कारण उनकी नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने की शक्ति पर सवाल उठे। बाइडेन पहली प्रेजिडेंशियल डिबेट में ट्रंप के सामने कमजोर दिखे, जिससे उनकी छवि कमजोर बनी। इसके अलावा, पार्टी के भीतर भी उनकी उम्र को लेकर चिंता बनी रही, जिससे वे पीछे हटने पर मजबूर हुए। उनकी जगह कमला हैरिस को उम्मीदवार बनाया गया, लेकिन वह समय पर प्रभाव नहीं बना सकीं।

4. कमला हैरिस का देर से मैदान में आना

जो बाइडेन के पीछे हटने के बाद कमला हैरिस को उम्मीदवार बनाया गया, लेकिन उन्हें समय की कमी का सामना करना पड़ा। हैरिस को कम समय में खुद को साबित करना पड़ा और कई रैलियों में उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि बहुत से लोग अभी भी उनके बारे में ज्यादा नहीं जानते हैं। यह देरी उनकी चुनावी रणनीति को कमजोर कर गई, और वे कई राज्यों में मजबूत अभियान नहीं चला सकीं।

5. अवैध इमीग्रेशन का मुद्दा

अवैध इमीग्रेशन अमेरिकी चुनाव में एक भावनात्मक मुद्दा था, जिसे ट्रंप ने अपने अभियान का मुख्य हिस्सा बनाया। उन्होंने बाइडेन प्रशासन पर आरोप लगाया कि वह इमीग्रेशन के मुद्दे पर लापरवाह रवैया अपनाता है। ट्रंप ने इस मुद्दे को सख्ती से उठाया और इमीग्रेशन नीति को कठोर बनाने का वादा किया। कई मतदाताओं ने ट्रंप के इस रुख को समर्थन दिया, क्योंकि वे अपने देश की जनसांख्यिकी में तेजी से हो रहे बदलाव को लेकर चिंतित थे।

6. विदेश नीति पर ट्रंप का प्रभावी प्रचार

ट्रंप ने बाइडेन प्रशासन की विदेश नीति को लेकर भी जमकर हमला किया। खासकर यूक्रेन और मिडिल ईस्ट में बढ़ते संघर्ष को लेकर ट्रंप ने बाइडेन पर सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि बाइडेन प्रशासन का रुख इन संघर्षों को सुलझाने में असफल रहा है और इससे अमेरिका की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ा है। इसके विपरीत, ट्रंप ने वादा किया कि वे विदेश नीति में सख्ती अपनाएंगे और अमेरिकी संसाधनों का उपयोग केवल देश के हित में करेंगे।

7. ट्रंप के खिलाफ केस का उनके पक्ष में काम करना

डोनाल्ड ट्रंप वर्तमान में चार आपराधिक मामलों का सामना कर रहे हैं। ट्रंप के समर्थकों ने इस मामले को उनके खिलाफ साजिश के रूप में देखा और इसे न्यायिक उत्पीड़न का नाम दिया। इसके परिणामस्वरूप, ट्रंप को जनता से सहानुभूति मिली, और उनके समर्थक उनके प्रति अधिक वफादार हो गए। चुनाव के दौरान इन मामलों में कोई निर्णायक फैसला नहीं आया, जिससे विरोधियों को भी ट्रंप के खिलाफ हमले का पर्याप्त अवसर नहीं मिला।

8. ट्रंप समर्थकों का मजबूत नेटवर्क और प्रचार अभियान

ट्रंप समर्थक, जिन्हें ‘MAGA’ (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) के नाम से जाना जाता है, ने चुनाव प्रचार में सोशल मीडिया का जमकर इस्तेमाल किया। उन्होंने कमला हैरिस को एक कमजोर नेता के रूप में चित्रित किया और ट्रंप को ताकतवर विकल्प बताया। ट्रंप समर्थकों ने यह दिखाने की कोशिश की कि उनकी टीम में एलन मस्क, विवेक रामास्वामी, रॉबर्ट कैनेडी जूनियर जैसे प्रभावशाली लोग हैं, जो एक मजबूत कैबिनेट बना सकते हैं।

9. एलन मस्क का समर्थन

एलन मस्क, दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति, ने ट्रंप के लिए प्रचार अभियान में बड़ी भूमिका निभाई। मस्क ने अपने प्लेटफॉर्म पर ट्रंप का समर्थन किया और उनके लिए प्रचार किया। उन्होंने अमेरिका PAC में 119 मिलियन से अधिक का निवेश किया और सोशल मीडिया पर ट्रंप के समर्थन में कई पोस्ट और रि-पोस्ट किए। मस्क के इस समर्थन ने ट्रंप के पक्ष में लोगों की धारणाएं मजबूत कीं।

10. बाइडेन प्रशासन के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर

बाइडेन प्रशासन के कार्यकाल में रूस-यूक्रेन युद्ध, हमास-इज़राइल संघर्ष और बढ़ती महंगाई जैसे कई मुद्दों ने सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ाई। खासकर अरब और मुस्लिम अमेरिकियों में इस नाराजगी का फायदा ट्रंप ने उठाया। उन्होंने अपनी रैलियों में गाजा और यूक्रेन के मुद्दों को उठाकर जनता का समर्थन हासिल किया और खुद को एक निर्णायक नेता के रूप में पेश किया, जो इन संघर्षों का समाधान कर सकता है।

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Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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